शुरुआत में जो नज़दीकियां दिखाई गईं, वो दिल को छू गईं। लेकिन फिर अचानक शर्तें सामने आ गईं। तीन महीने का वादा और प्यार से दूरी। क्या वाकई ये रिश्ता सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा? (डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक में ये कशमकश देखने लायक है। लक्जरी सेटिंग और किरदारों की अदाकारी ने मुझे बांधे रखा। आगे क्या होगा, ये जानने की उत्सुकता बढ़ गई है।
एक फौजी को सहायक बनाना कोई मज़ाक नहीं है। उसने साफ़ कह दिया कि वो सिर्फ शादी के लिए आया है। लेकिन लड़की ने उसे अपनी कंपनी में नौकरी दे दी। बीस हज़ार की सैलरी पर पति को नौकर बनाना कैसा लगा आपको? (डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक की ये कहानी बहुत अनोखी है। सत्ता संघर्ष देखकर मज़ा आ रहा है।
सोफे पर सोने वाला सीन बहुत प्यारा था। वो रात भर वहीं रुका और सुबह जब वो जागी, तो नज़ारा देखकर हैरान रह गई। गुस्सा भी आया और प्यार भी। ऐसे छोटे-छोटे पल ही तो कहानी को आगे बढ़ाते हैं। (डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक में रोमांस और ड्रामा का बेहतरीन मिश्रण है। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का अनुभव काफी अच्छा रहा।
पार्किंग वाले सीन में अचानक एक्शन आ गया। लग रहा था कि शांति से बात होगी, लेकिन गुंडे आ गए। लड़के की एंट्री धांसू थी। बिना डरे सामने खड़ा हो गया। क्या वो अपनी पुरानी पहचान छिपा रहा है? (डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक में एक्शन और रोमांस का तड़का लगा है। हर कड़ी के बाद नई उलझन मिलती है।
लड़की ने साफ़ कह दिया कि उसे किसी से प्यार नहीं होगा। ये डायलॉग बहुत भारी था। लेकिन क्या दिल मानने वाला है? जब पास रहोगे तो भावनाएं तो आएंगी ही। ये ज़िद कब तक चलेगी? (डबिंग) ब्लाइंड डेट से दिल तक की कहानी में ये विवाद मुख्य है। संवाद बहुत तेज़ और प्रभावशाली हैं। बिल्कुल बोर नहीं होने वाले।