इस दृश्य में काली पोशाक वाले उस्ताद की ताकत देखकर रोंगटे खड़े हो गए। सफेद टोपी वाले को लगा था वह जीत जाएगा, लेकिन पवन मुक्का का बदला में ऐसा मोड़ कोई नहीं सोच सकता था। जब वह साइनबोर्ड तोड़कर गिरा, तब लगा असली गुस्सा क्या होता है। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का अनुभव बहुत रोमांचक रहा, बिल्कुल सिनेमा हॉल जैसा। हर पल में जान थी और दर्शक भी हैरान थे। यह दृश्य बहुत यादगार बन गया है। मुझे यह बहुत पसंद आया।
कहानी में जो तनाव दिखाया गया है वह लाजवाब है। दोनों के बीच की नोकझोंक से साफ़ था कि लड़ाई होने वाली है। पवन मुक्का का बदला की यह कड़ी दिलचस्प है क्योंकि इसमें सिर्फ़ मारपीट नहीं, बल्कि इज़्ज़त का सवाल भी जुड़ा हुआ है। काले कपड़े वाले की आँखों में जो ठंडक थी, वह डरावनी थी। मुझे यह शांत गुस्सा बहुत पसंद आया। बिना चिल्लाए जीतना असली ताकत है। सबने अच्छा काम किया है।
अंत में जब काली टोपी वाले ने विरोधी को उठाकर फेंका, तो हॉल में सन्नाटा छा गया। पवन मुक्का का बदला जैसे शो में ऐसे स्टंट उम्मीद से ज्यादा बेहतरीन लगते हैं। दर्शकों की प्रतिक्रिया भी देखने लायक थी, सब हैरान थे। यह सीन बार बार देखने के लायक है क्योंकि इसमें एक्शन और ड्रामा दोनों का सही मिश्रण है। जोरदार धमाका हुआ था और धूल उड़ी थी। बहुत शानदार लगा।
सफेद चश्मे वाले व्यक्ति का घमंड टूटते हुए देखकर सुकून मिला। पवन मुक्का का बदला में हर किरदार की अपनी एक अलग पहचान है। काली पोशाक वाले ने बिना ज्यादा बोले अपनी ताकत साबित कर दी। संवाद कम थे लेकिन एक्शन ने सब कह दिया। ऐसे वेब सीरीज देखकर लगता है कि मेहनत असली है। कलाकारों को बधाई देनी चाहिए। सबने अच्छा काम किया है। दिल जीत लिया।
कुंग फू की झलक देखने को मिली इस वीडियो में। पवन मुक्का का बदला ने साबित किया कि पुराने स्कूल की लड़ाई अभी भी दिलचस्प है। जब गले पकड़कर नीचे गिराया, तो दर्द महसूस हुआ। कैमरा एंगल और स्लो मोशन का इस्तेमाल बहुत सही जगह हुआ है। मैं इस सीरीज का अगला एपिसोड देखने के लिए बेताब हूँ। कृपया जल्दी लाएं। हम इंतज़ार कर रहे हैं। बहुत मज़ा आया।
पुराने जमाने के हॉल की सजावट बहुत सुंदर है। पवन मुक्का का बदला की शूटिंग लोकेशन ने कहानी को असली बना दिया है। लकड़ी के काम और लालटेन देखकर पुरानी फिल्मों की याद आती है। काले कपड़े वाले हीरो की एंट्री धीमी लेकिन दमदार थी। ऐसे प्रोडक्शन वैल्यू वाले शो कम ही देखने को मिलते हैं आजकल। नज़ारा बहुत प्यारा था। सेट डिजाइनर की तारीफ करनी चाहिए।
लड़ाई तो हुई लेकिन असली जीत किसकी हुई यह तो आगे पता चलेगा। पवन मुक्का का बदला में हर एपिसोड के बाद सस्पेंस बढ़ता जाता है। सफेद टोपी वाला ज़रूर हारा, लेकिन क्या वह चुप बैठेगा। काले उस्ताद की चुनौती अब और बड़ी होगी। यह अनिश्चितता दर्शकों को बांधे रखती है। मुझे यह सस्पेंस बहुत पसंद आया। आगे क्या होगा। कहानी बहुत रोचक है। सबको देखना चाहिए।
दोनों एक्टर्स की बॉडी लैंग्वेज बहुत शानदार थी। पवन मुक्का का बदला में बिना डायलॉग के भी इमोशन समझ आ गए। जब गला दबाया गया तो चेहरे पर दर्द साफ़ दिख रहा था। काली पोशाक वाले के चेहरे पर कोई बदलाव नहीं आया, वही असली हीरो की निशानी है। ऐसे अभिनय को सलाम करना चाहिए। बहुत प्रभावशाली लगा। चेहरे के भाव गजब के थे। दिल जीत लिया।
मोबाइल पर इतनी क्लियर क्वालिटी में एक्शन देखना सुकून देने वाला है। पवन मुक्का का बदला जैसे शो नेटशॉर्ट ऐप पर ही शोभा देते हैं। रुक रुक कर वीडियो नहीं आता, बस मज़ा आता है। मैंने पूरा सीन बिना आंख मूंदे देखा। ऐसे ही और कंटेंट की उम्मीद है। दोस्तों को भी जरूर बताऊंगा इस सीरीज के बारे में। सबको देखना चाहिए। बहुत मज़ा आया। अनुभव अच्छा रहा।
आज के जमाने में ऐसे क्लासिक फाइट सीन देखना दुर्लभ है। पवन मुक्का का बदला ने पुरानी यादें ताज़ा कर दीं। न तो ज्यादा कंप्यूटर ग्राफिक्स, न ही फालतू के ब्लो। सब कुछ असली और कच्चा लगा। काले कपड़े वाले की पर्सनालिटी बहुत प्रभावशाली है। यह सीरीज मेरी फेवरेट लिस्ट में शामिल हो गई है। बहुत बढ़िया काम है। सबको पसंद आएगा। दिल जीत लिया।
इस एपिसोड की समीक्षा
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