इस दृश्य में भावनाओं का ऐसा भंवर है कि देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। सीढ़ियों पर वह मिलन और फिर फोन की घंटी ने सब बदल दिया। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम है। उसकी आंखों में आंसू और गुस्सा दोनों साफ दिख रहे थे। जब उसने फोन उठाया तो लग रहा था कि कोई बड़ा राज खुलने वाला है। बिस्तर पर बैठे उसका चेहरा पीला पड़ गया। ऐसा लगता है कि रात अभी बहुत लंबी होने वाली है और राज बाहर आने वाले हैं। बहुत ही तनावपूर्ण माहौल बनाया है निर्देशक ने।
सीढ़ियों पर खड़े होकर उसने जो किया, वह साहस था या मजबूरी। दिन में दुश्मन, रात में पिया में हर पल नया रहस्य पैदा करता है। उस युवक की आंखों में नमी थी और युवती के चेहरे पर हैरानी। फोन की कॉल ने सब कुछ रोक दिया। क्या वह रिश्ता टूटने वाला है या और गहरा होगा। बिस्तर पर लेटी हुई उसकी घबराहट साफ झलक रही थी। निर्देशक ने कैमरा कोण का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया है। दर्शक बस यही जानना चाहते हैं कि आगे क्या होगा इस कहानी में।
रात के समय फोन की घंटी बजना किसी डरावने सपने से कम नहीं लगता। दिन में दुश्मन, रात में पिया का यह कड़ी दिल की धड़कनें बढ़ा देती है। उस युवक ने फोन दिखाकर सब साफ कर दिया पर फिर भी शक बाकी है। युवती की चुप्पी सब कुछ कह रही थी। बिस्तर पर बैठकर उसने जब फोन उठाया तो माहौल गंभीर हो गया। क्या वह सच सामने आएगा या फिर छुपा रहेगा। अभिनय इतना असली लगा कि मैं भी घबरा गई। हर सीन में एक नया मोड़ छुपा है इस धारावाहिक में।
प्यार और नफरत की इस लकीर को पार करना कितना मुश्किल है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में यही तो असली कहानी है। सीढ़ियों पर वह पल जब वह मिले, सब कुछ भूल गए। पर दुनिया की जिम्मेदारियां बीच में आ गईं। फोन की स्क्रीन पर कई मिस कॉल थे जो मुसीबत की निशानी थे। उस युवक का चेहरा उतर गया था। युवती ने जब देखा तो उसे यकीन नहीं हुआ। आगे की कहानी में क्या होने वाला है यह जानना जरूरी है सबके लिए।
सफेद कपड़ों में वह युवती बहुत खूबसूरत लग रही थी पर आंखों में गम था। दिन में दुश्मन, रात में पिया की यह झलक यादगार बन गई। उस युवक ने गले लगाकर सब सुलझाने की कोशिश की। पर फोन ने फिर से दूरी बना दी। रात के अंधेरे में फोन की रोशनी ने सब बदल दिया। बिस्तर पर लेटी वह अकेली महसूस कर रही थी। क्या वह उसे माफ कर पाएगी या नहीं। यह सवाल हर दर्शक के मन में है इस वक्त।
भावनाओं का यह खेल कब तक चलता रहेगा। दिन में दुश्मन, रात में पिया में हर मोड़ पर धोखा लगता है। सीढ़ियों पर खड़े होकर उसने जो वादा किया, वह टूटता हुआ दिख रहा है। फोन की घंटी ने उस पल को तोड़ दिया। उस युवक की आवाज में कंपन था। युवती की सांसें तेज हो गई थीं। बिस्तर पर बैठे उसका चेहरा उदास था। कहानी में अब तक का सबसे बड़ा मोड़ आने वाला है। मैं बस देखती रह गई इस हालत में।
कितनी अजीब स्थिति है जब प्यार करने वाले ही दुश्मन बन जाएं। दिन में दुश्मन, रात में पिया का यह किरदार बहुत जटिल है। उस युवक ने फोन उठाकर सच बताने की ठानी। पर युवती के चेहरे पर डर साफ था। सीढ़ियों का वह दृश्य बहुत ही प्रेम भरा था पर अंत दुखद हुआ। रात में जब फोन बजा तो नींद उड़ गई। क्या वह रिश्ता बच पाएगा या टूट जाएगा। हर पल नया संघर्ष दिखाया गया है इस श्रृंखला में।
आंखों से आंसू गिरना और फिर गुस्से में फोन फेंकना। दिन में दुश्मन, रात में पिया में जज्बात की कमी नहीं है। उस युवक ने सब कुछ छुपाने की कोशिश की पर सच बाहर आ गया। युवती ने जब स्क्रीन देखी तो उसे झटका लगा। बिस्तर पर लेटी हुई वह सोच में पड़ गई। क्या वह उस पर भरोसा कर सकती है। माहौल में इतना तनाव था कि सांस लेना मुश्किल हो रहा था। बहुत ही बेहतरीन कहानी कही गई है यहां पर।
रात के सन्नाटे में फोन की आवाज गूंज रही थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया की यह कड़ी बहुत अहम साबित होगी। उस युवक ने सीढ़ियों पर उसे छोड़ दिया और चला गया। युवती वहीं खड़ी रह गई जैसे समय थम गया हो। बिस्तर पर जब उसने फोन देखा तो नाम देखकर घबरा गई। क्या वह शख्स फिर से परेशानी खड़ी करेगा। कहानी में अब तेजी आएगी। दर्शक बस यही चाहते हैं कि सच जल्दी सामने आए इस कड़ी में।
प्यार की इस कहानी में दर्द भी उतना ही है। दिन में दुश्मन, रात में पिया ने सबका दिल जीत लिया है। उस युवक की मजबूरी साफ झलक रही थी। युवती की खामोशी सबसे बड़ा शोर थी। फोन की कॉल ने सब कुछ बदल दिया। सीढ़ियों से लेकर बिस्तर तक का सफर बहुत भावुक था। क्या अंत अच्छा होगा या बुरा। यह जानने के लिए सब बेताब हैं। हर सीन में नई उम्मीद और नया डर है इस धारावाहिक में।