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Pawan Mukka Ka Badlaवां2एपिसोड

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Pawan Mukka Ka Badla

8 saal pehle, Aarav Singh ne apni Pawan Mukka se Sagar Nagar ke 22 martial schools hara diye. Lekin usi ki wajah se uski wife Neha mar gayi. Apni beti Myra ko bachane ke liye woh Taranagar aake rickshaw driver ban gaya. Ek din usne ek ladki bachayi aur uska panga Shaktimaan School se ho gaya. Myra bhi is sab mein fas gayi. Aarav ne apni chhupi taakat dikhayi, sabko crush kiya aur beti bachali. Kya Shaktimaan school use chhodega? Kya Aarav apni beti ko hamesha safe rakh paayega?
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इस एपिसोड की समीक्षा

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शुरुआत ही दिल दहला देने वाली है

शुरुआत ही दिल दहला देने वाली है और गमगीन माहौल बनाता है। आरव सिंह की आँखों में पत्नी नेहा सिन्हा के जाने का गम साफ़ दिख रहा है जो किसी को भी रुला दे। कब्र पर खड़े होकर जब वो बच्चे को संभालते हैं, तो रूह कांप जाती है और दर्द महसूस होता है। नेहा की आखिरी निशानी वो अंगूठी अब आरव के पास है जो उनकी याद दिलाती है। इस दर्द भरी कहानी में बदले की आग कैसे सुलगेगी, ये देखने के लिए पवन मुक्का का बदला जरूर देखें। बहुत इमोशनल दृश्य हैं जो दिल को छू लेते हैं।

नेहा का अंतिम समय रुला देता है

नेहा सिन्हा का अंतिम समय देखकर रोना आ गया और दिल टूट गया। खून से सने होठों के साथ वो आरव को अंगूठी सौंपती हैं जो बहुत दर्दनाक है। ये दृश्य बताता है कि उनके बीच का प्यार कितना गहरा था और वो एक दूसरे के लिए क्या थे। आरव की चीखें आज भी कानों में गूंज रही हैं और दर्द ताजा है। बच्ची मायरा सिंह अब बड़ी हो गई है, लेकिन पिता का दर्द वही है जो कभी कम नहीं हुआ। इस नाटक का हर पल भारी पड़ता है और इमोशनल है। पवन मुक्का का बदला में ऐसे ही मोड़ हैं जो हैरान कर देते हैं।

आठ साल बाद का संघर्ष

आठ साल बाद का दृश्य देखकर हैरानी हुई और समय का फर्क दिखा। आरव सिंह अब रिक्शा चला रहे हैं और मेहनत मजदूरी कर रहे हैं। पहले वो कैसे दिखते थे और अब कैसे जी रहे हैं, ये बदलाव कहानी की गहराई बताता है और संघर्ष दिखाता है। मायरा सिंह की मासूमियत पिता के दर्द को और बढ़ा देती है और दिल को छूती है। रात के नीन लाइट्स के बीच ये संघर्ष और भी उभर कर आता है और साफ़ दिखता है। कहानी में क्या होने वाला है, ये जानने के लिए पवन मुक्का का बदला देखते रहें और जुड़े रहें।

समर खन्ना का घमंड

समर खन्ना का आगमन दृश्य बहुत अहम लग रहा है और खतरा मोल ले रहा है। सफेद सूट में वो कितना घमंडी दिख रहे हैं और अमीराना ठाठ दिखा रहे हैं। आरव को रिक्शा खींचते देख वो जिस तरह व्यवहार करते हैं, उससे गुस्सा आता है और नफरत होती है। लगता है यही वो शख्स है जिससे आरव को बदला लेना है और सबक सिखाना है। तारानगर की सड़कों पर ये टकराव बहुत बड़ा होने वाला है और धमाकेदार होगा। पवन मुक्का का बदला की ये झलक बहुत दमदार है और रोमांचक है।

