इस दृश्य में भावनाओं का जो तूफान है वह देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जब वह लड़का गुलाब के फूल लेकर खड़ा है, तो उसकी आँखों में एक अजीब सी बेचैनी है। सौ बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा दर्दनाक लगता है। दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी इस बात को साबित करती हैं कि नाटक कितना असरदार है।
हरे रंग का गाउन पहने लड़की का चेहरा देखकर लगता है जैसे वह किसी गहरे सदमे में हो। उसके हाथ में लाल गुलाब हैं, जो शायद किसी खोए हुए प्यार की निशानी हैं। सौ बार अलविदा, पीछे नहीं हटना के इस सीन में संवाद नहीं हैं, बस चेहरों के भाव सब कुछ कह रहे हैं। यह मौन चीख दिल को छू लेती है।
मंच पर इतने लोग खड़े हैं, लेकिन हर किसी के चेहरे पर एक अलग तरह का अकेलापन साफ दिख रहा है। पीछे खड़ी लड़की की नाराजगी और सामने खड़े लड़के की मजबूरी के बीच का तनाव कमाल का है। सौ बार अलविदा, पीछे नहीं हटना देखते वक्त ऐसा लगा जैसे हम सब उसी थिएटर में बैठे हों और सांस रोके यह अंत देख रहे हों।
गुलाबी पोशाक वाली लड़की की आँखों से आंसू गिरते देखकर मेरा भी दिल भर आया। उसकी आवाज में जो कंपन था, वह किसी भी डायलॉग से ज्यादा ताकतवर था। सौ बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि कभी-कभी विदाई ही सबसे सच्चा प्यार होता है। नेटशॉर्ट पर यह सीन देखना एक अलग ही अनुभव था।
भूरे रंग का सूट पहने लड़का बहुत शांत खड़ा है, लेकिन उसकी आँखों में एक तूफान छिपा है। वह लड़की के कंधे पर हाथ रखकर उसे सहारा दे रहा है या रोक रहा है, यह समझना मुश्किल है। सौ बार अलविदा, पीछे नहीं हटना के इस मोड़ पर कहानी बहुत पेचीदा हो जाती है। हर किरदार की चुप्पी शोर मचा रही है।