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रणदेव तो सिर्फ 99 लेवल का है, और मैं 999 लेवल का हूँवां60एपिसोड

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रणदेव तो सिर्फ 99 लेवल का है, और मैं 999 लेवल का हूँ

बीस साल की उम्र में 999 लेवल का अजेय योद्धा शिवा सिंह पहाड़ से उतरा। उसकी माँ ने कागजात गड़बड़ कर दिए, जिससे वह अपने उपकारी को दुश्मन समझ बैठा। वह "दुश्मन को मारने" के अजीब काम के साथ तारा मल्होत्रा के करीब आया। उसकी योजना थी — उसे प्यार में फँसाकर उसकी संपत्ति हड़पना। लेकिन तारा की मजबूत और खूबसूरत आत्मा ने उसका दिल पिघला दिया। वह उसे चोट नहीं पहुँचा पाया, और दोनों के बीच प्यार पनपने लगा।
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इस एपिसोड की समीक्षा

ग्रे सूट वाले की साजिश

ग्रे सूट वाला व्यक्ति फोन पर संदेश भेज रहा था। उसकी योजना कुछ गड़बड़ लग रही थी। तभी सफेद पोशाक वाली महिला कमरे में आई। उसके साथ काले वस्त्र वाला आदमी था। माहौल तनावपूर्ण हो गया। सब लोग हैरान थे। यह कहानी बहुत दिलचस्प है। लगता है शक्ति का खेल शुरू हो गया है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली बात यहाँ सच लगती है। अंत में धूसरे बालों वाला पात्र आया। यह कल्पना तत्व अच्छा है। मुझे अगला भाग देखना है। बहुत रहस्य बना हुआ है। सभी कलाकारों ने अच्छा किया।

काले चश्मे का राज

काले चश्मे वाला व्यक्ति बहुत रहस्यमयी लग रहा था। उसने चश्मा उतारा तो सब चौंक गए। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। सफेद वस्त्र वाली महिला बहुत शांत थी। ग्रे सूट वाले को अपनी ताकत पर घमंड था। लेकिन असली ताकत सामने आ गई। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ जैसी शक्ति यहाँ दिखाई दी। बैठक कक्ष का माहौल बहुत गंभीर था। दीवारें कंक्रीट की थीं। प्रकाश व्यवस्था बहुत अच्छी थी। यह आधुनिक कार्यालय और प्राचीन शक्ति का मिश्रण है। मुझे यह अवधारणा बहुत पसंद आई। आगे क्या होगा देखना बाकी है।

धमाकेदार प्रवेश

दृश्य की शुरुआत ही रहस्य से होती है। संदेश पढ़कर पता चला कि कोई साजिश रची जा रही है। महिला का प्रवेश बहुत धमाकेदार था। उसके पीछे खड़ा व्यक्ति कोई साधारण नहीं लग रहा था। ग्रे सूट वाले की हंसी झूठी लग रही थी। उसे नहीं पता था कि सामने कौन है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली संवाद यहाँ सही बैठती है। अंत वाला पात्र तो बिल्कुल अलग था। उसके चेहरे पर निशान थे। यह कहानी आगे बहुत आगे जाएगी। निर्माण गुणवत्ता भी अच्छी है। वस्त्र बहुत सुंदर थे।

शक्ति का संतुलन

इस दृश्य में शक्ति संतुलन बहुत तेजी से बदले। पहले ग्रे सूट वाला नियंत्रण में लग रहा था। फिर सफेद पोशाक वाली महिला आई और सब बदल गया। काले वस्त्र वाले की चुप्पी भी डरावनी थी। उसने बिना बोले ही सबको बता दिया। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली बात यहाँ सार्थक है। बैठक मेज पर सब चुप थे। फूलों की व्यवस्था भी दिख रही थी। यह विवरण अच्छी लगी। कलाकारों के भाव बहुत सटीक थे। मुझे यह नाटक बहुत पसंद आ रहा है। आगे की कहानी का इंतजार है।

