शुरुआत में दिखाया गया वह भव्य बंगला और फिर अंदर का तनाव, यह विरोधाभास दिलचस्प है। युवक का घड़ी देखकर बेचैन होना और बुजुर्ग व्यक्ति का आना, सब कुछ एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना जैसे मोड़ आने वाले हैं, यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। माहौल में जो गंभीरता है, वह दर्शक को बांधे रखती है।
लाल पर्दों वाले कमरे में नकदी के ढेर और एक युवती की बेचैनी देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उसकी टखनों में जंजीर और सामने पड़ा पैसा बताता है कि यह कोई आम कहानी नहीं है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की तरह यह किरदार भी फंस चुका है। काली शर्ट वाला युवक जब पैसे उड़ाता है, तो लगता है पागलपन हद से आगे बढ़ गया है।
काली शर्ट वाले युवक का व्यवहार सच में चौंकाने वाला है। वह पैसे को इस तरह उड़ा रहा है जैसे उसकी कोई कीमत ही न हो। सामने बैठी युवती का डरा हुआ चेहरा और उसकी आंखों में सवाल, सब कुछ गड़बड़ होने का संकेत दे रहे हैं। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना जैसे हालात में फंसी वह लड़की किसी मदद की उम्मीद कर रही होगी।
युवती के पैरों में जंजीर और सामने रखा ढेर सारा पैसा, यह दृश्य किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लगता। काली शर्ट वाला युवक जब ब्रीफकेस खोलता है, तो लगता है कहानी में नया मोड़ आने वाला है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना की तरह यह बंधन भी आसान नहीं टूटने वाला। हर फ्रेम में एक नया सवाल खड़ा होता है।
पहले दृश्य में युवक का सोफे पर बेचैन होना और फिर अचानक खड़ा हो जाना, यह तनाव दर्शक तक पहुंचता है। बुजुर्ग व्यक्ति के आने के बाद माहौल और गंभीर हो जाता है। १०० बार अलविदा, पीछे नहीं हटना जैसे मोड़ की उम्मीद में दर्शक अगले दृश्य का इंतजार करता है। संवाद नहीं हैं, लेकिन आंखें सब कुछ कह रही हैं।