पूल के किनारे बैठे दोस्तों के बीच की खामोशी बहुत भारी लग रही है। नीली शर्ट वाला लड़का कुछ समझाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हवा में तनाव साफ महसूस हो रहा है। जैसे ही वह उठता है, लगता है कि बातें अब और नहीं संभल सकतीं। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की कहानी में ऐसे मोड़ ही तो जान डालते हैं।
काली ड्रेस पहने लड़की के हाथ में फूल हैं, लेकिन चेहरे पर वो खुशी नहीं जो दुल्हन के चेहरे पर होनी चाहिए। सामने खड़ा लड़का उसे ऐसे देख रहा है जैसे कोई पुरानी याद ताज़ा हो गई हो। यह सीन देखकर लगता है कि १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना में भावनाओं का खेल बहुत गहरा है।
जब वह लड़का अपनी उंगलियों से उसके गाल को छूता है, तो स्क्रीन पर सन्नाटा छा जाता है। उनकी आंखों में जो दर्द और अपनत्व है, वो शब्दों से कहीं ज्यादा बोल रहा है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना का यह पल दिल को छू लेता है और सोचने पर मजबूर कर देता है।
तीन दोस्तों के बीच की यह बहस बहुत रियल लगती है। एक खड़ा है, दो बैठे हैं, और बातचीत का लहजा बता रहा है कि कोई बड़ी गलतफहमी हो गई है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की कहानी में दोस्ती और रिश्तों की यह जटिलता बहुत अच्छे से दिखाई गई है।
काली कार के सामने खड़े होकर यह अलविदा कहना कितना मुश्किल होगा। लड़की की आंखों में आंसू हैं और लड़के का चेहरा पत्थर सा हो गया है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना का यह सीन दर्शकों को भावुक किए बिना नहीं रह सकता।