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दिन में दुश्मन, रात में पियावां5एपिसोड

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दिन में दुश्मन, रात में पिया

पाँच साल पहले, नायिका एक रात का साथ देने के बाद बिना बताए चली गई। पाँच साल बाद, नायक ने जाल बिछाकर उसे वापस देश बुलाया और तीन साल के अनुबंध विवाह पर हस्ताक्षर करने को मजबूर कर दिया। इस बदला-भरे अनुबंध विवाह में, दिन में वह कड़े शब्द कहता, रात में वो अपनी पत्नी को शरमाते हुए दिल की धड़कनें बढ़ा देता। वह अपने राज़ और कर्ज़ छुपाए बैठी थी, उसे हर तरह से परेशान करने देती थी... गहरा प्यार अब जुनून बन चुका था। इस बार, वह उसे कभी नहीं जाने देगा।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सूटकेस और आंसू

जब वह सूटकेस लेकर घर में दाखिल हुआ, तो हवा में ठंडक थी। उसकी आंखों में दर्द साफ दिख रहा था। क्या प्यार हमेशा ऐसा ही होता है? दिन में दुश्मन, रात में पिया वाली कहानी सच में दिल को छू लेती है। वह चुपचाप खड़ा था, जैसे कुछ कहना चाहता हो पर कह न पा रहा हो। यह खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी।

यादों का साया

पुरानी यादों में उनकी हंसी और आज का सन्नाटा। कितना बदल गया सब कुछ। नाच वाला पल देखकर लगता था सब ठीक है, पर असलियत कुछ और ही थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया ने दिखाया कैसे रिश्ते धीरे धीरे टूटते हैं। कमरे में वह अकेली खड़ी थी, जैसे कोई पुरानी याद उसे खा रही हो। बहुत भावुक है यह दृश्य।

खामोश चीखें

बिना कुछ बोले ही सब कुछ कह दिया गया है। उसकी नज़रें बता रही थीं कि वह जाना नहीं चाहती। पर मजबूरी क्या है, यह कोई नहीं जानता। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी बहुत गहरी है। जब वह बिना कमीज के था यादों में, तब सब कुछ अलग था। अब सब कुछ राख जैसा लग रहा है। काश वे बात कर पाते।

टूटे हुए सपने

बैठक कक्ष का वो विस्तृत दृश्य कितना उदास था। बड़ा घर पर सूनापन। वह सूटकेस के साथ खड़ी थी जैसे किसी इंतज़ार में हो। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे दृश्य बार बार दिमाग में आते हैं। उसने पीछे मुड़कर देखा भी नहीं, शायद डर था कि आंसू रुक नहीं पाएंगे। अभिनय बहुत स्वाभाविक लग रहा था।

पंख और आंसू

पलंग पर पंख उड़ रहे थे और वो पल कितना खूबसूरत था। पर अब वही कमरा कब्र जैसा लग रहा है। दिन में दुश्मन, रात में पिया ने प्रेम और दर्द का अच्छा मिश्रण दिखाया। वह दरवाजे पर खड़ी थी, जैसे भूत और वर्तमान के बीच फंसी हो। कोई संवाद नहीं बस चेहरे के भाव सब बता रहे हैं। उत्कृष्ट दृश्य है।

दूरियां बढ़ रही हैं

वह आगे बढ़ रहा था और वह पीछे रह गई। यह दूरी सिर्फ शारीरिक नहीं, दिल की भी है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में यह लगाव बहुत गहरा लगता है। सीढ़ियों वाला दृश्य दिखाता है कैसे वे अलग रास्तों पर जा रहे हैं। रोशनी भी माहौल के हिसाब से बहुत सही थी। ठंडी रोशनी ने उदासी बढ़ा दी।

अधूरी कहानी

कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, बस एक पड़ाव आ गया है। उसकी आंखों में सवाल थे और उसके चेहरे पर जवाब नहीं। दिन में दुश्मन, रात में पिया देखकर लगता है प्यार कितना नाजुक होता है। वह कोट पहने था, तैयार था शायद किसी सभा के लिए, पर दिल कहीं और था। यह अंतर बहुत अच्छा लगा।

यादों का वार

अचानक से पुरानी यादें ताजा हो गईं। जब वह कमरे में घुसी तो हवा में वही खुशबू थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया की हर कड़ी नया मोड़ लाती है। पलंग वाले दृश्य में जो नज़दीकियां थीं, अब वहां सिर्फ खामोशी है। वह दीवार को देख रही थी जैसे कोई जवाब ढूंढ रही हो। दर्शक भी बस देखते रह जाते हैं।

रिश्तों की डोर

कितनी पतली होती है यह डोरी। एक झटके में सब टूट सकता है। उसने सूटकेस का हत्था कसकर पकड़ा था, जैसे यही एक सहारा हो। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे दृश्य दिल पर चोट करते हैं। वह चुपचाप पीछे खड़ा था, शायद उसे रोकना चाहता था पर रुका। यह हिचकिचाहट सब कुछ बताती है।

अंत या शुरुआत

यह अंत है या किसी नई शुरुआत का संकेत? कुछ भी हो, यह पल हमेशा याद रहेगा। दिन में दुश्मन, रात में पिया ने साबित किया कि खामोशी सबसे बड़ा शोर है। वह कमरे से बाहर गई और वह वहीं खड़ा रह गया। पर्दा काला हो गया पर असर बना रहा। बहुत ही खूबसूरत तरीके से दर्द दिखाया गया है।