जब वह दूसरी लड़की के साथ आया तो उसकी आँखों में दर्द साफ़ दिख रहा था। बिना किसी संवाद के एक्टिंग कमाल की है। दिन में दुश्मन, रात में पिया देखते वक्त लगा जैसे मैं खुद उस कमरे में खड़ी हूँ। यह चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचाती है। काश वे बात कर पाते और सब साफ़ हो जाता।
बेडरूम वाला दृश्य बहुत इमोशनल था। उसने माथे पर हाथ रखकर बुखार चेक किया। गुस्सा सब गायब हो गया। दिन में दुश्मन, रात में पिया में यह केयरिंग वाला पहलू बहुत प्यारा लगा। दवाई का पैकेट खोलना छोटा विवरण था पर बहुत असरदार। सच्चा प्यार छुपता नहीं है कभी।
हाथ पकड़ने वाला दृश्य देखकर दिल पिघल गया। यह इशारा काफी था कि वह उसे अकेला नहीं छोड़ सकता। दिन में दुश्मन, रात में पिया की लगन बहुत गहरी है। वे दुश्मन लगते हैं पर दिल से जुड़े हैं। ऐसे दृश्य बार बार देखने को मन करता है। बहुत खूबसूरत पल था यह।
स्केचिंग वाला दृश्य दिखाता है कि वह टूटी नहीं हैं। वह अपने काम में व्यस्त रहकर खुद को संभाल रही हैं। दिन में दुश्मन, रात में पिया में महिला किरदार की मजबूती अच्छी लगी। सहायक का खाना लाना भी अच्छा लगा। उम्मीद है वह जल्द खुश होगी।
नायक का किरदार बहुत कन्फ्यूजिंग है। एक तरफ दूसरी लड़की, दूसरी तरफ बीमार पत्नी की फिक्र। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी बहुत पेचीदा है। वह क्यों ऐसा कर रहा है? क्या यह कोई योजना है? जानने के लिए अगली कड़ी देखना जरूरी है। सस्पेंस बना हुआ है।
लाइटिंग और सजावट बहुत सिनेमैटिक है। बेडरूम का माहौल बहुत नरम और शांत था। दिन में दुश्मन, रात में पिया की दृश्य गुणवत्ता शानदार है। हर फ्रेम एक तस्वीर जैसा लगता है। निर्माण मूल्य देखकर हैरानी हुई। छोटी ड्रामा में इतनी मेहनत काबिले तारीफ है।
गलतफहमी का यह सिलसिला कब टूटेगा? दोनों एक दूसरे को चाहते हैं पर परिस्थितियां अलग हैं। दिन में दुश्मन, रात में पिया देखते वक्त बहुत गुस्सा आता है। काश वे सच बोल पाते। यह दर्शक के धैर्य की परीक्षा है। फिर भी कहानी इतनी दिलचस्प है कि रुक नहीं पाते।
उसकी खामोशी सबसे बड़ी ताकत है। वह रोती नहीं बर्दाश्त करती है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में यह धैर्य बहुत प्रभावशाली लगा। वह सिर्फ एक पीड़ित नहीं है। वह अपनी जिंदगी जी रही है। उसकी मुस्कान देखकर लगा सब ठीक हो जाएगा। बहुत प्रेरणादायक किरदार है।
दवाई का इंतजाम करना बताता है कि वह उसकी आदतें जानता है। यह प्यार अभी भी जिंदा है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे छोटे संकेत बहुत मायने रखते हैं। यथार्थवादी लगता है यह सब। दिल को छू लेने वाला दृश्य था। ऐसे पल ही कहानी को खास बनाते हैं।
पूरी छुट्टी इसी ड्रामा में बीत गई। एंग्स्ट, रोमांस और रहस्य सब कुछ है। दिन में दुश्मन, रात में पिया ने नींद उड़ा दी। गति बिल्कुल सही है। अगली कड़ी कब आएगी? सभी ड्रामा प्रेमियों को यह जरूर देखना चाहिए। बहुत मजा आ रहा है।