उसने जब हरे बक्से से काली ड्रेस निकाली तो चेहरे पर जो मुस्कान थी, वो सब कुछ बता रही थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे मोड़ देखकर दिल धड़कने लगा। कांच वाली लिफ्ट में उसका अंदाज देखकर सबकी सांसें रुक गईं। नीले सूट वाले शख्स की घबराहट साफ दिख रही थी। क्या ये प्यार है या कोई खेल? हर पल नया सस्पेंस लेकर आता है। दर्शक बने रहना चाहेंगे।
लिफ्ट का वो सीन कमाल का था। जब वो ऊपर जा रही थी और नीचे सब देख रहे थे, माहौल में तनाव था। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी में ये पल सबसे अहम लगता है। उसने मुंह ढक लिया जब वो सामने आया। शायद उसे अपनी गलती का अहसास हुआ या फिर शर्म आई। एक्टिंग बहुत नेचुरल लगी। कैमरा एंगल भी बहुत सटीक था।
काले रंग का फेदर वाला आउटफिट उस पर बहुत जच रहा था। दिन में दुश्मन, रात में पिया में फैशन सेंस भी काफी अच्छा दिखाया गया है। जब वो सीढ़ियों से दौड़कर ऊपर पहुंचा, तो लगा जैसे वो उसे रोकना चाहता हो। उनके बीच की केमिस्ट्री देखते ही बनती है। ऐसे ड्रामे ही असली मज़ा देते हैं। संगीत भी बैकग्राउंड में सही था।
तीन लोग जब दरवाजे से अंदर आए, तो उनकी हैरानी देखने लायक थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया में हर किरदार का अपना वजन है। साथ खड़ी सहेली की चुप्पी भी कुछ कह रही थी। शायद वो इस रिश्ते के बारे में सब जानती हैं। कहानी में गहराई है जो धीरे धीरे खुल रही है। दर्शक बने रहना चाहेंगे। डायलॉग कम लेकिन असरदार थे।
उसने ड्रेस पहनने से पहले जो पल सोचा, वो बहुत खूबसूरत था। दिन में दुश्मन, रात में पिया में इमोशन्स को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। कांच की लिफ्ट ने पूरे सीन को और भी ड्रामेटिक बना दिया। नीचे खड़े लोग बस तमाशबीन नहीं, कहानी का हिस्सा लग रहे थे। अगला एपिसोड कब आएगा। इंतजार नहीं हो रहा है।
भागते हुए उस शख्स को देखकर लगा कि उसे बहुत देर हो चुकी है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में वक्त की अहमियत भी दिखाई गई है। जब वो लिफ्ट के दरवाजे पर मिले, तो हवा में कुछ अलग ही था। उसकी आंखों में डर और उम्मीद दोनों थे। ऐसे सीन्स दिल पर असर करते हैं। बहुत ही शानदार प्रेजेंटेशन है। लाइटिंग भी परफेक्ट थी।
घर का इंटीरियर बहुत लग्जरी है, जो कहानी के मिजाज को बढ़ाता है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में सेट डिजाइन पर खासा ध्यान दिया गया है। जब वो ऊपर पहुंचा और उसने मुंह छुपाया, तो लगा जैसे कोई राज खुलने वाला हो। इन दोनों के बीच का इतिहास क्या है, ये जानना जरूरी है। क्यूरियोसिटी बनी हुई है। हर फ्रेम सुंदर है।
गिफ्ट बॉक्स खोलते वक्त उसकी खुशी साफ झलक रही थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया में छोटी छोटी चीजों को भी अच्छे से दिखाया गया है। फिर अचानक माहौल बदल गया जब वो लोग आए। शायद ये मिलना पहले से प्लान नहीं था। अनचाही मुलाकातें ही कहानी को आगे बढ़ाती हैं। बहुत ही रोचक मोड़ है। एडिटिंग स्मूथ थी।
लिफ्ट के अंदर उसका अकेलेपन और बाहर भीड़ का होना एक अजीब कंट्रास्ट था। दिन में दुश्मन, रात में पिया में विजुअल स्टोरीटेलिंग बहुत मजबूत है। नीले सूट वाले ने जब सीढ़ियां चढ़ीं, तो लगा जैसे वो अपनी किस्मत बदलने जा रहा हो। उन दोनों के बीच की दूरी कम हो रही थी। पल पल नया ट्विस्ट है। देखने में मज़ा आया।
आखिर में जब वो दोनों आमने सामने आए, तो स्क्रीन पर जादू था। दिन में दुश्मन, रात में पिया का ये क्लाइमेक्स बहुत दमदार था। उसने शर्म से मुंह ढका और वो बस उसे देखता रहा। शब्दों की जरूरत नहीं थी, बस नजरें काफी थीं। ऐसे रोमांटिक ड्रामे देखकर ही सुकून मिलता है। बहुत पसंद आया। सबको देखना चाहिए।