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दिन में दुश्मन, रात में पियावां62एपिसोड

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दिन में दुश्मन, रात में पिया

पाँच साल पहले, नायिका एक रात का साथ देने के बाद बिना बताए चली गई। पाँच साल बाद, नायक ने जाल बिछाकर उसे वापस देश बुलाया और तीन साल के अनुबंध विवाह पर हस्ताक्षर करने को मजबूर कर दिया। इस बदला-भरे अनुबंध विवाह में, दिन में वह कड़े शब्द कहता, रात में वो अपनी पत्नी को शरमाते हुए दिल की धड़कनें बढ़ा देता। वह अपने राज़ और कर्ज़ छुपाए बैठी थी, उसे हर तरह से परेशान करने देती थी... गहरा प्यार अब जुनून बन चुका था। इस बार, वह उसे कभी नहीं जाने देगा।
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इस एपिसोड की समीक्षा

हाथ थामे चलते हुए भी दूरियां

इस दृश्य में काली शर्ट वाले शख्स और सफेद पोशाक वाली लड़की के बीच का तनाव साफ दिख रहा है। शुरू में हाथ पकड़कर चलना एक नाटक लगता है, लेकिन जब ग्रे सूट वाली आती है, तो सब बदल जाता है। दिन में दुश्मन, रात में पिया वाली कहानी में ऐसा मोड़ दिल तोड़ने वाला होता है। सफेद पोशाक वाली की आंखों में आंसू और बेचैनी साफ झलक रही थी, जो किसी भी दर्शक को रुला सकती है।

सास की चुप्पी सब कह रही थी

बड़ी उम्र वाली की चुप्पी इस पूरे नाटक का सबसे बड़ा हिस्सा लग रही थी। वह सब देख रही थीं लेकिन कुछ बोलीं नहीं। शायद उन्हें पहले से पता था कि काली शर्ट वाला शख्स किस तरफ जाएगा। दिन में दुश्मन, रात में पिया जैसे कार्यक्रम में परिवार की मंजूरी बहुत मायने रखती है। ग्रे सूट वाली की जीत साफ दिख रही थी जब उसने बांह थाम ली और उसे लेकर चल दी।

धोखे का नया चेहरा

ग्रे सूट वाली की एंट्री ने सब कुछ पलट दिया। उसकी मुस्कान में एक अजीब सी चालाकी थी जो छिपी नहीं रही। काली शर्ट वाले शख्स का उसके साथ चले जाना सफेद पोशाक वाली लड़की के लिए झटका था। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी में भरोसा टूटना सबसे दर्दनाक होता है। कैमरा एंगल ने उस अकेलेपन को बहुत खूबसूरती से कैद किया था जब वह वहीं खड़ी रह गई।

आंखों में छुपा दर्द

सफेद पोशाक वाली लड़की के चेहरे के भाव देखकर लग रहा था कि वह कुछ बोलना चाहती है पर चुप रही। उसकी आंखों में जो नमी थी, वह हजार शब्दों से ज्यादा भारी थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया जैसे नाटक में यही भावनात्मक पल सबसे ज्यादा याद रहते हैं। काली शर्ट वाले शख्स ने पीछे मुड़कर नहीं देखा, यह उसकी सबसे बड़ी गलती थी जो उसे बाद में पछताएगी।

कॉरिडोर में खत्म हुआ रिश्ता

जब वे दोनों कॉरिडोर में चलते हुए दिखाई दिए, तो लगा कि रास्ता सिर्फ उन दोनों का है। सफेद पोशाक वाली लड़की बीच में अटक गई और देखती रह गई। दिन में दुश्मन, रात में पिया की पटकथा में ऐसे मोड़ बहुत आते हैं जहां इंसान अचानक अकेला रह जाता है। फर्श की चमक और उनकी परछाइयों ने इस दृश्य को और भी गहरा बना दिया था जो बहुत प्रभावशाली था।

चुप्पी का शोर

इस सीन में डायलॉग से ज्यादा खामोशी शोर मचा रही थी। काली शर्ट वाले शख्स की हिचकिचाहट साफ दिख रही थी, फिर भी वह चला गया। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे किरदार अक्सर उलझन में रहते हैं जो गलत फैसले लेते हैं। ग्रे सूट वाली ने बहुत चालाकी से मौका फायदा उठाया। सफेद पोशाक वाली बेचारी देखती रह गई और कुछ कर सकी।

वादा टूटने की आवाज

हाथ पकड़ना एक वादा था, और उसे छोड़ देना धोखा। काली शर्ट वाले शख्स ने बिना कुछ कहे रास्ता बदल लिया। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी में वफादारी की परीक्षा होती रहती है। सफेद पोशाक वाली लड़की का स्टैंड वहां बहुत कमजोर पड़ गया। ग्रे सूट वाली की जीत बहुत आसान लग रही थी इस सीन में जो नापसंद आई।

तीसरे इंसान की एंट्री

जैसे ही ग्रे सूट वाली आई, माहौल बदल गया। उसने सीधे काली शर्ट वाले शख्स का साथ दिया और उसे ले गई। सफेद पोशाक वाली लड़की के चेहरे पर निराशा साफ थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया जैसे कार्यक्रम में तीसरा शख्स हमेशा मुसीबत लाता है। यह दृश्य बहुत ही तेजी से आगे बढ़ा और दर्शकों को हैरान कर दिया पूरी तरह से।

पीछे छूट गई यादें

जब वे दोनों चलते गए, तो सफेद पोशाक वाली लड़की वहीं खड़ी रह गई। ऐसा लगा जैसे उसकी सारी यादें वहीं रुक गई हों। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे बिछड़ने के दृश्य बहुत दर्दनाक होते हैं। काली शर्ट वाले शख्स का व्यवहार बहुत रूखा था। बड़ी उम्र वाली ने भी कुछ नहीं कहा, शायद वह राजी थीं इस फैसले से।

कहानी का असली मोड़

यह दृश्य पूरी कहानी का अहम मोड़ लग रहा है। ग्रे सूट वाली की मुस्कान और काली शर्ट वाले शख्स का जाना सब कुछ बता रहा था। दिन में दुश्मन, रात में पिया की पटकथा बहुत दिलचस्प होती जा रही है। सफेद पोशाक वाली लड़की अब क्या करेगी, यह देखना बाकी है। अभिनय बहुत नेचुरल लगा सभी का।