जब वो लड़का अस्पताल के बिस्तर पर बैठा था और उसके दोस्त उसे समझा रहे थे, तो माहौल में एक अजीब सी बेचैनी थी। उसकी आँखों में डर साफ़ दिख रहा था, जैसे वो किसी बड़ी मुसीबत में फंस गया हो। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना वाली कहानी में ऐसे मोड़ आते हैं जो रूह कंपा देते हैं। दोस्तों की बातें सुनकर लगता है कि कोई गलतफहमी हुई है या फिर कोई बड़ा षड्यंत्र रचा गया है।
शुरुआत में वो कपल सोफे पर कितना प्यारा लग रहा था, हाथ पकड़कर बातें कर रहे थे। लेकिन अचानक सीन बदलता है और हमें अस्पताल का नज़ारा मिलता है। ये कनेक्शन क्या है? क्या वो लड़की उस मरीज़ से जुड़ी है? १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना जैसे ड्रामे में हर सीन के पीछे एक राज़ छुपा होता है। लड़के का रोना और फिर उस लड़की का आना, सब कुछ बहुत सस्पेंसफुल है।
अस्पताल वाले सीन में दो दोस्तों का व्यवहार बहुत संदिग्ध लग रहा था। एक नीली शर्ट वाला दोस्त कुछ छुपा रहा है और काली शर्ट वाला बस तमाशबीन बना हुआ है। मरीज़ लड़का बेचारा कन्फ्यूज़ है कि किस पर भरोसा करे। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की तरह ये कहानी भी धीरे-धीरे खुल रही है। क्या ये दोस्त ही उसके दुश्मन निकलेंगे? ये सवाल दिमाग में घूम रहा है।
जब वो लड़की लाल साड़ी पहनकर कमरे में आई, तो माहौल बदल गया। उसकी आँखों में गुस्सा और चिंता दोनों थे। मरीज़ लड़के ने उसे देखकर हाथ उठाया, जैसे वो उसे रोकना चाहता हो या फिर कुछ कहना चाहता हो। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना वाले पलों में ऐसे ही इमोशनल ट्विस्ट आते हैं। क्या वो लड़की उसकी मदद करेगी या फिर मुसीबत बढ़ाएगी? ये जानने के लिए बेताबी हो रही है।
पहले लग रहा था कि ये एक साधारण लव स्टोरी है, लेकिन अस्पताल का सीन आते ही कहानी में ट्विस्ट आ गया। वो लड़का जो पहले खुश था, अब टूटा हुआ लग रहा है। उसके दोस्तों की बातचीत से लगता है कि कोई बड़ी गड़बड़ हुई है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना वाली सीरीज़ में ऐसे ही अनएक्सपेक्ड मोड़ आते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं। आगे क्या होगा, ये सोचकर ही रोमांच होता है।