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दिन में दुश्मन, रात में पियावां67एपिसोड

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दिन में दुश्मन, रात में पिया

पाँच साल पहले, नायिका एक रात का साथ देने के बाद बिना बताए चली गई। पाँच साल बाद, नायक ने जाल बिछाकर उसे वापस देश बुलाया और तीन साल के अनुबंध विवाह पर हस्ताक्षर करने को मजबूर कर दिया। इस बदला-भरे अनुबंध विवाह में, दिन में वह कड़े शब्द कहता, रात में वो अपनी पत्नी को शरमाते हुए दिल की धड़कनें बढ़ा देता। वह अपने राज़ और कर्ज़ छुपाए बैठी थी, उसे हर तरह से परेशान करने देती थी... गहरा प्यार अब जुनून बन चुका था। इस बार, वह उसे कभी नहीं जाने देगा।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सासू माँ का गुस्सा

इस दृश्य में तनाव साफ़ दिख रहा है। सासू माँ की नाराजगी और बहू की आँसू देखकर दिल दुखी हो गया। नेटशॉर्ट ऐप पर यह दृश्य देखकर लगा कि कहानी में बहुत गहराई है। दिन में दुश्मन, रात में पिया नाटक की यह झलक वाकई भावनात्मक है। पात्रों के चेहरे के भाव बहुत अच्छे हैं।

आँसू और चीखें

सफेद पोशाक वाली लड़की की मासूमियत देखते ही बनती है। उसे क्यों डांटा जा रहा है? यह सवाल हर दर्शक के मन में आएगा। दिन में दुश्मन, रात में पिया कार्यक्रम में ऐसे मोड़ आते हैं जो बांधे रखते हैं। नारंगी पोशाक वाली महिला भी सहायता में खड़ी है। अभिनय लाजवाब है।

परिवार का कलह

काले कपड़े वाले युवक की चुप्पी सब कुछ कह रही है। वह क्यों नहीं बोल रहा? शायद वह अपनी माँ का सम्मान कर रहा है। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी में यह संघर्ष बहुत तेज है। मुझे नेटशॉर्ट पर यह श्रृंखला बहुत पसंद आ रही है। हर कड़ी नया मोड़ लाती है।

लाठी और आंसू

बूढ़ी महिला के हाथ में लाठी और गुस्सा देखकर डर लग रहा है। क्या सच में इतनी बड़ी गलती हो गई? दिन में दुश्मन, रात में पिया में रिश्तों की यह खटास दिल को छू लेती है। अभिनेत्रियों की आँखों में दर्द साफ़ झलक रहा है। बहुत ही दमदार दृश्य है यह।

चुप्पी का शोर

कमरे में सन्नाटा है लेकिन शोर बहुत है। सबकी आँखें बातें कर रही हैं। यह नाटक देखकर लगता है कि हमारे घर की कहानी है। दिन में दुश्मन, रात में पिया जैसे कार्यक्रम हमें रिश्तों की अहमियत समझाते हैं। नेटशॉर्ट ऐप का रूप भी बहुत अच्छा है।

सास बहू का झगड़ा

पुराने जमाने की सास और नई सोच वाली बहू का विवाद। हरी साड़ी वाली महिला बहुत सख्त लग रही हैं। दिन में दुश्मन, रात में पिया में यह टकराव बहुत देखने लायक है। सफेद पट्टी वाली लड़की रो रही है, उसे देखकर बुरा लगा। कहानी आगे क्या होगी?

भावनाओं का खेल

हर चेहरे पर अलग भावना है। गुस्सा, दुख, चिंता सब एक साथ। दिन में दुश्मन, रात में पिया की यह झलक बहुत गहरी है। मुझे लगता है कि यह गलतफहमी जल्द दूर होगी। नेटशॉर्ट पर ऐसी सामग्री देखना सुकून देता है। कलाकारों को सलाम। यह वीडियो बहुत प्रभावशाली है।

रिश्तों की डोर

क्या प्यार इस नफरत को जीत पाएगा? यह सवाल बना हुआ है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में यही तो देखने को मिलता है। परिवार के बंधन टूटते और जुड़ते हैं। यह दृश्य देखकर मैं भी भावुक हो गया। बहुत ही खूबसूरत तरीके से फिल्माया गया है।

सच्चाई का सामना

सच सामने आने में वक्त लगता है। इस वीडियो में वही दिख रहा है। दिन में दुश्मन, रात में पिया के किरदार बहुत असली लगते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर मैंने कई कार्यक्रम देखे हैं पर यह सबसे अलग है। संवाद और भाव उत्कृष्ट हैं। मुझे यह कहानी बहुत पसंद है।

अंत क्या होगा

यह दृश्य देखकर जानना जरूरी हो गया कि आगे क्या हुआ। दिन में दुश्मन, रात में पिया का अगली कड़ी कब आएगा? इंतजार नहीं हो रहा। सभी कलाकारों ने जान डाल दी है। ऐसे ही अच्छे कार्यक्रम बनाते रहो। दर्शकों को पसंद आ रहा है।