सुरज की बातचीत देखकर मज़ा आ गया। कैसे ठंडे दिमाग से विक्रम राठौर को जाल में फंसाया। हर संवाद में वजन था और अभिनय बहुत स्वाभाविक लगा। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक में ऐसे दृश्य बार-बार देखने को मिलते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर गुणवत्ता बहुत अच्छी है और कहानी में दम है। विक्रम का गुस्सा और सुरज का सब्र देखने लायक था। यह सौदे वाला दृश्य बहुत ही तनावपूर्ण था। सबको पसंद आएगा।
पत्नी का किरदार बहुत मज़बूत था। चुपचाप खड़ी होकर सब देख रही थी पर आँखों में चमक थी। जब बात पत्नी की आई तो सुरज का गुस्सा साफ़ दिख रहा था। परिवार की इज़्ज़त का सवाल था और विक्रम राठौर को सबक मिलना चाहिए था। ऐसे में पति का खड़ा होना जरूरी था। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक में रिश्तों की अहमियत दिखाई गई है। महिला किरदार भी कमज़ोर नहीं दिखाई गई है। यह बहुत अच्छी बात है।
पेन ड्राइव वाली सौदा बहुत सस्पेंस भरा था। सात लाख की बात हुई पर असली खेल कुछ और था। विक्रम राठौर को लगा वो जीत गया पर सुरज एक कदम आगे था। होशियारी से काम लिया गया। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक की कहानी में ऐसे मोड़ हैं जो बांधे रखते हैं। नेटशॉर्ट पर देखने का अनुभव बहुत अच्छा रहा। अंत में विक्रम का चेहरा देखने लायक था। सब हैरान रह गए।
विक्रम राठौर का किरदार नकारात्मक है पर अभिनय शानदार है। लिफ्ट में अकेले खड़े होकर जो नज़र दी, रोंगटे खड़े हो गए। खलनायक भी इतने दमदार हों तो मज़ा आता है। सुरज से टक्कर लेना आसान नहीं होगा। उसकी चालें खतरनाक हैं। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक में खलनायक का प्रवेश धमाकेदार है। सत्ता का खेल बहुत अच्छे से दिखाया गया है। दर्शक बंधे रहेंगे।
मैं कभी झूठ नहीं बोलता वाली पंक्ति बहुत हिट हुई। सुरज का आत्मविश्वास देखते ही बनता था। शर्मा परिवार को लूटने वाला अब खुद लूटा गया। बदले की आग बहुत खूबसूरती से दिखाई गई है इस कार्यक्रम में। संवाद प्रस्तुति परफेक्ट थी। डबिंग ब्लाइंड डेट से दिल तक की पटकथा बहुत मज़बूत है। हर बात में गहराई है। लोग इसे पसंद करेंगे।