जब जॉया और सूरज को सजाए कमरे में छोड़ा गया, तो हवा में तनाव साफ दिख रहा था। लाल गुब्बारे और खुशियों के निशान बीच यह अजीब खामोशी बहुत कुछ कह रही है। सूरज का जमीन पर सोने का प्रस्ताव और जॉया का इनकार, दोनों के बीच की दूरी को बता रहा है। (डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक में यह सीन बहुत गहरा है।
जॉया ने बिस्तर पर सफेद गुड़िया रखकर जो सीमा बनाई, वह सिर्फ कपड़े की गुड़िया नहीं बल्कि उनके रिश्ते की अभी की हकीकत है। सूरज ने वादा किया कि वह हिलेगा नहीं, पर क्या वाकई वह इतना शांत रहेगा? माता-पिता की उम्मीदें और बच्चों की मजबूरी का टकराव देखने लायक है।
बाहर खड़े माता-पिता की बातचीत से साफ है कि वे अपनी बेटी जॉया को लेकर कितने चिंतित हैं। पिता का सूरज पर भरोसा और माँ का शक, हर परिवार की कहानी लगता है। कंपनी और बेटी दोनों सौंपने की बात ने जिम्मेदारी को बहुत बढ़ा दिया है। (डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक की कहानी में यह मोड़ अहम है।
सूरज ने कहा कि वह सोते हुए हिलता नहीं है, यह उसकी ईमानदारी है या सिर्फ बातें? जॉया की आँखों में संदेह साफ झलक रहा था। एक ही बिस्तर पर दो अजनबी जैसे लोग, यह स्थिति किसी को भी बेचैन कर दे। देखना होगा कि सुबह तक यह सीमा बनी रहती है या नहीं।
माँ को लग रहा है कि कुछ आवाज़ क्यों नहीं आ रही, यह सोचकर कि वे अलग सो रहे हैं। पिता ने डांटा कि शर्म नहीं आती सुनने में। यह संवाद बहुत ही असली लगता है। जॉया उनकी इकलौती बेटी है, इसलिए चिंता जायज है। (डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक में भावनाएं अच्छे हैं।