सुबह छह बजे का वक्त था और फोन पर वो मैसेज देखकर उसकी नींद हराम हो गई। चेहरे पर चिंता साफ झलक रही थी। जब उसे बिस्तर पर वो अंगूठी और चिट्ठी मिली, तो उसका दिल टूट गया। ऐसा लगा जैसे सब कुछ हाथ से फिसल रहा हो। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी में ऐसा मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। उसकी आंखों में आंसू देखकर दर्शक भी रो पड़े।
काले कोट में नायक कितना सुंदर लग रहा था, पर उसकी आंखों में दर्द साफ दिखाई दे रहा था। वह घर से बाहर भागा, जैसे किसी को पाने की जल्दी हो। रास्तों में दौड़ते हुए उसकी हालत खराब थी। क्या वह उसे ढूंढ पाएगा? यह सवाल हर किसी के मन में था। दिन में दुश्मन, रात में पिया का यह सीन दिल को छू लेने वाला है। अभिनय बहुत स्वाभाविक लगा।
कैफे वाला सीन देखकर मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। वह उसे किसी और के साथ देखकर स्तब्ध रह गया। क्या यह धोखा था या कोई गलतफहमी? उसके चेहरे के भाव बता रहे थे कि वह अंदर से टूट चुका है। ऐसे में जब वह सीढ़ियों पर गिरा, तो लगा सब खत्म हो गया। दिन में दुश्मन, रात में पिया में भावनात्मक नाटक बहुत गहरा है। हर पल नया मोड़ मिलता है।
सीढ़ियों पर बैठकर वह रो रहा था, उसकी हालत देखकर बुरा लगा। तभी नायिका वहां आई और सब कुछ बदल गया। उनकी बनावट इतनी गहरी थी कि स्क्रीन पर आग लग गई। जब उन्होंने एक दूसरे को गले लगाया, तो लगा जैसे जुदा हुए दिल मिल गए हों। दिन में दुश्मन, रात में पिया की यह प्रेम कहानी बहुत खास है। प्यार का सही मतलब यही है।
फोन की घंटी बजी और उसकी दुनिया हिल गई। वह नोट और अंगूठी देखकर समझ गया कि कुछ गड़बड़ है। उसकी दौड़ और बेचैनी देखकर लगता है कि वह अपने प्यार को खोने से डर रहा है। इस शो को देखना एक अलग ही अनुभव है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में हर कड़ी के बाद उत्सुकता बढ़ती जाती है। कहानी का अंत बहुत रोचक है।
सफेद शर्ट में वह कितना मासूम लग रहा था, जब वह सीढ़ियों पर गिरा। उसका दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। फिर नायिका का आना और उसे संभालना, यह पल बहुत खूबसूरत था। उनकी आंखों में एक दूसरे के लिए प्यार साफ झलक रहा था। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी दिल को छू लेती है। ऐसे सीन बार बार देखने को जी करता है।
बाहर का दृश्य और उसकी भागदौड़ कहानी में नया मोड़ लाती है। वह जिससे मिलने गया, क्या वह उसकी उम्मीदों पर खरी उतरेगी? कैफे वाला सीन बहुत चिंता भरा था। दर्शक भी अपनी सांस रोके देख रहे थे। दिन में दुश्मन, रात में पिया में रहस्य और प्यार का बेहतरीन मिश्रण है। निर्देशन बहुत शानदार है। हर दृश्य में जान है।
जब वह दरवाजे से बाहर निकला, तो उसके कदमों में एक अजीब सी घबराहट थी। घर का माहौल भी बहुत सुंदर है, पर कहानी में उदासी छाई हुई है। अंगूठी का मिलना किसी विदाई की निशानी लग रहा था। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे पल दर्शकों को बांधे रखते हैं। मुझे यह नाटक बहुत पसंद आ रहा है। आगे क्या होगा, यह जानने की बेचैनी है।
आखिरकार जब नायक और नायिका मिले, तो लगा जैसे तूफान थम गया हो। सीढ़ियों वाला सीन बहुत भावनात्मक था। उसने उसे कसकर गले लगा लिया, जैसे उसे फिर से खोना नहीं चाहता। उनकी प्रेम कहानी में उतार चढ़ाव बहुत हैं। दिन में दुश्मन, रात में पिया की लोकप्रियता का कारण यही है। लोग ऐसे ही गहरे रिश्ते देखना पसंद करते हैं। बहुत प्यारा लगा।
सुबह की शुरुआत ही ऐसे दुखद संदेश से होगी, यह किसी ने नहीं सोचा था। उसका चेहरा पीला पड़ गया था। फिर पूरी कहानी में वह उसी खोज में लगा रहा। अंत में मिलन बहुत सुकून देने वाला था। दिन में दुश्मन, रात में पिया ने मेरा दिल जीत लिया है। यह शो देखने के लिए यह मंच श्रेष्ठ है। कहानी बहुत दमदार है। सभी को देखना चाहिए।