PreviousLater
Close

100 बार अलविदा, पीछे नहीं हटनावां51एपिसोड

like2.0Kchase1.6K

100 बार अलविदा, पीछे नहीं हटना

जब लिली, एक प्रतिभाशाली सेलो वादक, अपने पति मार्कस हॉवर्ड को सार्वजनिक रूप से किसी और महिला को चूमते देखती है, तो वह अपनी एकतरफा शादी से बाहर निकल जाती है। मार्कस सोचता है कि वह वापस रेंगती हुई आएगी... पर तब तक लिली न केवल फल-फूल रही होती है, बल्कि उसके सबसे ताकतवर दोस्त ईथन नॉर्मन को डेट भी कर रही होती है। मार्कस पागल हो जाता है और उसे वापस जीतने की कोशिशों में कोई कसर नहीं छोड़ता। लेकिन क्या बहुत देर हो चुकी है? या फिर भी उसके पास कोई मौका बाकी है?
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

पैसे का खेल और टूटा भरोसा

इस दृश्य में तनाव इतना गहरा है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। लड़की के चेहरे पर डर और गुस्सा दोनों साफ दिख रहे हैं, जबकि लड़का अपनी बात मनवाने की कोशिश कर रहा है। मेज पर रखा ढेर सारा पैसा सिर्फ कागज नहीं, बल्कि उनके रिश्ते की कीमत लगता है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना जैसी कहानियों में अक्सर पैसा ही खलनायक बन जाता है। यह दृश्य देखकर लगता है कि अब इनके बीच सब कुछ खत्म होने वाला है।

यादों का बोझ और वर्तमान का दर्द

जब वह पुरानी यादों में खो जाता है, तो स्क्रीन पर एक अलग ही नमी छा जाती है। समारोह का वह दृश्य जहां वह दूसरी लड़की के साथ हंस रहा था, अब उसे ही काट रहा है। लड़की की आंखों में वह चमक नहीं है जो पहले हुआ करती थी। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की विषय यहां बिल्कुल फिट बैठती है क्योंकि वह अपने ही किए कारनामों से भाग नहीं पा रहा। पछतावा और अपराधबोध का यह मिश्रण दर्शकों को बांधे रखता है।

गुस्से का विस्फोट और बेबसी

लड़के का गुस्सा और चिल्लाना देखकर लगता है कि वह अपनी हार कबूल नहीं करना चाहता। लेकिन लड़की अब डरने वाली नहीं है, उसने पैसे उठाकर अपनी ताकत दिखा दी है। यह पल बहुत ही सशक्त है जहां पीड़ित अब शिकारी बन गई है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना जैसे नाटक में ऐसे मोड़ ही कहानी को नई दिशा देते हैं। लाल पर्दे वाला पृष्ठभूमि इस गुस्से को और भी गहरा बना रहा है।

खामोशी का शोर और अनकही बातें

कभी-कभी शब्दों से ज्यादा खामोशी शोर मचाती है। जब वह लड़की चुपचाप खड़ी होकर उसे घूरती है, तो लगता है जैसे वह उसके दिमाग को पढ़ रही हो। लड़के की आंखों में वह आत्मविश्वास अब कहीं खो गया है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की कहानी में यह खामोशी सबसे बड़ा हथियार है। बिना कुछ बोले ही सब कुछ कह दिया गया है, जो कि एक बेहतरीन निर्देशन है।

धोखे की बू और टूटे सपने

समारोह के उस दृश्य में जब वह दूसरी लड़की के साथ था, तभी शायद यह सब शुरू हो गया था। अब उसी धोखे की बू इस कमरे में महक रही है। लड़की का धारीदार पोशाक पहनना और उसका अंदाज बताता है कि वह अब मासूम नहीं रही। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना में दिखाया गया यह धोखा हर किसी के दिल को छू लेता है। रिश्तों की यह कड़वी सच्चाई देखकर रूह कांप जाती है।

और भी शानदार समीक्षाएँ (5)
arrow down