काली पोशाक वाली महिला की आंखों में छिपा दर्द साफ दिख रहा था। जब युवक ने वह सफेद कटोरा निकाला, तो सबकी सांसें रुक गईं। लाल कुरता वाले बुजुर्ग के चेहरे पर मुस्कान देखकर लगा कि उपहार सही चुना गया। दिन में दुश्मन, रात में पिया जैसे इस नाटक में हर पल नया मोड़ लेता है। नीले सूट वाले व्यक्ति का गुस्सा देखकर डर लग रहा था कि कहीं बड़ा हादसा न हो जाए। सबकी नजरें उसी तोहफे पर टिकी हुई थीं। कोई हिल नहीं रहा था।
बेज रंग की पोशाक पहनी महिला पर थप्पड़ पड़ते ही सन्नाटा छा गया। यह दृश्य दिल दहला देने वाला था। युवक ने अपनी सूझबूझ से स्थिति संभाल ली। दादाजी को तोहफा देकर उसने सबका दिल जीत लिया। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी में ऐसा लगता है कि हर रिश्ते में एक छिपा राज है। महत्वपूर्ण मेहमानों के बीच यह नाटक देखना रोमांचक था। सब हैरान थे।
नीले सूट वाले शख्स ने जब फूलदान को ध्यान से देखा, तो लगा कोई बड़ी गड़बड़ है। लेकिन काले सूट वाले युवक ने खेल पलट दिया। उसकी शांति और समझदारी कायल कर देने वाली थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे ही मोड़ देखने को मिलते हैं। बुजुर्ग की खुशी देखकर लगा कि सब ठीक हो जाएगा। माहौल में तनाव था पर अंत अच्छा हुआ। सभी लोग हैरान थे। कोई बोल नहीं रहा था।
जन्मदिन की पार्टी में ऐसा हंगामा किसी ने नहीं सोचा था। काली पोशाक वाली लड़की बहुत सुंदर लग रही थी पर परेशान भी दिखी। युवक का उसके प्रति व्यवहार बहुत सम्मानजनक था। दिन में दुश्मन, रात में पिया के इस कड़ी में भावनाओं का खेल देखने को मिला। लाल कपड़ों वाले दादाजी का आशीर्वाद सबके लिए जरूरी था। हर कोई इस नाटक का हिस्सा बनना चाहता था। सब देख रहे थे।
सफेद कटोरे वाले तोहफे ने सबका ध्यान खींच लिया। यह साधारण नहीं लग रहा था। युवक ने बहुत सोच समझकर यह चुना होगा। दिन में दुश्मन, रात में पिया की पटकथा बहुत मजबूत है। बेज पोशाक वाली महिला की हालत देखकर तरस आया। नीले सूट वाले का गुस्सा जायज था या नहीं, यह तो आगे पता चलेगा। पर इस वक्त सब हैरान थे। कोई कुछ बोल नहीं रहा था। सन्नाटा था।
हॉल की सजावट बहुत शानदार थी पर नजरें तो बस इन लोगों पर थीं। काले जोड़े वाली जोड़ी सबसे अलग लग रही थी। उनकी चुप्पी में भी शोर था। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे दृश्य बार बार देखने को मिलते हैं। बुजुर्ग के हाथ में वाइन ग्लास और चेहरे पर संतोष था। लगता है इस पार्टी का मकसद सिर्फ जश्न नहीं था। कुछ और ही चल रहा था। सबको शक था।
जब नीले सूट वाले ने हाथ उठाया, तो लगा अब बड़ा झगड़ा होगा। पर युवक ने बीच में आकर सब संभाल लिया। उसकी हिम्मत की दाद देनी होगी। दिन में दुश्मन, रात में पिया के किरदार बहुत गहरे हैं। काली पोशाक वाली महिला की राहत साफ दिख रही थी। यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। दर्शक बंधे हुए हैं। सब देखना चाहते हैं।
उपहार देने का यह तरीका बहुत अनोखा था। सबने सोचा होगा कोई गहना होगा, पर यह बर्तन था। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे ही आश्चर्य मिलते हैं। लाल कुरता वाले बुजुर्ग की खुशी देखकर लगा कि यही असली तोहफा था। बाकी लोग बस तमाशबीन बनकर रह गए। इस नाटक की पकड़ दर्शकों पर बहुत मजबूत है। सब देख रहे थे। कोई हिल नहीं रहा था।
बेज पोशाक वाली महिला की आंखों में आंसू देखकर बुरा लगा। शायद उसकी गलती थी या कोई साजिश। दिन में दुश्मन, रात में पिया में हर किरदार का अपना मकसद है। काले सूट वाले युवक ने अपनी जगह बना ली। नीले सूट वाले का रवैया थोड़ा सख्त जरूर था। पर अंत में सबके चेहरे पर मुस्कान थी। खुशियां लौट आईं। सब खुश थे। माहौल बदल गया।
इस पार्टी का माहौल शुरू में बहुत तनावपूर्ण था। पर धीरे धीरे सब सामान्य हुआ। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी में उतार चढ़ाव बहुत हैं। काली पोशाक वाली महिला की मुस्कान अंत में सब बता रही थी। युवक का साथ उसे ताकत दे रहा था। ऐसे नाटक देखना सच में सुकून देता है। नेटशॉर्ट पर यह श्रृंखला जरूर देखनी चाहिए। मजा आ गया। सबको पसंद आया।