महिला का आत्मविश्वास

महिला का आत्मविश्वास देखने लायक था। वह डरी नहीं बल्कि सामने खड़ी हुई। उसके गहने बहुत सुंदर थे। काले चश्मे वाले ने अपनी ताकत दिखाई। ग्रे सूट वाले का चेहरा उतर गया था। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली शक्ति यहाँ काम आई। पृष्ठभूमि संगीत भी तनाव बढ़ा रहा था। कैमरा कोण बहुत अच्छे थे। निकट दृश्य ने भावनाएं दिखाईं। यह लघु फिल्म बहुत रोचक है। मुझे और भाग देखने हैं। कहानी बहुत गहरी लग रही है।

अंत का मोड़

अंत में जो पात्र आया वह सबसे अलग था। उसके बाल सफेद थे और चेहरे पर निशान थे। यह कल्पना तत्व अप्रत्याशित था। कार्यालय परिवेश में यह अजीब लगा पर अच्छा लगा। ग्रे सूट वाला अब घबरा गया होगा। सफेद वस्त्र वाली महिला की जीत हुई। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली बात सच साबित हुई। सब लोग हैरान रह गए। यह मोड़ बहुत अच्छा था। मुझे यह आश्चर्य पसंद आया। निर्देशन बहुत सटीक है। कलाकारों ने अपने भूमिका को उचित ठहराया। यह श्रृंखला सफल होगी।

संदेश का महत्व

संदेश वाला दृश्य बहुत महत्वपूर्ण था। उसने पूरी कहानी की नींव रखी। ग्रे सूट वाले की नीयत साफ नहीं थी। उसने पैसे की बात की थी। लेकिन सामने वाले शक्तिशाली थे। काले वस्त्र वाले ने सब संभाल लिया। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली शक्ति प्रदर्शन था। बैठक कक्ष की प्रकाश व्यवस्था उज्ज्वल थी। सबके कपड़े औपचारिक थे। बस एक व्यक्ति अलग था। यह विषमता अच्छी थी। मुझे यह दृश्य शैली पसंद आया। कहानी में दम है। आगे क्या होगा देखना है।

नकली हंसी

सफेद पोशाक वाली महिला की आँखों में गुस्सा था। पर वह शांत रही। यह उसकी ताकत है। ग्रे सूट वाला जोर से हंसा पर डर गया। उसकी हंसी नकली थी। काले चश्मे वाले ने सच सामने ला दिया। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली बात यहाँ गूंजी। सबकी नज़रें उन पर थीं। मेज पर फाइलें रखी थीं। यह कार्यालय नाटक है पर रोमांच भी है। मुझे यह मिश्रण बहुत पसंद आया। निर्माण मूल्य उच्च है। कलाकार पेशेवर हैं। यह देखने लायक है।

अनोखा रूप

काले वस्त्र वाले का रूप बहुत अनोखा था। पारंपरिक कपड़े आधुनिक कार्यालय में। उसने चश्मा उतारा तो असली चेहरा दिखा। उसकी आवाज़ में दम था। ग्रे सूट वाले के पास कोई जवाब नहीं था। सफेद वस्त्र वाली महिला उसके साथ खड़ी थी। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली बात यहाँ साबित हुई। दीवारें धूसर थीं। फर्श चमकदार था। सेट सज्जा बहुत अच्छा है। मुझे यह विवरण पसंद आई। कहानी तेज़ गति में है। ऊब नहीं होती। बस यही चाहिए।

रोचक क्लिप

पूरा दृश्य रहस्य से भरा हुआ है। हर दृश्य में कुछ नया होता है। पहले संदेश, फिर प्रवेश, फिर आमना-सामना। अंत में कल्पना मोड़। ग्रे सूट वाला खलनायक लग रहा था। सफेद वस्त्र वाली नायिका लग रही थी। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ विषय चल रहा है। मुझे यह अवधारणा बहुत पसंद आया। कलाकारों ने बहुत अच्छा किया। भाव सही थे। यह लघु क्लिप बहुत रोचक है। मैं और देखना चाहता हूँ। गुणवत्ता बहुत अच्छी है। सबको देखना चाहिए।