सूरज की बहादुरी देखकर रोंगटे खड़े हो गए हैं। भालू से लड़ना कोई मज़ाक नहीं है, पर वो बिना डरे सामने खड़ा हो गया। जब उसने अपनी पीठ के निशान दिखाए, तो समझ आया कि वो साधारण इंसान नहीं है। (डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक में ऐसे सीन्स दिल जीत लेते हैं। जॉया की चिंता साफ़ दिख रही थी कार के अंदर। विक्रम साहब की चालें भी कुछ ख़ास लग रही हैं इस कहानी में।
सूरज के शरीर पर वो निशान सिर्फ़ चोट नहीं, बल्कि उसकी पहचान हैं। जब उसने कहा कि हमला उसकी फितरत है, तो कांप गए हम। जॉया को बचाने के लिए वो कितना कुछ झेल रहा है, ये देखकर दिल दहल गया। (डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक की कहानी में हर मोड़ पर नया सस्पेंस है। विक्रम साहब की चालाकी और सूरज की ताकत का मुकाबला देखने लायक है।
कार के अंदर जॉया की आँखों में डर और सूरज के लिए फिक्र साफ़ झलक रही थी। बाहर भालू का खतरा और अंदर ये भावनात्मक जुड़ाव। सूरज ने अपनी जैकेट उतारी तो पीठ के निशानों ने सबका मुँह बंद कर दिया। (डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक में एक्शन के साथ इमोशन भी बराबर है। वो ड्राइवर भी हैरान था ये देखकर। असली हीरो वही है जो चुपचाप सब सह ले।
विक्रम साहब दूर से सब देख रहे हैं, उनकी आँखों में कुछ और ही चाल है। उन्हें जॉया की फिक्र नहीं, बस अपना मतलब चाहिए। वहीं सूरज जान की बाजी लगाकर सबको बचा रहा है। (डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक में विलेन और हीरो का कंट्रास्ट कमाल का है। भालू वाला सीन तो बिल्कुल सिनेमाई अंदाज़ में था। ऐसे ड्रामा बार-बार देखने को मन करता है।
लगा था कि सूरज बस एक साधारण लड़का है, पर उसकी असली पहचान तो अब सामने आई है। फौजी के पदक नहीं, ये उसके जख्म हैं जो उसकी कहानी कहते हैं। जॉया को सच जानकर झटका लगा होगा। (डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक में ऐसे ट्विस्ट्स कहानी को आगे बढ़ाते हैं। भालू से लड़ाई तो बस एक बहाना था असली ताकत दिखाने का। अब आगे क्या होगा ये देखना बाकी है।