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दिन में दुश्मन, रात में पियावां9एपिसोड

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दिन में दुश्मन, रात में पिया

पाँच साल पहले, नायिका एक रात का साथ देने के बाद बिना बताए चली गई। पाँच साल बाद, नायक ने जाल बिछाकर उसे वापस देश बुलाया और तीन साल के अनुबंध विवाह पर हस्ताक्षर करने को मजबूर कर दिया। इस बदला-भरे अनुबंध विवाह में, दिन में वह कड़े शब्द कहता, रात में वो अपनी पत्नी को शरमाते हुए दिल की धड़कनें बढ़ा देता। वह अपने राज़ और कर्ज़ छुपाए बैठी थी, उसे हर तरह से परेशान करने देती थी... गहरा प्यार अब जुनून बन चुका था। इस बार, वह उसे कभी नहीं जाने देगा।
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इस एपिसोड की समीक्षा

नाश्ते की खामोशी

सुबह के नाश्ते का माहौल बहुत तनावपूर्ण लग रहा था। पति और पत्नी के बीच की खामोशी चीख रही थी। फिर कार्यालय के दृश्य में सत्ता का संतुलन बदल गया। दिन में दुश्मन, रात में पिया वाली कहानी में ऐसा मोड़ उम्मीद नहीं था। नेटशॉर्ट प्लेटफॉर्म पर देखने का अनुभव काफी अच्छा रहा है।

हॉल में तनाव

वो किरदार जब हॉल में आई, तो सबकी नज़रें उस पर थीं। बैंगनी पोशाक वाली दुश्मन बहुत अमीर लग रही थी। मुख्य किरदार की आंखों में डर साफ दिख रहा था। दिन में दुश्मन, रात में पिया सीरीज की हर कड़ी रहस्य से भरी है। काश ये कहानी जल्दी आगे बढ़े।

पैसे का खेल

कार्यालय का दृश्य बहुत प्रोफेशनल लगा। मालिक ने मोबाइल चेक किया तो बैंक संदेश आए। पैसे का खेल शुरू हो गया है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में कॉर्पोरेट युद्ध दिलचस्प है। अभिनय स्वाभाविक है और सेट सजावट भी बहुत लग्जरी लग रही है।

रिश्तों की गांठ

नाश्ते वाली मेज पर जो खामोशी थी, वो किसी शोर से कम नहीं थी। पति ने बिना कुछ कहे कमरा छोड़ दिया। पत्नी अकेली रह गई। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी रिश्तों की जटिलताओं को दिखाती है। मुझे ये नाटक बहुत पसंद आ रहा है।

ये शियाओ का घमंड

ये शियाओ का प्रवेश बहुत धमाकेदार था। उसकी चाल में घमंड साफ झलक रहा था। सामने वाली किरदार चुपचाप सब सह रही थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया में किरदारों के बीच की दुश्मनी साफ दिखती है। नेटशॉर्ट पर ऐसे कार्यक्रम देखना मज़ा देता है।

नायक की योजना

काले सूट में नायक बहुत सुंदर लग रहा था। सहायक के साथ बातचीत से लगता है वो कोई बड़ा योजना बना रहे हैं। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी की बुनावट बहुत स्मार्ट है। हर दृश्य के बाद नया सवाल खड़ा हो जाता है दर्शकों के लिए।

हॉल का रहस्य

हॉल का माहौल बहुत शांत लेकिन तनावपूर्ण था। स्वागतकर्मी भी कुछ अजीब लग रही थी। जब वो दोनों आमने सामने आईं, तो हवा में करंट सा दौड़ गया। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे रोमांचक अंत बहुत अच्छे लगते हैं। दर्शक बंधे रहते हैं।

धोखे का शक

बैंक संदेश देखकर नायक के चेहरे के भाव बदल गए। शायद उसे किसी धोखे का शक हुआ है। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी में पैसों का खेल अहम है। मुझे ये पहेली सुलझाने में बहुत मज़ा आ रहा है। जल्दी अगली कड़ी आए।

मासूमियत का चेहरा

सफेद कपड़ों वाली किरदार बहुत मासूम लग रही थी। उसकी आंखों में उदासी साफ दिख रही थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया में भावनात्मक नाटक बहुत गहरा है। नेटशॉर्ट एप्लिकेशन की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी है, दृश्य साफ दिखता है।

असली लड़ाई

अंत में जब वो दोनों मिलीं, तो लग रहा था कि अब असली लड़ाई शुरू होगी। दिन में दुश्मन, रात में पिया का नाम ही इसकी कहानी बता रहा है। मुझे ये कार्यक्रम बहुत पसंद आया है और मैं इसे अपने दोस्तों को भी सुझाव दूंगी।