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Pawan Mukka Ka Badlaवां5एपिसोड

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Pawan Mukka Ka Badla

8 saal pehle, Aarav Singh ne apni Pawan Mukka se Sagar Nagar ke 22 martial schools hara diye. Lekin usi ki wajah se uski wife Neha mar gayi. Apni beti Myra ko bachane ke liye woh Taranagar aake rickshaw driver ban gaya. Ek din usne ek ladki bachayi aur uska panga Shaktimaan School se ho gaya. Myra bhi is sab mein fas gayi. Aarav ne apni chhupi taakat dikhayi, sabko crush kiya aur beti bachali. Kya Shaktimaan school use chhodega? Kya Aarav apni beti ko hamesha safe rakh paayega?
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इस एपिसोड की समीक्षा

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सड़क का संघर्ष

उस रात की भीड़ में सफेद सूट वाले व्यक्ति का घमंड साफ दिख रहा था। रिक्शा चलाने वाला जमीन पर गिरा हुआ था लेकिन उसकी आंखों में हार नहीं थी। पवन मुक्का का बदला में ऐसे सीन दिल को छू लेते हैं। जब वह घर लौटता है तो बच्ची की मुस्कान सब दर्द भुला देती है। यह कहानी सादगी और संघर्ष की गवाह है।

पिता का प्यार

बाहर की ठोकरें खाने के बाद जब वह घर पहुंचा, तो माहौल बदल गया। छोटी बच्ची की खुशी देखकर लगता है कि बस यही उसकी दुनिया है। पवन मुक्का का बदला ने रिश्तों की गहराई को बहुत खूबसूरती से दिखाया है। लाल कागज का फूल और खाना, ये छोटी चीजें बड़ा प्यार बताती हैं। हर पल में एक नया अहसास है।

अमीरी और गरीबी

शहर की चमक और गली के अंधेरे में बहुत फर्क है। एक तरफ रौबदार कपड़े, दूसरी तरफ पसीने की कमाई। इस कहानी पवन मुक्का का बदला में यह विरोधाभास बहुत तेज है। फिर भी उम्मीद की किरण बच्ची के चेहरे पर दिखती है। रात की रोशनी में यह दृश्य बहुत भावुक कर देने वाला है। देखकर मन भारी हो जाता है।

आंसू और मुस्कान

जमीन पर गिरने के बाद उठना आसान नहीं होता, पर उसने हिम्मत नहीं हारी। जब उसने बच्ची को गले लगाया, तो सब कुछ सही लगने लगा। पवन मुक्का का बदला की कहानी में जो दर्द है, वह असली लगता है। खाने का पैकेट खोलते वक्त बच्ची की खुशी देखकर मन भर आता है। यह पल बहुत खास है।

पुराना जमाना

पुराने शंघाई की सड़कें और वो पुरानी रिक्शा गाड़ी, सब कुछ बहुत असली लग रहा है। पवन मुक्का का बदला में सेट डिजाइन बहुत शानदार है। जब वह दरवाजा खोलकर अंदर आता है, तो लगता है जैसे कोई राज खुलने वाला हो। बच्ची की पढ़ाई और पिता की थकान सब बयां करती है। माहौल बहुत सुंदर है।

संघर्ष की रात

उस रात बहुत हंगामा हुआ था। सफेद कपड़ों वाले ने गुस्सा दिखाया लेकिन रिक्शा वाले ने सब सहन किया। पवन मुक्का का बदला में एक्शन से ज्यादा जज्बात अहम हैं। घर आकर उसने अपनी थकान छिपा ली ताकि बच्ची को पता न चले। यह पिता का त्याग है। बहुत प्रेरणादायक लगता है।

छोटी खुशियां

लाल रंग का कटा हुआ कागज और खाने का लिफाफा, ये तोहफे किसी खजाने से कम नहीं हैं। बच्ची की आंखों में चमक देखकर लगता है कि उसे और कुछ नहीं चाहिए। पवन मुक्का का बदला ने इन छोटे पलों को बहुत बड़ा बनाया है। पिता की मुस्कान में सारी थकान छिपी हुई है। यह दृश्य बहुत प्यारा है।

बेहतरीन अभिनय

बिना ज्यादा डायलॉग के ही सब कुछ समझ आ गया। चेहरे के हावभाव से दर्द और प्यार दोनों झलक रहे थे। पवन मुक्का का बदला के कलाकारों ने कमाल कर दिया है। जब वह बच्ची के सिर पर हाथ रखता है, तो लगा जैसे दुनिया रुक गई हो। यह दृश्य बहुत यादगार बन गया है। सबको देखना चाहिए।

आगे क्या होगा

यह तो बस शुरुआत लगती है। सड़क पर हुई घटना का बदला वह कैसे लेगा, यह देखना बाकी है। पवन मुक्का का बदला का प्लॉट बहुत रोचक मोड़ ले रहा है। बच्ची की पढ़ाई और पिता की मेहनत के बीच का संघर्ष आगे कैसे बढ़ेगा, यह जानने की उत्सुकता है। अगला एपिसोड कब आएगा।

दिल को छू लेने वाली

पूरे दृश्य में एक अलग ही ठंडक और भावना है। रात की रोशनी और घर की गर्माहट का मिलन बहुत प्यारा है। पवन मुक्का का बदला देखकर लगता है कि ऐसे ही लोग समाज की असली ताकत हैं। बच्ची का हंसना और पिता का देखना, यह जोड़ी बहुत प्यारी लगती है। दिल को सुकून मिलता है।