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(डबिंग) पुनर्जन्म: भाग्य की महारानीवां59एपिसोड

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(डबिंग) पुनर्जन्म: भाग्य की महारानी

स्वयंवर में ईशानी ने विक्रम को चुना। जबकि मोहिनी को सिर्फ़ भिखारी मिला। ईर्ष्या में उसने अपनी बहन की हत्या कर दी। नियति ने दोनों को फिर पिछले जन्म में पहुँचा दिया। इस बार मोहिनी ने छल से विक्रम पा लिया। ईशानी का विवाह भिखारी से करा दिया। पर स्वार्थी विक्रम पत्नी को मोहरा समझा। और वही भिखारी छद्मवेशी सम्राट निकला। अंत में ईशानी महारानी बनी। मोहिनी अपने लोभ की सज़ा पाई।
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इस एपिसोड की समीक्षा

राजमाता की हत्या का षड्यंत्र

इस दृश्य में तनाव इतना अधिक है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। महाराज का क्रोध और ईशानी का डर साफ दिखाई देता है। (डबिंग) पुनर्जन्म: भाग्य की महारानी में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। हर संवाद में गहराई है और हर चेहरे पर कहानी छिपी है।

ईशानी का अंतिम चीखना

जब ईशानी चिल्लाती है कि वह महारानी से नफरत करती है, तो लगता है जैसे उसका दिल टूट गया हो। (डबिंग) पुनर्जन्म: भाग्य की महारानी में ऐसे भावनात्मक पल दर्शकों को झकझोर देते हैं। उसकी आंखों में आंसू और आवाज में दर्द साफ झलकता है।

महारानी का शांत चेहरा

महारानी का चेहरा बिल्कुल शांत है, जैसे वह सब कुछ जानती हो। (डबिंग) पुनर्जन्म: भाग्य की महारानी में उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचाती है। वह बिना कुछ कहे सब कुछ कह जाती है। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक है।

महारज का न्याय

महारज का फैसला सुनकर लगता है कि न्याय हो रहा है, लेकिन क्या वाकई ऐसा है? (डबिंग) पुनर्जन्म: भाग्य की महारानी में हर फैसले के पीछे एक रहस्य छिपा है। उसकी आवाज में अधिकार और आंखों में संदेह दोनों हैं।

ईशानी का झूठा आरोप

ईशानी का कहना कि महारानी ने उसे मजबूर किया, बिल्कुल झूठा लगता है। (डबिंग) पुनर्जन्म: भाग्य की महारानी में ऐसे झूठे आरोप कहानी को और दिलचस्प बनाते हैं। उसकी आवाज में डर और आंखों में चालाकी साफ दिखाई देती है।

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