पियानो वाला सीन बहुत गहरा था। दोनों के बीच की खामोशी सब कुछ कह रही थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसा लगता है कि रिश्ते की शुरुआत मजबूरी में हुई है। आंखों में आंसू और दिल में गुस्सा साफ दिख रहा था। काश ये जोड़ी असल जिंदगी में भी इतनी सुंदर लगे। संगीत और माहौल ने इसे और भी खास बना दिया है। देखने वाले का दिल जरूर पसीज जाएगा। हर पल में एक नया दर्द छिपा है। माहौल में एक अजीब सी गंभीरता थी।
ऑफिस वाले सीन में वीजा या शादी का रजिस्ट्रेशन लग रहा था। नायिका की सफेद साड़ी बहुत प्यारी थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी में ये मोड़ बहुत जरूरी था। बिना किसी खुशी के चेहरे पर सिर्फ जिम्मेदारी थी। देखने वाला भी सोच में पड़ जाता है कि आगे क्या होगा। कागजात पर दस्तखत करते वक्त जो घबराहट थी वो लाजवाब थी। कमरे की रोशनी भी फीकी लग रही थी। दीवारें भी चुप थीं।
कार वाले सीन में दोनों की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। लाल रंग की किताब देखकर लगता है कि अब ये बंधन पक्का हो गया है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में भावनाओं का ये खेल कमाल का है। नायिका की आंखों में डर और नायक की आंखों में ठंडक साफ झलक रही थी। सफर अभी शुरू हुआ है और रास्तें कठिन लग रहे हैं। खिड़की से बाहर का नज़ारा भी उदास था। हवाएं भी रुकी हुई थीं।
शुरू में चांदी जैसे कपड़े में वह बहुत खूबसूरत लग रही थी। फिर सफेद पोशाक में बदलाव ने कहानी को नया रंग दिया। दिन में दुश्मन, रात में पिया के हर फ्रेम में एक अलग कहानी छिपी है। सिनेमेटोग्राफी इतनी साफ है कि हर भावना पढ़ी जा सकती है। बिल्कुल जादू जैसा अनुभव हुआ। रोशनी का इस्तेमाल बहुत कलात्मक था। पृष्ठभूमि भी शानदार थी। हर कोना बोल रहा था।
दस्तखत करते वक्त हाथ कांप रहे थे या बस एक्टिंग बहुत बेहतरीन थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे छोटे विवरण बहुत मायने रखते हैं। मुहर लगते ही जैसे किस्मत बदल गई हो। ऑफिस का माहौल भी बहुत गंभीर था। देखकर लगा कि ये कोई आम शादी नहीं है। कानूनी बंधन ने सब कुछ बदल दिया है। मेज पर रखा स्टैम्प भी गवाह बना। कागजों की सरसराहट सुनाई दी।
पियानो के पास खड़े होकर बात करना बहुत फिल्मी लगा। रोशनी और परछाइयों का खेल कमाल का था। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ड्रामा और इश्क का सही मिश्रण है। नायक का काला सूट और नायिका की चमकदार ड्रेस एक दूसरे के विपरीत लग रहे थे। बिल्कुल जल और आग जैसा। संवाद कम थे पर असर गहरा था। संगीत ने जान डाल दी। सांसों की आवाज भी तेज थी।
कार के पिछले सीट पर बैठे दोनों के बीच की दूरी मापने लायक थी। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी अब नए मोड़ पर है। लाल रंग का दस्तावेज हाथ में लेकर वह क्या सोच रही थी। चेहरे के भाव बता रहे थे कि ये अंत नहीं बस शुरुआत है। बहुत उत्सुकता हो रही है। अगला एपिसोड कब आएगा। सड़कें लंबी लग रही थीं। इंजन की आवाज भी धीमी थी।
आंखों के इशारों से पूरी कहानी कह दी गई है। डायलॉग कम थे पर असर ज्यादा था। दिन में दुश्मन, रात में पिया में अभिनय बहुत प्राकृतिक लगा। ऑफिस में बैठक के दौरान जो तनाव था वह हवा में तैर रहा था। ऐसे शो देखकर ही दिन बनता है। बिल्कुल लाजवाब प्रस्तुति। हर पल को जीया जा सकता है। कैमरा एंगल भी सही थे। फोकस बहुत तीक्ष्ण था।
सफेद कपड़ों में वह किसी देवी जैसी लग रही थी, पर दिल उदास था। दिन में दुश्मन, रात में पिया में हर किरदार की गहराई है। रजिस्ट्रेशन के बाद भी खुशी नहीं थी, बस एक बोझ सा लग रहा था। कहानीकार ने बहुत बारीकी से ये पल कैद किए हैं। दिल को छू लेने वाला सीन था। संगीत भी बहुत मधुर था। हवाएं भी रुकी हुई थीं। समय थम सा गया था।
अंत में कार में बैठे दोनों का सफर किस तरफ जाएगा। दिन में दुश्मन, रात में पिया ने फिर से साबित कर दिया कि वो सबसे बेहतरीन हैं। हर एपिसोड के बाद नया सवाल खड़ा हो जाता है। अब तो बस अगला भाग देखने की बेचैनी है। ऐसे शो ही असली मनोरंजन हैं। बिल्कुल फिट बैठता है। कहानी में दम है। निर्देशन शानदार है। कलाकारों ने जान डाल दी।