मायरा की मासूमियत

मायरा सिंह की हंसी देखकर थोड़ी राहत मिलती है और खुशी होती है। आरव सिंह के चेहरे पर जब बेटी के लिए मुस्कान आती है, तो दिल को सुकून मिलता है और प्यार दिखता है। लेकिन पीछे छिपा दर्द हमेशा बना रहता है और कभी जाता नहीं है। नेहा सिन्हा की यादें आरव को जीने की ताकत देती हैं और आगे बढ़ाती हैं। ये रिश्ता बहुत प्यारा है और दिल को छू लेता है। इस श्रृंखला में इमोशन और एक्शन का बेहतरीन मिश्रण है और मजा आता है। पवन मुक्का का बदला देखकर आप भी जुड़ जाएंगे और पसंद करेंगे।

अंगूठी की कीमत

वो अंगूठी सिर्फ एक गहना नहीं, नेहा सिन्हा की आखिरी निशानी है और कीमती है। आरव सिंह उसे सीने से लगाकर रखते हैं और संभाल कर रखते हैं। ये डिटेल बताती है कि वो भूले नहीं हैं और यादें ताजा हैं। बदले की आग धीरे धीरे सुलग रही है और वक्त आने वाला है। समर खन्ना को नहीं पता कि वो किससे पंगा ले रहे हैं और मुसीबत मोल ले रहे हैं। जल्द ही तारानगर में हलचल मचने वाली है और शोर होगा। इस कहानी का हर पहलू दिलचस्प है और देखने लायक है। पवन मुक्का का बदला में ऐसा ही नाटक है और रोमांच है।

शंघाई की रातें

शंघाई की रातें और नीन साइन बहुत खूबसूरत लग रहे हैं और आंखें चौंधिया देते हैं। लेकिन इसी चमक धमक के पीछे आरव सिंह का संघर्ष छिपा है और दर्द है। रिक्शा खींचते हुए वो कितने अकेले लग रहे हैं और मजबूर हैं। समर खन्ना जैसे लोग इस शहर पर राज करते हैं और ताकतवर हैं। लेकिन बदला वक्त मांगता है और सब्र जरूरी है। ये सेटिंग और माहौल बहुत जबरदस्त बनाया गया है और शानदार है। पवन मुक्का का बदला के दृश्य बहुत प्रभावशाली हैं और देखने में अच्छे लगते हैं।

दर्दनाक विदाई

नेहा सिन्हा के मरने का दृश्य बहुत दर्दनाक था और रुला देता है। आरव सिंह की बेबसी देखकर बुरा लगा और दिल दुखी हुआ। वो कुछ नहीं कर पाए और बस देखते रहे और बेबस थे। अब वही आरव बदले के लिए तैयार है और गुस्से में है। मायरा सिंह अब उनकी ताकत है और सहारा हैं। कहानी में मोड़ कब आएगा, ये देखना बाकी है और इंतजार है। इतने इमोशनल पल कम ही देखने को मिलते हैं और खास हैं। पवन मुक्का का बदला की ये झलक दिल को छू गई और असर कर गई।

बदले की आग

समर खन्ना की आगमन में जो घमंड है, वो आगे चलकर मुसीबत बनने वाला है और पछतावा होगा। आरव सिंह शांत हैं, लेकिन तूफान अंदर है और आग है। रिक्शा वाला दृश्य जानबूझकर दिखाया गया है ताकि हमें गुस्सा आए और नफरत हो। ये कहानी सिर्फ एक्शन नहीं, जज्बात की भी है और गहरी है। तारानगर की गलियों में अब कुछ बड़ा होने वाला है और धमाका होगा। पवन मुक्का का बदला का ये सफर रोमांचक होने वाला है और मजेदार होगा।

उम्मीद की किरण

पूरी कहानी में एक उदासी छाई हुई है, लेकिन उम्मीद भी है और रोशनी है। आरव सिंह और मायरा सिंह का रिश्ता सबसे मजबूत है और प्यारा है। नेहा सिन्हा की यादें उन्हें आगे बढ़ाती हैं और ताकत देती हैं। समर खन्ना जैसे खलनायक को सबक मिलना जरूरी है और सजा मिलेगी। ये नाटक आपको बांधे रखेगा और छोड़ने नहीं देगा। हर कड़ी में कुछ नया है और आश्चर्य है। पवन मुक्का का बदला को मिस मत करना, ये बहुत खास है और बेहतरीन है।