जब वह उसके सिर पर हाथ फेरती है, तो लगता है जैसे समय थम गया हो। इस दृश्य में जो कोमलता है, वह सौ बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की कहानी को और भी गहरा बना देती है। हर नज़र, हर स्पर्श में एक अनकही बात छिपी है।
उसकी आंखों में जो उदासी है, वह शब्दों से कहीं ज्यादा बोलती है। सौ बार अलविदा, पीछे नहीं हटना में ऐसे पल हैं जो दिल को छू लेते हैं। बिना कुछ कहे, सब कुछ कह दिया गया है।
जैसे ही वह उठा, माहौल बदल गया। पहले जो कोमलता थी, अब वहां एक अजीब सी दूरी है। सौ बार अलविदा, पीछे नहीं हटना में यही तो है – पल भर में सब कुछ पलट जाना।
उनकी बातचीत में जो तनाव है, वह साफ़ दिख रहा है। सौ बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की कहानी में यही तो है – प्यार और दर्द का मिलाजुला रूप। हर शब्द में एक सवाल है।
टेबल के दर्पण में उनकी परछाइयां एक दूसरे के उलट हैं, जैसे उनकी कहानी। सौ बार अलविदा, पीछे नहीं हटना में ऐसे प्रतीक हैं जो कहानी को और गहराई देते हैं। देखते रह जाओगे।