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रणदेव तो सिर्फ 99 लेवल का है, और मैं 999 लेवल का हूँवां10एपिसोड

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रणदेव तो सिर्फ 99 लेवल का है, और मैं 999 लेवल का हूँ

बीस साल की उम्र में 999 लेवल का अजेय योद्धा शिवा सिंह पहाड़ से उतरा। उसकी माँ ने कागजात गड़बड़ कर दिए, जिससे वह अपने उपकारी को दुश्मन समझ बैठा। वह "दुश्मन को मारने" के अजीब काम के साथ तारा मल्होत्रा के करीब आया। उसकी योजना थी — उसे प्यार में फँसाकर उसकी संपत्ति हड़पना। लेकिन तारा की मजबूत और खूबसूरत आत्मा ने उसका दिल पिघला दिया। वह उसे चोट नहीं पहुँचा पाया, और दोनों के बीच प्यार पनपने लगा।
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इस एपिसोड की समीक्षा

तलवार की परीक्षा और रहस्य

तलवार निकालने की यह प्रतियोगिता सच में रोमांचक है। सफेद पोशाक वाली महिला ने पहले कोशिश की और बिजली जैसी चमक दिखाई। लेकिन असली खेल तो समर चौहान और नीहा के आने से शुरू हुआ। लगता है यह कोई साधारण घटना नहीं है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली बात यहाँ फिट बैठती है। भूरे कोट वाले व्यक्ति की शक्तियां रहस्यमयी लग रही हैं।

काले कोट वाले की अकड़

काले कोट वाले लड़के की हंसी बहुत झिंझोड़ने वाली है। वह सबका मजाक उड़ा रहा है लेकिन उसे क्या पता असली ताकत किसके पास है। जब नीहा चौहान ने तलवार छूने की कोशिश की तो पूरा मैदान हिल गया। यह दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो गए। ऐसा लग रहा है कि भूरे कोट वाला व्यक्ति सबको बचा रहा है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ।

बुजुर्ग की करामात

बुजुर्ग व्यक्ति की हालत देखकर तरस आया। वह तलवार निकालने की कोशिश में गिर पड़ा। शायद इस तलवार में कोई जादू है जो कमजोरों को चुनता नहीं है। समर चौहान का आगमन बहुत दमदार था। उनकी बेटी नीहा भी कम नहीं है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। यह संवाद इस दृश्य की ताकत को बढ़ा देता है।

लाल गलीचे का युद्ध

लाल गलीचे पर यह समारोह किसी युद्ध से कम नहीं लग रहा। हर किसी की नजरें उस प्राचीन तलवार पर टिकी हैं। सफेद पोशाक वाली महिला ने हिम्मत दिखाई पर आगे क्या होगा यह देखना बाकी है। भूरे कोट वाले की आंखों में चश्मा और चेहरे पर अलग ही तेज है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। वह जरूर कोई बड़ा गुरु होगा।

नीहा की बहादुरी

नीहा चौहान की हिम्मत को सलाम। इतनी छोटी उम्र में उसने खतरे को भांपा नहीं। जब वह हवा में उड़ी तो सच में डर लग रहा था। लेकिन भूरे कोट वाले ने उसे संभाल लिया। यह प्रेम वाला मोड़ बहुत अच्छा लगा। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। कहानी में ऐसे बदलाव ही जान डालते हैं।

समर की चिंता

समर चौहान के चेहरे पर चिंता साफ दिख रही थी। वह अपने परिवार की इज्जत बचाने आए हैं। पीछे खड़े लोग बस तमाशबीन बनकर रह गए हैं। काले कोट वाले को जवाब मिलना चाहिए। जादुई प्रभाव बहुत शानदार हैं। तलवार से निकलती रोशनी ने सबका ध्यान खींच लिया। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ।

पवित्र मंच का माहौल

इस जगह का नाम बादलों वाला मंच जैसा लग रहा है। वहां का माहौल बहुत पवित्र और गंभीर है। जब तलवार चमकी तो सबकी सांसें रुक गईं। भूरे कोट वाले व्यक्ति की शैली बहुत अलग है। वह सबको नियंत्रण कर रहा है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। यह लाइन बार-बार दिमाग में आ रही है।

असली लड़ाई की शुरुआत

सफेद पोशाक वाली महिला और भूरे कोट वाले के बीच कुछ खास है। जब उसने तलवार उठाई तो उसकी आंखों में चमक थी। लेकिन समर और नीहा के आने से समीकरण बदल गए। अब लगता है असली लड़ाई शुरू होगी। कार्यवाही के दृश्य बहुत तेज रफ्तार के हैं। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। दर्शक बंधे रहते हैं।

ताकत की पहचान

गिरने वाले बुजुर्ग को उठाने वाला कोई नहीं था। सब बस देखते रहे। यह दिखाता है कि यहां सिर्फ ताकत की पूजा होती है। नीहा की उड़ान और फिर पकड़े जाना सबसे श्रेष्ठ दृश्य था। भूरे कोट वाले की गति देखकर हैरानी हुई। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। इस संवाद ने दृश्य को यादगार बना दिया।

अंत का रोमांच

अंत में जब भूरे कोट वाले ने नीहा को गले लगाया तो सब शांत हो गया। ऐसा लगा जैसे वह उसे बचाने के लिए ही वहां था। समर चौहान भी हैरान रह गए। यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी यह देखने के लिए मैं बेताब हूँ। दृश्य की गुणवत्ता और अभिनय दोनों शानदार हैं। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ।