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Pawan Mukka Ka Badlaवां7एपिसोड

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Pawan Mukka Ka Badla

8 saal pehle, Aarav Singh ne apni Pawan Mukka se Sagar Nagar ke 22 martial schools hara diye. Lekin usi ki wajah se uski wife Neha mar gayi. Apni beti Myra ko bachane ke liye woh Taranagar aake rickshaw driver ban gaya. Ek din usne ek ladki bachayi aur uska panga Shaktimaan School se ho gaya. Myra bhi is sab mein fas gayi. Aarav ne apni chhupi taakat dikhayi, sabko crush kiya aur beti bachali. Kya Shaktimaan school use chhodega? Kya Aarav apni beti ko hamesha safe rakh paayega?
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इस एपिसोड की समीक्षा

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सफेद पोशाक वाले का घमंड

सफेद पोशाक वाले शख्स की घमंडी हरकतें देखकर बहुत गुस्सा आ रहा है। उसने टोपी वाले शख्स के चेहरे को बिना वजह छूकर हद पार कर दी है। पवन मुक्का का बदला में ऐसा लग रहा है कि अब बहुत बड़ा धमाका होने वाला है। भीड़ की आंखों में भी आग साफ दिख रही है। सब कुछ शांत है पर तूफान आने वाला है।

टोपी वाले की शांति

टोपी वाले शख्स की शांति देखकर मुझे बहुत हैरानी हो रही है। इतनी बेइज्जती के बाद भी वह चुपचाप खड़ा है। पवन मुक्का का बदला की कहानी में यह धैर्य ही उसकी असली ताकत लगती है। आगे क्या होगा यह देखने के लिए मैं बहुत बेताब हूं। उसकी आंखों में कुछ और ही बात है।

मजदूरों का गुस्सा

पीछे खड़े मजदूरों का गुस्सा साफ झलक रहा है। वे बस एक इशारे का इंतजार कर रहे हैं। पवन मुक्का का बदला में वर्ग संघर्ष बहुत गहरा दिखाया गया है। यह सीन दिलचस्प मोड़ लेने वाला है। हर किसी के चेहरे पर गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। माहौल बहुत तनावपूर्ण हो गया है।

डेया चाचा का आगमन

डेया चाचा के आगमन ने पूरे माहौल को बदल दिया। उनकी मौजूदगी से लग रहा है कि अब खेल बदलेगा। पवन मुक्का का बदला में उनके किरदार की अहमियत बहुत बढ़ गई है। पुराने स्कूल की यादें ताजा हो गईं। उनकी आंखों में अनुभव साफ झलक रहा है। सब उनकी तरफ देख रहे हैं।

खलनायक का अंदाज

सफेद पोशाक वाले की हरकतें बहुत नाटकिया लग रही हैं। वह जानबूझकर सबको भड़का रहा है। पवन मुक्का का बदला में खलनायक का किरदार बहुत अच्छे से निभाया गया है। दर्शक को चिढ़ाने का उसका अंदाज लाजवाब है। उसकी मुस्कान में छिपी खतरनाकियत देखने लायक है।

तूफान से पहले की शांति

टोपी वाले शख्स की आंखों में छिपा गुस्सा देखने लायक है। वह चुप है पर बिल्कुल शांत नहीं है। पवन मुक्का का बदला में यह खामोशी तूफान से पहले की शांति लगती है। मारधाड़ सीन का इंतजार बढ़ गया है। वह कब पलटवार करेगा यह देखना बाकी है।

पुराने दौर की याद

पुराने जमाने के युद्ध कला पाठशाला का माहौल बहुत असली लगा। पीछे कसरत करते लोग देखकर अच्छा लगा। पवन मुक्का का बदला में सजावट और माहौल बहुत शानदार है। यह दौर फिर से जी उठा है। दीवारों पर लगे चित्र भी बहुत पुराने लग रहे हैं।

लड़कों की बेचैनी

भीड़ में खड़े अंक वाले लड़कों की बेचैनी साफ दिख रही है। वे कुछ करना चाहते हैं पर रुके हुए हैं। पवन मुक्का का बदला में यह तनाव बहुत अच्छे से बनाई गई है। हर किरदार अपनी जगह सही है। उनकी मुट्ठियां भिंची हुई हैं।

हीरो की मजबूती

सफेद पोशाक वाले ने कंधे पर हाथ रखकर दबदबा जमाने की कोशिश की। पर टोपी वाला डगा नहीं। पवन मुक्का का बदला में हीरो की मजबूती इसी तरह दिखती है। बिना बोले सब कह दिया उसने। उसकी शारीरिक भाषा बहुत मजबूत है।

बड़ी लड़ाई की आहट

यह सीन देखकर लग रहा है कि अब बड़ी लड़ाई होने वाली है। दोनों के बीच की दुश्मनी साफ झलक रही है। पवन मुक्का का बदला का यह कड़ी सबसे बेहतरीन लगा। आगे की कहानी का इंतजार नहीं हो रहा। हर पल कुछ नया होने वाला है।