इस शो में कार्रवाई के दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लाल कुरता वाले शख्स की युद्ध कला कमाल की है। बूढ़े योद्धा ने हार नहीं मानी, यह जुनून देखकर दिल भर आया। पवन मुक्का का बदला नामक इस नाटक में हर पल रहस्य बना रहता है। सफेद पोशाक वाली महिला की चिंता साफ झलक रही है। आंगन की मंच सजावट भी बहुत ही असली लग रही है। दर्शकों के लिए यह एक बेहतरीन नज़ारा है जो बार बार देखने को मजबूर कर देता है। हर संवाद में दम है और अभिनय भी लाजवाब है।
सफेद पोशाक वाली महिला के चेहरे पर जो घबराहट थी, वह दिल को छू गई। लगता है उसे इस लड़ाई के नतीजे का डर सता रहा है। पवन मुक्का का बदला की कहानी में भावनात्मक पرت बहुत गहरे हैं। लाल कुरता वाले शख्स की क्रूरता और बूढ़े योद्धा की मजबूरी के बीच का संघर्ष देखने लायक है। काले हैट वाले शख्स का शांत रहना भी कई सवाल खड़े करता है। आगे क्या होगा यह जानने की उत्सुकता बढ़ रही है। हर पल नया मोड़ ले रहा है।
लाल कुरता वाले शख्स की एंट्री और उसका अंदाज खतरनाक लग रहा है। उसके बालों की सफेद लट भी उसके किरदार को एक अलग पहचान देती है। पवन मुक्का का बदला में खलनायक इतना ताकतवर क्यों है, यह जानना जरूरी है। उसने बूढ़े योद्धा को बिना किसी रहम के पटक दिया। जमीन पर गिरने के बाद भी बूढ़े योद्धा ने हार नहीं मानी। यह जिद्द ही इस कहानी की जान है। सब हैरान रह गए।
उम्र ढल चुकी है लेकिन हौसले अभी भी जवान हैं। बूढ़े योद्धा ने लाल कुरता वाले के सामने डटकर मुकाबला किया। पवन मुक्का का बदला में ऐसे किरदार ही असली हीरो होते हैं। खून की उल्टी होने के बाद भी वह खड़ा होने की कोशिश करता है। यह दृश्य देखकर आंखें नम हो गईं। उसके साथ खड़ी छोटी बच्ची की मासूमियत भी कहानी में वजन बढ़ाती है। ऐसे सीन्स ही इस शो को बाकी से अलग बनाते हैं। बहुत प्रभावशाली है।
पुराने जमाने की इमारतें और आंगन का नज़ारा बहुत ही सुंदर है। लगता है जैसे हम उसी दौर में जी रहे हों। पवन मुक्का का बदला की निर्माण गुणवत्ता बहुत हाई लेवल की है। लाल झंडे और पुराने दीये भी बहुत अच्छे लग रहे हैं। कलाकारों की पोशाक भी किरदार के अनुसार ही है। सफेद पोशाक वाली महिला के वस्त्र बहुत ही सुंदर हैं। हर बारीकी पर ध्यान दिया गया है जो निर्माता की मेहनत दिखाता है। शानदार कलाकारी है।
उस छोटी बच्ची की आंखों में जो डर था, वह सब कुछ कह रहा है। वह बूढ़े योद्धा का हाथ पकड़े खड़ी थी और सब देख रही थी। पवन मुक्का का बदला में बच्चों की प्रतिक्रिया भी बहुत स्वाभाविक हैं। लड़ाई के बीच में उसकी मासूमियत टूटती हुई लग रही थी। काले हैट वाले शख्स ने उसे संभालने की कोशिश की। यह परिवार संबंध कहानी को आगे बढ़ाएगा। दर्शक इन किरदारों से जुड़ चुके हैं। दिल पर असर हुआ।
काले हैट वाले शख्स ने पूरे दृश्य में कुछ नहीं कहा बस देखता रहा। उसकी आंखों में गुस्सा और चिंता दोनों साफ दिख रहे थे। पवन मुक्का का बदला में यह किरदार सबसे ज्यादा रहस्यमयी लग रहा है। क्या वह बीच में कूदेगा या बस तमाशबीन बना रहेगा। उसकी स्थिति बताती है कि वह कोई अहम भूमिका निभाने वाला है। उसकी खामोशी शोर से ज्यादा असरदार है। यह रहस्य बनाए रखता है। कौन होगा वह।
युद्ध कला के दांवपेंच बहुत ही असली लग रहे हैं। कोई भी दृश्य नकली नहीं लगा। पवन मुक्का का बदला में लड़ाई की गति और शक्ति बहुत अच्छे से दिखाई गई है। लाल कुरता वाले की किक और बूढ़े योद्धा का रोकना देखने लायक था। कैमरा कोण भी लड़ाई को उजागर कर रहे हैं। जमीन पर गिरने का अभिनय भी बहुत सही था। एक्शन प्रशंसकों के लिए यह शो किसी उपहार से कम नहीं है बिल्कुल। मज़ा आ गया।
सिर्फ मारपीट नहीं बल्कि इसके पीछे की वजह भी जाननी है। क्यों हो रहा है यह सब। पवन मुक्का का बदला की पटकथा में दम है। हर किरदार का अपना मकसद लग रहा है। लाल कुरता वाला बदला ले रहा है या कोई और मकसद है। सफेद पोशाक वाली महिला की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है। यह शो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि भावनात्मक सफर भी है। देखने वाले को बांधे रखता है। कहानी गहरी है।
इस कड़ी के बाद अब अगला भाग कब आएगा। बूढ़े योद्धा का क्या होगा यह जानना जरूरी है। पवन मुक्का का बदला ने रुकावट पर खत्म किया है। लाल कुरता वाले की जीत हुई लेकिन जंग अभी बाकी है। सफेद पोशाक वाली महिला कुछ बोलने वाली थी पर रुक गई। यह रहस्य दर्शकों को पागल कर देगा। इंटरनेट मंच पर यह शो जरूर देखना चाहिए। बहुत ही शानदार अनुभव रहा। इंतज़ार रहेगा।
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