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(डबिंग) पुनर्जन्म: भाग्य की महारानीवां46एपिसोड

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(डबिंग) पुनर्जन्म: भाग्य की महारानी

स्वयंवर में ईशानी ने विक्रम को चुना। जबकि मोहिनी को सिर्फ़ भिखारी मिला। ईर्ष्या में उसने अपनी बहन की हत्या कर दी। नियति ने दोनों को फिर पिछले जन्म में पहुँचा दिया। इस बार मोहिनी ने छल से विक्रम पा लिया। ईशानी का विवाह भिखारी से करा दिया। पर स्वार्थी विक्रम पत्नी को मोहरा समझा। और वही भिखारी छद्मवेशी सम्राट निकला। अंत में ईशानी महारानी बनी। मोहिनी अपने लोभ की सज़ा पाई।
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इस एपिसोड की समीक्षा

राजमाता की चालाकी देखकर रोंगटे खड़े हो गए

इस दृश्य में राजमाता का व्यवहार सच में चौंकाने वाला है। उन्होंने मोहिनी से पूछा कि उसे क्या पुरस्कार देना चाहिए, लेकिन असल में वे इशानी को वापस महल ले जाने का बहाना ढूंढ रही थीं। जब इशानी ने धन्यवाद कहा तो लगा कि सब ठीक हो गया, लेकिन मोहिनी की आंखों में छिपा गुस्सा साफ दिख रहा था। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में ऐसे मोड़ बार-बार देखने को मिलते हैं जो दर्शकों को बांधे रखते हैं।

मोहिनी का चेहरा पढ़ने लायक था

जब राजमाता ने इशानी को महल वापस बुलाने का फैसला सुनाया, तो मोहिनी के चेहरे पर जो भाव आए वे लाजवाब थे। वह बाहर से शांत दिख रही थी, लेकिन उसकी आंखें चीख रही थीं कि वह इससे खुश नहीं है। उसने कहा कि बचपन से ही उनके बीच अनबन रही है, लेकिन असल में वह इशानी की तरक्की से जल रही है। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में ऐसे संवाद और अभिनय देखकर मजा आ जाता है।

इशानी की मासूमियत दिल को छू गई

इशानी का किरदार सच में दिल को छू लेने वाला है। वह जमीन पर गिरी हुई थी, गंदे कपड़ों में, लेकिन जब राजमाता ने उसे महल वापस जाने की इजाजत दी तो उसने तुरंत धन्यवाद कहा। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर कृतज्ञता। मोहिनी की नफरत के बावजूद वह शांत रही। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में ऐसे पात्र दर्शकों के दिल में जगह बना लेते हैं।

मोहिनी का अहंकार टूटने वाला है

मोहिनी ने इशानी से कहा कि वह अभी भी वही मूर्ख है और उसने अपने परिवार को बर्बाद कर दिया। लेकिन लगता है कि मोहिनी को नहीं पता कि इशानी अब बदल चुकी है। उसकी आंखों में जो चमक है वह हार मानने वाली नहीं है। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में ऐसे संघर्ष और बदलाव देखना रोमांचक होता है। मोहिनी का अहंकार जल्द ही टूटने वाला है।

राजमाता की राजनीति कमाल की है

राजमाता ने बड़ी चालाकी से मोहिनी की राय पूछी, लेकिन असल में वे पहले से ही फैसला कर चुकी थीं। उन्होंने इशानी को वापस महल बुलाकर मोहिनी को सबक सिखाने की कोशिश की है। यह दृश्य दिखाता है कि राजमहल में कैसे शब्दों के पीछे छिपी असली मंशा होती है। डबिंग पुनर्जन्म भाग्य की महारानी में ऐसे राजनीतिक खेल देखकर मजा आता है।

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