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रणदेव तो सिर्फ 99 लेवल का है, और मैं 999 लेवल का हूँवां35एपिसोड

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रणदेव तो सिर्फ 99 लेवल का है, और मैं 999 लेवल का हूँ

बीस साल की उम्र में 999 लेवल का अजेय योद्धा शिवा सिंह पहाड़ से उतरा। उसकी माँ ने कागजात गड़बड़ कर दिए, जिससे वह अपने उपकारी को दुश्मन समझ बैठा। वह "दुश्मन को मारने" के अजीब काम के साथ तारा मल्होत्रा के करीब आया। उसकी योजना थी — उसे प्यार में फँसाकर उसकी संपत्ति हड़पना। लेकिन तारा की मजबूत और खूबसूरत आत्मा ने उसका दिल पिघला दिया। वह उसे चोट नहीं पहुँचा पाया, और दोनों के बीच प्यार पनपने लगा।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सिंहासन की शक्ति

इस दृश्य में जो राजसी ठाठ दिखाया गया है वह वास्तव में मन मोह लेता है। सिंहासन पर बैठे पात्र की आंखों में जो अहंकार है वह साफ झलकता है। जब संवाद में कहा जाता है कि रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ तो रोमांच बढ़ जाता है। पृष्ठभूमि में खड़े लोग भी इस शक्ति प्रदर्शन को देखकर हैरान हैं। वेशभूषा और मंच सजावट बहुत ही शानदार हैं जो कहानी की गहराई को बढ़ाते हैं। हर कोई इस नतीजे को जानने के लिए बेचैन है।

काले वेस्ट वाला नायक

काले वेस्ट और चश्मे वाला पात्र बहुत ही रहस्यमयी लग रहा है। उसका खड़ा होने का तरीका और चेहरे का भाव बताता है कि वह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। उसने जब अपनी ताकत का संकेत दिया तो सबकी सांसें रुक गईं। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली बात उसी के लिए सही बैठती है। सफेद पोशाक वाली साथी भी उसके साथ खड़ी होकर अपना समर्थन दिखा रही है। आगे का संघर्ष देखने के लिए मैं उत्सुक हूँ। यह मुकाबला बहुत ही रोचक होने वाला है।

ग्रे सूट वाला विरोधी

ग्रे सूट पहने हुए पात्र की जिद्द देखकर लगता है कि वह मुसीबत खड़ी करने वाला है। उसने उंगली उठाकर जो चुनौती दी है वह बहुत गंभीर लग रही है। लेकिन सामने वाले की शक्ति के आगे उसकी कुछ नहीं चलने वाली है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाला संवाद इसी टकराव को दर्शाता है। आसपास खड़े दर्शक भी इस बहस को ध्यान से सुन रहे हैं। कहानी में यह मोड़ बहुत ही रोचक साबित हुआ है। सबकी नजरें अब इसी पर टिकी हैं।

बागुआ दर्पण का रहस्य

हाथ में पकड़े हुए बागुआ दर्पण वाला पात्र किसी जादूगर से कम नहीं लग रहा है। उसने जब यह यंत्र दिखाया तो माहौल में एक अलग ही ऊर्जा आ गई। यह यंत्र किसी बड़ी शक्ति का प्रतीक लग रहा है जो आगे चलकर काम आएगा। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली पंक्ति इसी शक्ति के अंतर को बताती है। पारंपरिक वास्तुकला के बीच यह आधुनिक संघर्ष बहुत अच्छा लग रहा है। निर्देशक ने हर बारीकी पर ध्यान दिया है। यह दृश्य यादगार बन गया है।

गुलाबी पोशाक वाली योद्धा

गुलाबी पोशाक और हाथ में तलवार वाला पात्र बहुत ही निडर लग रहा है। उसकी आंखों में जो दृढ़ता है वह बताती है कि वह लड़ने के लिए तैयार है। वह अपने साथियों के पीछे खड़ी होकर भी खतरे को भांप रही है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाला संदर्भ यहाँ की शक्ति की कसौटी है। पृष्ठभूमि में लाल रंग के ढोल भी इस युद्ध के माहौल को बढ़ा रहे हैं। यह दृश्य एक्शन से भरपूर होने वाला है। सभी को इसका इंतजार है।

वुशेन मैनशन का वातावरण

वुशेन मैनशन के बाहर का मंच बहुत ही भव्य और विशाल बनाया गया है। पीले पर्दे और पुरानी इमारतें कहानी को एक ऐतिहासिक अहसास दिलाती हैं। इसी माहौल में जब शक्ति का घमंड टूटता है तो मजा आता है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली बात यहाँ के माहौल में बहुत फिट बैठती है। सभी पात्रों की स्थिति यह बताती है कि कोई बड़ा फैसला होने वाला है। दर्शकों के लिए यह एक दृश्य उपहार है। हर कोना कहानी कह रहा है।

संवादों की तीखी धार

इस कड़ी में संवाद बहुत ही तीखे और वजनदार हैं। हर पात्र अपनी बात रखते समय पूरी ताकत लगा रहा है। कोई पीछे हटने को तैयार नहीं है और यही इस कहानी की खूबसूरती है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाला संवाद सबसे ज्यादा चर्चा में रहेगा। अभिनेताओं ने अपने किरदारों को बहुत ही जीवंत बनाया है। चेहरे के हावभाव से सब कुछ साफ जाहिर हो रहा है। यह कला का बेहतरीन नमूना है।

क्लिफहैंगर का इंतजार

कड़ी के अंत में जो मोड़ आया है वह दर्शकों को अगले भाग के लिए मजबूर कर देता है। नायक का मुस्कुराना और विरोधी का घबराना सब कुछ बता रहा है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली घोषणा के बाद अब क्या होगा यह जानना जरूरी है। सस्पेंस बनाए रखने का यह सबसे अच्छा तरीका है। मैं अगले भाग का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूँ। कहानी बहुत आगे बढ़ने वाली है।

पोशाकों का चुनाव

हर पात्र की पोशाक उसके किरदार के अनुसार बहुत ही सटीक चुनी गई है। हरे और काले रंग का संयोजन सिंहासन वाले पर बहुत जच रहा है। वहीं सफेद पोशाक वाली की सादगी भी ध्यान खींचती है। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली बात के साथ इनका लुक भी पावरफुल लगता है। पोशाक निर्माता ने बहुत मेहनत की है जो पर्दे पर साफ दिख रही है। यह दृश्य सजावट में बेहतर है।

शक्ति का असली खेल

यह कहानी सिर्फ मुक्केबाजी के बारे में नहीं बल्कि शक्ति के असली खेल के बारे में है। जो ऊपर बैठे हैं वे सब कुछ नियंत्रित कर रहे हैं। नीचे खड़े पात्र अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। रणदेव तो सिर्फ ९९ लेवल का है, और मैं ९९९ लेवल का हूँ वाली लाइन इसी पद को तोड़ती है। भावनात्मक जुड़ाव और एक्शन का यह मिश्रण बहुत ही बेहतरीन है। यह श्रृंखला देखने लायक है। सबको यह पसंद आएगी।