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Pawan Mukka Ka Badlaवां3एपिसोड

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Pawan Mukka Ka Badla

8 saal pehle, Aarav Singh ne apni Pawan Mukka se Sagar Nagar ke 22 martial schools hara diye. Lekin usi ki wajah se uski wife Neha mar gayi. Apni beti Myra ko bachane ke liye woh Taranagar aake rickshaw driver ban gaya. Ek din usne ek ladki bachayi aur uska panga Shaktimaan School se ho gaya. Myra bhi is sab mein fas gayi. Aarav ne apni chhupi taakat dikhayi, sabko crush kiya aur beti bachali. Kya Shaktimaan school use chhodega? Kya Aarav apni beti ko hamesha safe rakh paayega?
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इस एपिसोड की समीक्षा

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घमंडी खलनायक से बदला

सफेद सूट वाले आदमी की घमंडी हरकतें देखकर सच में बहुत गुस्सा आ रहा है। बेचारे रिक्शा वाले को इस तरह नीचा दिखाकर अपमानित करना बिल्कुल सही नहीं है। लेकिन उसकी आंखों में छिपा हुआ गुस्सा साफ दिख रहा है। यह दृश्य बहुत तीव्र है। यह प्रदर्शन देखने लायक है। पवन मुक्का का बदला में यह बदले की आग कैसे भड़कती है, यह देखना बहुत दिलचस्प होगा।

कपूच वाले का अभिनय

कपूच वाले लड़के का अभिनय सच में जबरदस्त है। वह बाहर से मुस्कुरा रहा है लेकिन अंदर से टूट रहा है। जब सिक्के जमीन पर गिरते हैं, तो इज्जत भी गिरती है। यह दृश्य दिल को छू लेता है। हर भाव मायने रखता है। दर्शकों को यह पसंद आएगा। पवन मुक्का का बदला की कहानी में यह दर्द साफ झलकता है।

शंघाई की पृष्ठभूमि

१९२० के दशक का शंघाई मंच सज्जा बहुत खूबसूरत बनाया गया है। नीयन रोशनी और गीली सड़कें माहौल बनाती हैं। पर कहानी काफी गहरी और दर्दनाक है। हर कोने में एक रहस्य छिपा है। दृश्य बहुत शानदार हैं। निर्माण बहुत शानदार है। पवन मुक्का का बदला में इस दौर की कड़वाहत को अच्छे से दिखाया गया है।

भूतकाल के दृश्य का दर्द

अचानक भूतकाल के दृश्य में औरत और बच्चे को देखकर सब समझ आ गया। अब उसकी चुप्पी का कारण पता चल रहा है। सफेद जैकेट वाले को नहीं पता उसने क्या शुरू कर दिया। यह पल बहुत भारी था। भावनाएं साफ झलकती हैं। पवन मुक्का का बदला की पृष्ठभूमि कहानी बहुत भावुक कर देने वाली है।

तनाव भरा माहौल

जब उसने जमीन से सिक्के उठाए, लगा वह टूट जाएगा। पर उसकी नजरों में कुछ और ही था। लड़ाई का माहौल अब बन रहा है। हर कदम पर तनाव बढ़ता जाता है। सांस रुक सी जाती है। तनाव बना रहता है। पवन मुक्का का बदला आपको सीट से हिलने नहीं देता।

खलनायक की नफरत

सफेद कोट वाला खलनायक बहुत नफरत करने लायक है। पैसे ऐसे उड़ाना उसकी असलियत दिखाता है। बस इंतजार है कि वह कब गिरेगा। उसका अहंकार टूटने वाला है। बदला मीठा होगा। अंत बहुत रोमांचक होगा। पवन मुक्का का बदला में इस बदले का मजा ही कुछ और होगा।

छायांकन

हाथों और सिक्कों पर निकट दृश्य बहुत प्रतीकात्मक हैं। गीली सड़क पर नीयन रोशनी का प्रतिबिंब खूबसूरत है। छायांकन बहुत शानदार है। हर दृश्य भाग कला जैसा है। तकनीक बहुत अच्छी है। पवन मुक्का का बदला में दृश्य कथा कहना बहुत मजबूत है।

खून और आंसू

वह दृश्य जहां औरत खून खांसती है, दिल दहला देने वाला है। यही नायक की वजह बन रहा है। आप उसकी खामोशी को साफ महसूस कर सकते हैं। आंखें नम हो जाती हैं। दिल को छू लेता है। पवन मुक्का का बदला काफी भावुक कर देने वाला है।

कहानी की रफ्तार

अपमान का धीमा निर्माण अंत में विस्फोट को लायक बनाता है। पलकें झपकाना मत वरना सूक्ष्म इशारे चूक जाएंगे। हर संवाद मायने रखता है। कहानी में जान है। गति बहुत सही है। पवन मुक्का का बदला की रफ्तार बहुत संतुलित है।

पारंपरिक बदला

पारंपरिक बदले की कहानी को शैली में बताया गया है। अमीर और गरीब का विरोधाभास साफ दिखता है। बदला कैसे लेगा यह देखने को उत्सुक हूं। कहानी में दम है। एक बार जरूर देखें। सबको देखना चाहिए। पवन मुक्का का बदला जरूर देखने लायक है।