शुरुआत का दृश्य बहुत तनावपूर्ण है। बुजुर्ग व्यक्ति की गुस्सेली आवाज़ और लड़की की घबराहट साफ दिखती है। कमरे की सजावट उस जमाने की असली झलक देती है। पवन मुक्का का बदला में ऐसे ड्रामेटिक मोड़ देखकर मज़ा आ गया। कलाकारों के चेहरे के भाव बहुत गहरे हैं। चाय का कप रखने का तरीका भी कहानी कहता है। यह शो देखने लायक है।
सफेद सूट वाला शख्स बहुत घमंडी लग रहा है। उसकी बात करने का ढंग बाकी सबको चुनौती दे रहा है। पीछे खड़े लोग भी डरे हुए हैं। हॉल का माहौल बहुत गंभीर है। पवन मुक्का का बदला की कहानी में यह टकराव बहुत अहम लगता है। चश्मे वाला व्यक्तित्व भी कुछ छुपा रहा है। हर दृश्य में एक नया राज खुलता है। दर्शक बंधे रहते हैं।
लकड़ी की सहारे खड़ा व्यक्ति बहुत मजबूत दिखता है। उसके चेहरे पर गुस्सा और ठान ली हुई कसम साफ है। सामने वाले की धमकियों से वह नहीं डर रहा। पवन मुक्का का बदला में ऐसे मारधाड़ के दृश्यों की उम्मीद बढ़ गई है। बॉक्स से पर्ची निकालना किसी किस्मत का खेल जैसा है। सबकी सांसें थमी हुई हैं। यह ड्रामा बहुत रोमांचक है।
सफेद टोपी वाला सरदार बहुत शांत बैठे है। उनकी खामोशी सबसे ज्यादा डरावनी है। वे सब कुछ देख रहे हैं लेकिन कुछ बोल नहीं रहे। पवन मुक्का का बदला में यह किरदार बहुत रहस्यमयी है। कमरे की रोशनी और पुराने फर्नीचर ने माहौल बना दिया है। यह ऐतिहासिक नाटक बहुत अच्छा बना है। हर बारीकी पर काम किया गया है।
चोटी वाला व्यक्तित्व किताब पढ़ रहा है। वह सबके बीच अलग लग रहा है। उसकी आंखों में चालाकी है। पवन मुक्का का बदला की कहानी में यह किरदार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जब वह पंखा हिलाता है तो लगता है कोई संकेत दे रहा है। डायलॉग डिलीवरी बहुत दमदार है। मुझे यह स्टाइल पसंद आया।
लड़की की आंखों में आंसू और डर साफ दिख रहा है। वह कुछ बताना चाहती है लेकिन डर रही है। बुजुर्ग का गुस्सा उस पर नहीं बल्कि हालात पर है। पवन मुक्का का बदला में भावनात्मक दृश्य भी बहुत अच्छे हैं। कपड़ों की बनावट बहुत असली है। हर छोटी चीज पर ध्यान दिया गया है। कहानी में दम है।
चिट्ठी वाला बॉक्स वाला सीन बहुत रहस्य बनाता है। सबकी बारी आ रही है और हर कोई घबराहट से देख रहा है। पर्ची पर क्या लिखा है यह जानने की उत्सुकता बढ़ती है। पवन मुक्का का बदला में ऐसे मोड़ दर्शकों को बांधे रखते हैं। पीछे खड़े गुंडे भी अब चुप हैं। माहौल में बिजली सी दौड़ रही है। बहुत बढ़िया।
सफेद सूट वाले का आगमन बहुत धमाकेदार है। वह सबको ऑर्डर दे रहा है जैसे वह मालिक हो। लेकिन असली ताकत कहीं और है। पवन मुक्का का बदला का ताकत का संतुलन बहुत दिलचस्प है। सोफे पर बैठे व्यक्ति की चुप्पी सब पर भारी पड़ रही है। यह जंग किसकी होगी। देखने में मज़ा आ रहा है।
पीछे खड़े सभी लोग अलग-अलग कपड़ों में हैं। कोई घायल है तो कोई तैयार है। सबकी नजरें उस बॉक्स पर हैं। पवन मुक्का का बदला में हर किरदार की अपनी कहानी है। कैमरे की नज़र बहुत अच्छी है जो हर चेहरे का भाव पकड़ते हैं। यह शो बिल्कुल निराश नहीं करता। मुझे यह बहुत पसंद आया।
पूरे हॉल में सन्नाटा छाया हुआ है। बस एक आवाज़ गूंज रही है। यह शांति तूफान से पहले की है। पवन मुक्का का बदला का अंत बहुत जोरदार होने वाला है। पुराने जमाने की मारधाड़ और राजनीति साफ झलकती है। मुझे यह स्टाइल बहुत पसंद आया। नेटशॉर्ट पर देखने का मज़ा ही अलग है। बहुत बढ़िया।
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