इस दृश्य में तनाव इतना ज्यादा है कि सांस रुक जाए। एक साधारण सैनिक के साथ बैठना भी अब अपराध बन गया है। महारानी का अहंकार और राजकुमार की चुप्पी सब कुछ कह रही है। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में यह मोड़ बहुत ही दिलचस्प है। गुलाम का डरना स्वाभाविक है पर उसकी आंखों में एक अलग ही चमक है जो बताती है कि वह हार नहीं मानेगी।
महारानी का व्यवहार सच में चौंकाने वाला है। वह खुद को इतना ऊपर समझती है कि दूसरों की भावनाओं की कोई कद्र नहीं। राजकुमार का साथ देना और गुलाम को नीचा दिखाना सत्ता के नशे का सबसे बड़ा उदाहरण है। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में यह संघर्ष बहुत गहराई से दिखाया गया है। हर शब्द में जहर है और हर हरकत में क्रूरता।
सैनिक और गुलाम का रिश्ता बहुत कोमल लग रहा था, पर महारानी के आते ही सब बदल गया। प्रेम और कर्तव्य के बीच का यह संघर्ष बहुत दर्दनाक है। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में यह दृश्य दिल को छू लेता है। गुलाम की मजबूरी और सैनिक की बेबसी देखकर रोना आ जाता है। यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी, यह देखना बहुत रोचक होगा।
महारानी का अहंकार इतना बढ़ गया है कि वह इंसानियत भूल गई है। गुलाम को जमीन पर गिराकर बात करना और उसे डराना सच में निंदनीय है। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में यह पात्र बहुत ही जटिल है। उसकी हर बात में दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश साफ झलकती है। यह दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है।
राजकुमार की खामोशी इस पूरे दृश्य में सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। वह सब देख रहा है पर कुछ नहीं कह रहा। यह चुप्पी गुलाम के लिए मौत से कम नहीं। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में यह पात्र बहुत रहस्यमयी है। क्या वह सच में इतना निर्दयी है या उसके मन में कुछ और चल रहा है? यह सवाल हर दर्शक के मन में उठता है।