जब उसने अंगूठी मेज पर रखी, तो लगा जैसे किसी ने मेरे सीने में चाकू घोंप दिया हो। वह लड़का कितना बेरहम है, जो प्यार को सिर्फ एक सौदा समझता है। उस लड़की की आँखों में जो दर्द था, वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना जैसी कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि कभी-कभी खुद को बचाने के लिए जाना ही पड़ता है। उसका नीला कोट पहनकर चले जाना किसी विदाई से कम नहीं था।
यह दृश्य सचमुच रोंगटे खड़े करने वाला था। एक तरफ धन का लालच और दूसरी तरफ टूटा हुआ विश्वास। जब वह चेक उसकी तरफ बढ़ाया गया, तो कमरे का माहौल बदल गया। दोस्तों की हैरानी और उस लड़की का सन्न रह जाना सब कुछ बता रहा था। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना में भी ऐसे ही मोड़ आते हैं जहाँ इंसानियत शर्मसार हो जाती है। काश वह लड़का समझ पाता कि कुछ चीजें बिकने के लिए नहीं होतीं।
उस लड़की का नीला कोट पहनकर वहां से निकल जाना किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। बारिश में भीगते हुए उसका चलना और पीछे मुड़कर न देखना उसकी मजबूती को दर्शाता है। वह रोई नहीं, बस चुपचाप चली गई, जैसे उसने सब कुछ स्वीकार कर लिया हो। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की तरह यह भी एक नई शुरुआत का संकेत था। उसकी आँखों में आंसू थे पर कदम नहीं रुके। यही तो असली ताकत है।
पार्टी का माहौल अचानक सन्नाटे में बदल गया जब वह चेक सामने आया। दोस्तों के चेहरे पर जो हैरानी थी, वह साफ दिख रही थी। कोई शराब का गिलास लिए स्तब्ध था, तो कोई गिटार बजाना भूल गया। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना में भी ऐसे ही पल आते हैं जब सब कुछ रुक सा जाता है। उस लड़के की बेरुखी और उस लड़की की खामोशी ने सबका दिल तोड़ दिया। यह पार्टी अब कभी वैसी नहीं होगी।
मेज पर रखी वह चमकदार अंगूठी और उसके बगल में रखा चेक, दोनों के बीच एक अजीब सी जंग छिड़ी हुई थी। एक तरफ वादे थे और दूसरी तरफ नोटों की गड्डी। उस लड़के ने बिना पलक झपकाए सब कुछ तय कर दिया। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की कहानियां हमें सिखाती हैं कि पैसा सब कुछ नहीं खरीद सकता। उस लड़की ने सही फैसला किया, वह वहां से चली गई और अपनी इज्जत बचाई।