जब वह काला लिबास पहने खलनायक आया तो पूरा माहौल बदल गया। आसमान में काले बादल छा गए और डर का साया सब पर छा गया। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार का वो सीन देखकर रोंगटे खड़े हो गए। उसकी आँखों में जो क्रूरता थी वो सच में दिल दहला देने वाली थी।
वो बूढ़ा साधु जिसके सिर पर लौकी बंधी थी उसकी हालत देखकर दिल पसीज गया। जमीन पर गिरा हुआ वो किसी की मदद के लिए तरस रहा था। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार में ऐसे पात्रों का दर्द हमेशा दर्शकों को झकझोर देता है। उसकी आँखों में बेबसी साफ दिख रही थी।
जादुई शक्तियों का वो टकराव देखने लायक था। एक तरफ नीली ऊर्जा थी तो दूसरी तरफ लाल रंग की खतरनाक शक्ति। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार के इस एपिसोड में विजुअल इफेक्ट्स ने कमाल कर दिया। हर धमाके के साथ सीट से चिपक जाना तय था।
सफेद पोशाक और फूलों से सजी वो नायिका सच में अप्सरा लग रही थी। लेकिन उसके चेहरे पर जो चिंता थी वो कहानी के गंभीर मोड़ को बता रही थी। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार में उसके किरदार की गहराई ने मुझे बहुत प्रभावित किया।
उस खलनायक के कंधों पर लगे नुकीले हथियार और उसके चेहरे का घमंड सच में डरावना था। वो जब हंसा तो लगा जैसे पूरा राज्य कांप उठा हो। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार में उसका अभिनय इतना दमदार था कि नफरत भी हुई और डर भी।