एक्शन सीन्स बहुत ही शानदार हैं। रिक्शा का इस्तेमाल हथियार की तरह करना बहुत क्रिएटिव लगा। नीली जैकेट वाले पात्र की मार्शल आर्ट्स देखकर दांतों तले उंगली दब गई। पवन मुक्का का बदला में ऐसे सीन्स देखकर मजा आ गया। हर मुक्के में ताकत और हर किक में स्टाइल है। यह शो देखने के बाद एड्रेनालाईन रश महसूस हुआ। बिना किसी फालतू डायलॉग के सीधी एक्शन में बात करना इसकी खासियत है।
कहानी में जो ट्विस्ट आया वह बिल्कुल उम्मीद नहीं था। अंत में जब टोपी उतरी तो सबकी आंखें फटी रह गईं। पवन मुक्का का बदला ने दर्शकों को हैरान कर दिया। भूरे रंग की जैकेट वाले पात्र का रिएक्शन देखकर हंसी आ गई। ऐसा लग रहा था जैसे उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा। यह मोड़ कहानी को नई दिशा देता है। अब आगे क्या होगा यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।
पुराने जमाने की सड़कों का सेट बहुत असली लगता है। ईंटों वाली दीवारें और पुरानी गाड़ियां माहौल बनाती हैं। पवन मुक्का का बदला की विजुअल क्वालिटी बहुत अच्छी है। लड़ाई के दौरान धूल और टूटे हुए फर्नीचर ने रियलिस्टिक फील दिया। ऐसा लगता है कि हम उसी दौर में जी रहे हैं। मेहनत से बनाए गए सेट्स की तारीफ करनी होगी। यह शो सिर्फ एक्शन नहीं बल्कि एक पूरी दुनिया पेश करता है।
मुख्य पात्र की पहचान छिपाकर रखना बहुत बड़ा जोखिम था जो सफल हुआ। नीली पोशाक वाले योद्धा का रहस्य अब खुल गया है। पवन मुक्का का बदला में किरदारों की गहराई है। सिर्फ मारपीट नहीं बल्कि एक मकसद भी दिखाई देता है। जब वह दरवाजे के पीछे जाती है तो एक अलग ही रहस्य खुलता है। सफेद कपड़ों में वह बिल्कुल अलग लग रही हैं। यह ट्रांजिशन बहुत ही खूबसूरती से किया गया है।
खलनायक गिरोह की ताकत को कम नहीं आंका जा सकता था। फिर भी मुख्य पात्र ने सबको अकेले ही हरा दिया। पवन मुक्का का बदला में हीरो की ताकत का लोहा मनवाना पड़ा। हर हमले का जवाब सटीक था। कोई भी मूव फालतू नहीं था। कोरियोग्राफी इतनी स्मूथ थी कि सांस लेने का भी मौका नहीं मिला। यह साबित करता है कि ट्रेनिंग कितनी जरूरी है। ऐसे फाइट सीन्स बार बार देखने को जी चाहता है।
नेटशॉर्ट ऐप पर यह शो देखना एक बेहतरीन अनुभव रहा। क्वालिटी इतनी अच्छी है कि सिनेमा हॉल जैसा लगता है। पवन मुक्का का बदला जैसे शो इस प्लेटफॉर्म की शान हैं। स्क्रीन पर हर डिटेल साफ दिखाई देती है। एक्टर्स के चेहरे के भाव बहुत स्पष्ट हैं। खासकर जब टोपी उतारने वाला सीन आया तो क्लियर विजुअल्स ने असर बढ़ा दिया। तकनीकी पहलुओं पर भी इस शो ने ध्यान दिया है।
संगीत और बैकग्राउंड स्कोर ने एक्शन को और बढ़ा दिया। हर मुक्के की आवाज दिल तक पहुंचती है। पवन मुक्का का बदला की साउंड डिजाइनिंग लाजवाब है। जब रिक्शा गिरता है तो उसकी आवाज से झटका लगता है। शांत सीन में संगीत धीमा हो जाता है जो मूड बनाता है। यह छोटी चीजें बड़े असर डालती हैं। दर्शक को कहानी में बांधे रखने के लिए यह जरूरी है। कानों के लिए भी यह दावत है।
भूरे रंग की जैकेट वाले पात्र की भूमिका बहुत अहम लग रही है। वह मुख्य पात्र को जानता हुआ लग रहा था। पवन मुक्का का बदला में रिश्तों की पोल खुलने वाली है। उसकी हैरानी सिर्फ लड़ाई को लेकर नहीं थी। ऐसा लगता है कि वह पहचान को लेकर चौंक गया है। इन दोनों के बीच क्या इतिहास है यह जानना बाकी है। डायलॉग कम थे लेकिन आंखों की बातें बहुत थीं। यह सबटल एक्टिंग बहुत पसंद आई।
पोशाकों का चयन उस समय के हिसाब से बिल्कुल सही है। बटन वाले कुरते और टोपियां क्लासिक लगती हैं। पवन मुक्का का बदला में कॉस्ट्यूम डिजाइन पर ध्यान दिया गया है। नीली जैकेट वाले योद्धा का लुक बहुत आइकॉनिक हो गया है। अंत में सफेद कपड़ों वाला लुक कोमलता दिखाता है। यह बदलाव किरदार के दो पहलुओं को दर्शाता है। बाहरी ताकत और भीतरी कोमलता का संगम है। यह कलात्मक पसंद बहुत सराहनीय है।
कुल मिलाकर यह शो एक्शन प्रेमियों के लिए एक तोहफा है। कहानी में दम है और एक्शन में जान है। पवन मुक्का का बदला को मिस नहीं करना चाहिए। हर एपिसोड के बाद अगला एपिसोड देखने का मन करता है। क्लिफहेंजर बहुत अच्छे तरीके से इस्तेमाल हुए हैं। अंत का सीन अगली कहानी की नींव रखता है। अब बदला कैसे लेगी यह देखना बाकी है। यह सफर रोमांचक होने वाला है। दर्शकों के लिए पूरी पैक है।
इस एपिसोड की समीक्षा
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