जब ईशानी ने खुद को दोषी माना और राजमाता की जान बचाने की बात कही, तो दिल दहल गया। उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी दृढ़ता थी। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में ऐसे मोड़ बार-बार देखने को मिलते हैं जो दर्शक को बांधे रखते हैं। उसकी विनती सुनकर लगता है कि वह कुछ छिपा रही है।
महामंत्री ने बिना ज्यादा सोचे-समझे मृत्युदंड का हुकुमनामा फेंक दिया। यह दिखाता है कि राजमहल में न्याय कितना कठोर और त्वरित है। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी की यह सीन बहुत तनावपूर्ण थी। ईशानी की मासूमियत और महामंत्री का क्रोध एक दूसरे के विपरीत ध्रुव बन गए।
ईशानी ने हथियार के बारे में कुछ नहीं बताया, बस समय मांगा। यह उसकी चालाकी हो सकती है या फिर वह किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में हर किरदार के पीछे एक रहस्य है। उसकी आँखों में डर था, पर आवाज में आत्मविश्वास। यह विरोधाभास दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है।
ईशानी ने कहा कि अगर उसके पति ने बचाया न होता, तो राजमाता की जान चली जाती। यह बात सुनकर लगता है कि वह किसी गहरे षड्यंत्र का हिस्सा है। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। राजमहल की सुरक्षा इतनी कड़ी होने के बावजूद हथियार कैसे अंदर आया? यह सवाल हर दर्शक के मन में है।
ईशानी ने अपने पति का जिक्र किया, जो राजमाता की जान बचाने में कामयाब रहा। यह पति कौन है? क्या वह भी इस षड्यंत्र में शामिल है? डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में हर किरदार के पीछे एक कहानी है। ईशानी की बातें सुनकर लगता है कि वह अपने पति को बचाने की कोशिश कर रही है। यह रिश्ता बहुत जटिल लगता है।