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दिन में दुश्मन, रात में पियावां69एपिसोड

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दिन में दुश्मन, रात में पिया

पाँच साल पहले, नायिका एक रात का साथ देने के बाद बिना बताए चली गई। पाँच साल बाद, नायक ने जाल बिछाकर उसे वापस देश बुलाया और तीन साल के अनुबंध विवाह पर हस्ताक्षर करने को मजबूर कर दिया। इस बदला-भरे अनुबंध विवाह में, दिन में वह कड़े शब्द कहता, रात में वो अपनी पत्नी को शरमाते हुए दिल की धड़कनें बढ़ा देता। वह अपने राज़ और कर्ज़ छुपाए बैठी थी, उसे हर तरह से परेशान करने देती थी... गहरा प्यार अब जुनून बन चुका था। इस बार, वह उसे कभी नहीं जाने देगा।
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इस एपिसोड की समीक्षा

रसोई का रोमांटिक नज़ारा

रसोई का वो नज़ारा देखकर दिल धक से रह गया। जब वो पीछे से आकर उसे बांहों में भर लेता है, तो हवा में रोमांस तैरने लगता है। दिन में दुश्मन, रात में पिया का ये प्रसंग सबसे बेहतरीन है। उनकी आंखों में छिपे जज़्बात साफ झलक रहे हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे दृश्य देखना एक अलग ही सुकून देता है। काश ये पल कभी रुके नहीं। हर बार देखकर नया लगता है। संगीत और रोशनी ने माहौल को और भी गहरा बना दिया है। सच में ये जोड़ी जचती है। बस यही चाहते हैं कि ये सफर लंबा चले।

फोन की घंटी और दीवानगी

फोन की घंटी बज रही थी पर दोनों को कोई फर्क नहीं पड़ा। इसी को कहते हैं दीवानगी। जब दुनिया भुला दी जाए सामने वाले के लिए, तो प्यार असली होता है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ये तनाव बहुत अच्छा लगा। काउंटर पर बैठने वाला दृश्य तो जैसे आग लगा देता है। अभिनय इतना स्वाभाविक है कि लगता है सब असली है। मैं तो बस देखती रह गई। ऐसे क्षण ही तो हम देखने आते हैं। बहुत ही खूबसूरत पल कैद किया है निर्देशक ने। सबको जरूर देखना चाहिए ये शो।

पोशाक और जैकेट का संगम

काले चमड़े का जैकेट और नीली साड़ी जैसी पोशाक का संगम कमाल का है। विपरीत ध्रुव जैसे लगते हैं पर जब मिलते हैं तो जादू हो जाता है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में उनका मेल देखते ही बनता है। गर्दन पर वो हल्का सा चुंबन रोंगटे खड़े कर देता है। नेटशॉर्ट मंच पर गुणवत्ता भी बहुत साफ है। हर बारीकी पर ध्यान दिया गया है। शृंगार से लेकर सजावट तक सब उत्तम है। मैं बार बार इसी दृश्य को दोबारा देख रही हूं। कोई थकान नहीं होती।

शक्ति संतुलन और रोमांच

जब उसे उठाकर काउंटर पर बिठाया, तो सांसें रुक गईं। ये शक्ति संतुलन बहुत तीव्र है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे रोमांच चाहिए होते हैं। नायिका की आंखों में शर्म और खुशी दोनों दिख रही थी। नायक की पकड़ में वो स्वामित्व साफ झलकता है। ये कहानी आगे क्या मोड़ लेगी ये जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। बस यही उम्मीद है कि ऐसे दृश्य और भी आएं। दर्शकों को ये ही तो चाहिए होता है। रोमांस की असली परिभाषा है ये।

परी जैसी खूबसूरती

मोतियों का हार और वो नीली चमकदार पोशाक उसे किसी परी जैसा बना रही थी। जब वो उसे छूता है तो लगता है वक्त थम गया है। दिन में दुश्मन, रात में पिया का ये रोमांटिक अंदाज़ मुझे बहुत भाया। रसोई की सादगी और उनके बीच का शोर दोनों का संतुलन सही है। नेटशॉर्ट पर दृश्य प्रसारण बहुत सहज चलता है। कोई रुकावट नहीं आई। मैं पूरी रात बस यही देखती रही। सुबह होने का पता ही नहीं चला। बहुत मज़ा आया देखने में।

जलता खाना और प्यार

खाना जल रहा था पर उन्हें परवाह नहीं थी। प्यार में इंसान सब भूल जाता है ये सच साबित हुआ। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ये छोटी बारीकी बहुत मायने रखती है। भाप उठते बर्तन और उनके बीच की गर्माहट बराबर थी। कैमरा कोण भी बहुत निकट थे जिससे हम भी उस पल का हिस्सा बन गए। ऐसा लग रहा था जैसे हम वहीं खड़े हैं। ये अनुभव अनोखा है। हर बिंब को संवारकर रखा गया है। कलाकारों को सलाम।

शीर्षक का सार्थक होना

शुरुआत में लगा शायद वो झगड़ा करेंगे पर हुआ कुछ और ही। मोड़ बहुत अच्छा लगा। दिन में दुश्मन, रात में पिया का शीर्षक सार्थक हो गया। रात होते ही दुश्मन पिया बन जाते हैं। ये बदलाव बहुत सहज दिखाया गया है। नायक की आंखों में जो नशा था वो लाजवाब था। मैं तो बस यही चाहती हूं कि ये श्रृंखला जल्दी आगे बढ़े। इंतज़ार करना मुश्किल हो रहा है। नेटशॉर्ट पर अद्यतन जल्दी आते हैं। प्रशंसक बन गई हूं मैं।

पर्दे पर मिलन की बात

पर्दे पर जो मिलन है वो असल ज़िंदगी में भी हो तो क्या बात है। दिन में दुश्मन, रात में पिया ने दिल जीत लिया है। जब वो उसके कान के पास कुछ फुसफुसाता है तो दिल में गुदगुदी होती है। आवाज़ें भी बहुत स्पष्ट हैं। ध्वनि योजना पर बहुत मेहनत की गई है। हर सांस की आवाज़ सुनाई दे रही थी। ये गहरा अनुभव है। मैंने अपने दोस्तों को भी ये शो बता दिया है। सब देख रहे हैं और पसंद कर रहे हैं। सबकी पसंद बन गया है।

दृश्य रूप से प्रभावशाली

सफेद स्कर्ट और काले जैकेट का विरोधाभास दृश्य रूप से बहुत प्रभावशाली है। दिन में दुश्मन, रात में पिया का छायांकन कमाल का है। रोशनी का खेल ऐसा था कि चेहरे के भाव साफ दिख रहे थे। जब वो मुड़ती है और उनकी नज़रें मिलती हैं, वो पल यादगार है। नेटशॉर्ट मंच की संरचना भी बहुत सरल है। बुजुर्ग लोग भी आसानी से देख सकते हैं। सामग्री की गुणवत्ता भी शीर्ष स्तर की है। बस ऐसे ही अच्छे शो लाते रहें। हम इंतज़ार करेंगे।

नाटक और गहराई

अंत में फोन का आना और फिर भी न रुकना ये दिखाता है कि वो कितने गहरे हैं। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ये नाटक जरूरी था। बाहर की दुनिया से बेखबर होकर सिर्फ एक दूसरे में खो जाना। ये दृश्य मुझे बहुत देर तक याद रहेगा। संपादन भी बहुत तेज़ और सटीक है। कहीं भी ऊब नहीं होती। हर पल में कुछ नया होता है। मैं पूर्ण मनोरंजन के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं सोच सकती। सबको देखना चाहिए। चूकना मत।