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100 बार अलविदा, पीछे नहीं हटनावां24एपिसोड

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100 बार अलविदा, पीछे नहीं हटना

जब लिली, एक प्रतिभाशाली सेलो वादक, अपने पति मार्कस हॉवर्ड को सार्वजनिक रूप से किसी और महिला को चूमते देखती है, तो वह अपनी एकतरफा शादी से बाहर निकल जाती है। मार्कस सोचता है कि वह वापस रेंगती हुई आएगी... पर तब तक लिली न केवल फल-फूल रही होती है, बल्कि उसके सबसे ताकतवर दोस्त ईथन नॉर्मन को डेट भी कर रही होती है। मार्कस पागल हो जाता है और उसे वापस जीतने की कोशिशों में कोई कसर नहीं छोड़ता। लेकिन क्या बहुत देर हो चुकी है? या फिर भी उसके पास कोई मौका बाकी है?
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इस एपिसोड की समीक्षा

चेहरे के भावों का जादू

इस दृश्य में चेहरे के भावों ने पूरी कहानी कह दी। जब वह सेलो बजा रही थी, तो दर्शकों की आँखों में एक अजीब सी चमक थी। खासकर वह लड़का जो सूट में था, उसकी नज़रें किसी जादू की तरह स्क्रीन से चिपकी हुई थीं। ऐसा लग रहा था जैसे संगीत ने सबको बांध दिया हो। 100 बार अलविदा, पीछे नहीं हटना का ज़िक्र यहाँ बिल्कुल फिट बैठता है क्योंकि यह पल किसी विदाई जैसा गहरा था।

हरा गाउन और लाल बाल

लड़की का हरा गाउन और उसके लाल बाल स्क्रीन पर एकदम अलग ही नज़ारा पेश कर रहे थे। जब उसने वायलिन छेड़ा, तो ऐसा लगा जैसे कमरे में सन्नाटा छा गया हो। दर्शकों के रिएक्शन देखकर लगता है कि यह पल किसी फिल्म का क्लाइमेक्स था। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखना सुकून देता है, बिल्कुल वैसे ही जैसे 100 बार अलविदा, पीछे नहीं हटना में होता है।

दर्शकों की खामोशी

सबसे दिलचस्प बात यह थी कि जब वह बजा रही थी, तो पूरा हॉल चुप था। कोई फुसफुसाहट नहीं, कोई हलचल नहीं। बस संगीत और चेहरों पर भाव। वह लड़का जो पीछे बैठा था, उसकी आँखों में आंसू थे। ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी पुरानी याद में खो गया हो। 100 बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की तरह यह पल भी दिल को छू गया।

सूट वाला लड़का

वह लड़का जो ग्रे सूट में था, उसकी एक्टिंग देखकर लगता है कि वह किसी बड़े ड्रामे का हिस्सा है। जब वह तालियां बजा रहा था, तो उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। ऐसा लग रहा था जैसे वह उस लड़की को सपोर्ट कर रहा हो। नेटशॉर्ट पर ऐसे किरदार देखना मज़ा देता है, खासकर जब 100 बार अलविदा, पीछे नहीं हटना जैसे सीन हों।

संगीत का जादू

सेलो की आवाज़ ने पूरे कमरे को भर दिया था। जब वह बजा रही थी, तो ऐसा लग रहा था जैसे समय थम गया हो। दर्शकों के चेहरे पर जो भाव थे, वे शब्दों में बयां नहीं किए जा सकते। यह पल बिल्कुल वैसा था जैसे 100 बार अलविदा, पीछे नहीं हटना में होता है, जहाँ संगीत ही सब कुछ कह जाता है।

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