नाग वाली शर्ट वाला विपक्षी शुरू में बहुत घमंडी लग रहा था लेकिन जब जादुई ताकत दिखाई गई तो उसकी हालत खराब हो गई। नायक की शांति और उसकी आंखों पर चश्मा बहुत शानदार लगा। काली पोशाक वाली के चेहरे पर डर साफ दिख रहा था जब लड़ाई शुरू हुई। यह दृश्य बताता है कि रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली बात सच है। घुंघट वाले गुंडे भी कुछ नहीं कर पाए। अंत में सभाकक्ष का दृश्य बहुत भव्य लगा जहां सबने एक दूसरे को चुनौती दी। मुझे यह साहसिक और नाटक का मिश्रण बहुत पसंद आया क्योंकि इसमें नयापन है।
इस दृश्यचित्र में शक्ति के स्तर का अंतर बहुत साफ दिखाया गया है। जब नायक ने अपनी चमकती हुई ताकत का इस्तेमाल किया तो विपक्षी के होश उड़ गए। सफेद पोशाक वाली सुंदरी का प्रवेश बहुत ही राजसी तरीके से हुआ। पारंपरिक कपड़ों और आधुनिक चश्मे का मेल अनोखा लगा। दर्शक के रूप में मुझे लगा कि रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली लाइन बिल्कुल सही बैठती है। सभाकक्ष में खड़े लोगों के चेहरे के भाव भी देखने लायक थे। यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।
शुरुआत का संघर्ष बहुत तीव्र था जहां जमीन पर गिरा हुआ व्यक्ति दर्द से कराह रहा था। नायक ने बिना ज्यादा मेहनत किए दुश्मन को हरा दिया जो उसकी ताकत को दर्शाता है। चीनी पोशाक पहनी हुई साथी की मुस्कान रहस्यमयी लग रही थी। मंच रचना और रोशनी ने माहौल को बहुत गंभीर बना दिया। मुझे यह संवाद बहुत याद रहेगा कि रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। काले लिबास वाले गुप्तचर भी बहुत खतरनाक लग रहे थे। अंत में जब सब एक साथ आए तो माहौल में तनाव साफ झलक रहा था।
नायक का अंदाज बहुत लाजवाब था जब उसने अपने हाथ से ऊर्जा निकाली। विपक्षी टोली के नेता को लगा था कि वह जीत जाएगा लेकिन उसे गलतफहमी हुई। काली पोशाक वाली लड़की और नायक के बीच का मेल अच्छा लगा। रंगों का इस्तेमाल और दृश्य कोण बहुत पेशेवर थे। इस कहानी का मूल मंत्र यही है कि रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। सभाकक्ष के दृश्य में सभी पात्रों की पोशाकें अलग अलग थीं। यह कार्यक्रम देखकर मैं अगली कड़ी का इंतजार नहीं कर पा रहा हूं।
इस कार्यक्रम में पारंपरिक और आधुनिक दुनिया का मिलन बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। नायक के बालों की शैली और उसका चश्मा अनोखा लग रहा था। जब विपक्षी गिरा तो उसके चेहरे पर हैरानी साफ दिख रही थी। सफेद साड़ी वाली सुंदरी का व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली लगा। मुझे यह लाइन बहुत पसंद आई कि रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। कमरे की सजावट और लाल गलीचे ने शाही अहसास दिलाया। सभी कलाकारों ने अपने किरदार को बहुत अच्छे से निभाया है।
साहसिक क्रम बहुत तेज रफ्तार का था जिसमें एक पल में सब कुछ बदल गया। नाग छाप वाली शर्ट वाला व्यक्ति बहुत गुस्से में था लेकिन बेबस हो गया। नायक की आवाज में जो ठहराव था वह उसकी ताकत को बता रहा था। काले कोट वाले गुंडे कुछ भी नहीं कर सके। यह साबित करता है कि रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। सभाकक्ष में खड़े अन्य लोगों की प्रतिक्रियाएं भी दिलचस्प थीं। यह दृश्यचित्र देखकर मुझे लगा कि यह एक बड़ी कहानी की शुरुआत है।
कहानी में जो रहस्य बना हुआ है वह बहुत आकर्षक लग रहा है। नायक और उसके साथियों का प्रवेश जैसे किसी राजा का हो। विपक्षी पक्ष के लोग डरे हुए लग रहे थे जब जादुई शक्ति दिखाई गई। काली पोशाक वाली की खामोशी भी बहुत कुछ कह रही थी। मुझे यह संवाद बहुत भारी लगा कि रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। वातावरण बहुत आलीशान था जो कहानी की गंभीरता को बढ़ाती है। मुझे यह देखना है कि आगे कौन सी चुनौती आएगी।
दृश्यचित्र की शुरुआत में ही एक बड़ा धमाका होता है जब विपक्षी को हराया जाता है। नायक का आत्मविश्वास बहुत उच्च था जो उसकी शारीरिक भाषा से दिख रहा था। सफेद पोशाक वाली सुंदरी बहुत खूबसूरत लग रही थीं। पृष्ठभूमि में संगीत और ध्वनि प्रभाव बहुत सटीक थे। यह बात बिल्कुल सच है कि रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। सभाकक्ष के दृश्य में सभी की नजरें नायक पर थीं। यह कार्यक्रम साहसिक प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है।
इस दृश्यचित्र अंश में जो शक्ति संबंध दिखाए गए हैं वे बहुत दिलचस्प हैं। नायक ने बिना हिले दुश्मन को धक्का दे दिया जो उसकी क्षमता को दर्शाता है। चीनी पोशाक वाली साथी की मुस्कान में कुछ छिपा हुआ लग रहा था। काले लिबास वाले लोग रहस्यमयी ताकत का हिस्सा लग रहे थे। मुझे यह लाइन बहुत प्रभावशाली लगी कि रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। अंत में जब सभी एक साथ आए तो माहौल में तनाव था। यह कहानी आगे बहुत रोमांचक होने वाली है।
अंतिम दृश्य में सभी पात्रों का एक साथ होना बहुत नाटकीय लग रहा था। नायक ने अपने चश्मे को ठीक किया जो उसकी ठंडा मिजाज को दिखाता है। विपक्षी टोली के नेता को अपनी गलती का अहसास हो चुका था। सफेद पोशाक वाली सुंदरी का रवैया बहुत मजबूत था। यह संवाद पूरी कहानी का सार है कि रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ। लाल गलीचा और भव्य सभाकक्ष ने माहौल को और भी गंभीर बना दिया। मुझे यह कार्यक्रम बहुत पसंद आया और मैं इसे दूसरों को भी सुझाऊंगा।