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रणदेव तो सिर्फ 99 लेवल का है, और मैं 999 लेवल का हूँवां3एपिसोड

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रणदेव तो सिर्फ 99 लेवल का है, और मैं 999 लेवल का हूँ

बीस साल की उम्र में 999 लेवल का अजेय योद्धा शिवा सिंह पहाड़ से उतरा। उसकी माँ ने कागजात गड़बड़ कर दिए, जिससे वह अपने उपकारी को दुश्मन समझ बैठा। वह "दुश्मन को मारने" के अजीब काम के साथ तारा मल्होत्रा के करीब आया। उसकी योजना थी — उसे प्यार में फँसाकर उसकी संपत्ति हड़पना। लेकिन तारा की मजबूत और खूबसूरत आत्मा ने उसका दिल पिघला दिया। वह उसे चोट नहीं पहुँचा पाया, और दोनों के बीच प्यार पनपने लगा।
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इस एपिसोड की समीक्षा

चश्मे वाला जादूगर

इस वीडियो में चश्मे वाला पात्र बहुत मजेदार लगता है। प्राचीन और आधुनिक समय का मिश्रण अच्छा लगा। जब उसने लकड़ी के बक्से खोले तो हैरानी हुई। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली लाइन बहुत हिट है। तारा मल्होत्रा की एंट्री धमाकेदार थी। रात के सीन में रोमांस बढ़ गया। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का मजा आया। कहानी में ट्विस्ट है।

लाल साड़ी का गुस्सा

लाल कपड़े वाली महिला का गुस्सा देखने लायक था। उसने बक्से वापस कर दिए। फिर आदमी भाग गया। पहाड़ की तलहटी में वह फोटो देख रहा था। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ कहकर वह घमंड दिखाता है। शहर की रोशनी में मिलन हुआ। तारा मल्होत्रा का किरदार रहस्यमयी है। ड्रामा और कॉमेडी का सही संतुलन है।

समय का सफर

समय के सफर जैसी कहानी लग रही है। पुराने जमाने के कपड़े और आधुनिक शहर का कंट्रास्ट। उसने टांगहुलू खाते हुए टकराव किया। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ बोलकर वह अपनी ताकत बताता है। फोटो में वही लड़की थी। अब वह उसे ढूंढ रहा है। एक्टिंग बहुत नेचुरल है। दर्शक बंधे रहते हैं।

बक्सों का रहस्य

लकड़ी के बक्सों में क्या था यह जानने की उत्सुकता बनी रहे। फोटो देखकर वह खुश हो गया। शायद वह किसी को याद कर रहा था। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली बात उसकी पावर दिखाती है। तारा मल्होत्रा से मिलने के बाद कहानी बदलेगी। रात का माहौल बहुत सुंदर था। विजुअल्स शानदार हैं।

कॉमेडी का तड़का

कॉमेडी अंदाज में यह सीरीज बहुत आगे है। चश्मा पहनकर प्राचीन लुक अजीब लगता है। फिर भी वह कूल है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ कहकर वह हंसाता है। भागने का सीन एक्शन से भरा था। शहर में वह अकेला नहीं है। तारा मल्होत्रा की एंट्री नई उम्मीद देती है। नेटशॉर्ट ऐप पर सीरीज देखना पसंद आया।

यादों की झलक

भावनात्मक पल जब उसने फोटो देखी। शायद वह पिछले जन्म को याद कर रहा है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ बोलकर वह खुद को साबित करता है। लाल साड़ी वाली महिला नाराज थी। फिर शहर में सफेद कपड़े वाली मिली। कहानी में गहराई है। हर एपिसोड में नया मोड़ आता है। यह ड्रामा देखने लायक है।

एक्शन और रोमांस

एक्शन और रोमांस का मिश्रण बहुत अच्छा है। वह बक्सों को लेकर भागा क्यों? यह सवाल बना रहता है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली डायलॉग डिलीवरी जबरदस्त है। तारा मल्होत्रा का लुक बहुत प्यारा था। रात की सड़क पर वह टकरा गए। अब आगे क्या होगा यह जानना है। विजुअल इफेक्ट्स अच्छे हैं।

पहाड़ से शहर तक

पहाड़ के रास्ते में वह खुश दिख रहा था। बक्सों में उसकी यादें थीं। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ कहकर वह अपनी पहचान बताता है। शहर की भीड़ में वह किसी को ढूंढ रहा है। तारा मल्होत्रा से मुलाकात हो गई। कहानी में जादू है। दर्शकों को यह पसंद आएगा। नेटशॉर्ट ऐप का इंटरफेस भी अच्छा है।

दो दुनिया का मिलन

प्राचीन और आधुनिक दुनिया का कनेक्शन दिलचस्प है। चश्मे वाला आदमी रहस्यमयी है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ बोलकर वह कॉमेडी करता है। लाल कपड़े वाली का गुस्सा असली लगता था। फिर शहर में नई कहानी शुरू हुई। तारा मल्होत्रा का किरदार महत्वपूर्ण है। प्लॉट ट्विस्ट बहुत अच्छे हैं।

अंत का इंतजार

अंत में वह उसे गले लगाता है। यह पल बहुत इमोशनल था। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली लाइन याद रह जाती है। शायद वह उसे बचाने आया था। टांगहुलू वाला सीन मजेदार था। कहानी आगे बढ़ेगी। नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीरीज ट्रेंड कर रही है। सभी को देखनी चाहिए। बहुत एंटरटेनिंग है।