इस दृश्य में नीले कोट वाली लड़की की भावनात्मक यात्रा बहुत गहरी है। जब वह अपने परिवार के साथ खड़ी होती है, तो उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी दिखाई देती है। बैंगनी जैकेट वाला युवक उसे देखकर कुछ कहना चाहता है, पर शायद समय नहीं है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की कहानी में ऐसे पल बहुत आते हैं जहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं। उसका चलना और फिर रुकना सब कुछ बता रहा है कि वह अपने अतीत से भाग रही है।
बैंगनी जैकेट पहने हुए लड़के का किरदार बहुत रहस्यमयी लगता है। वह पूरे दृश्य में चुपचाप खड़ा होकर सब कुछ देख रहा है, जैसे वह किसी बड़े खेल का हिस्सा हो। जब वह तालाब के पास खड़ा होकर बात करता है, तो उसकी आवाज़ में एक अलग ही दर्द है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसकी आँखों में छिपी उदासी किसी को भी रुला सकती है।
गुलाबी पोशाक पहनी हुई लड़की का दर्द बहुत गहरा है। वह रोते हुए कुछ कहना चाहती है, पर शायद उसकी आवाज़ गले में ही अटक जाती है। उसकी आँखों में आँसू और चेहरे पर एक अजीब सी मासूमियत है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की कहानी में ऐसे पल बहुत आते हैं जहाँ दर्द शब्दों से बड़ा हो जाता है। उसका रोना और फिर चुप हो जाना सब कुछ बता रहा है कि वह किसी बड़े झटके से गुज़री है।
नीले सूट पहने हुए लड़के का संघर्ष बहुत स्पष्ट है। वह बुज़ुर्ग व्यक्ति के सहारे खड़ा है, जैसे वह किसी बड़ी मुसीबत में फँसा हो। उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी है और वह बार-बार अपने चेहरे को छू रहा है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसका दर्द और उसकी मजबूरी किसी को भी रुला सकती है।
बुज़ुर्ग व्यक्ति का किरदार बहुत महत्वपूर्ण है। वह नीले सूट वाले लड़के को सहारा दे रहा है, जैसे वह उसका एकमात्र सहारा हो। उसकी आँखों में एक अजीब सी चिंता है और वह बार-बार लड़के को देख रहा है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की कहानी में ऐसे किरदार ही कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसका सहारा और उसकी चिंता किसी को भी रुला सकती है।