जब उसने उसकी शर्ट पहनी तो माहौल बदल गया। आंखों में जो तनाव था वह देखने लायक था। दिन में दुश्मन, रात में पिया ने इस खामोशी को बहुत खूबसूरती से दिखाया है। बिस्तर पर वह पल जब उसने उसे खींचा, दिल की धड़कन रुक गई। रोशनी और कपड़ों का रंग भी मूड के साथ मेल खा रहा था। यह दृश्य सिर्फ रोमांस नहीं, एक कहानी कह रहा था।
क्लोजेट वाला दृश्य बहुत ही इंटेन्स था। वह चुपचाप कपड़े चुन रही थी और वह उसे देख रहा था। दिन में दुश्मन, रात में पिया में केमिस्ट्री साफ झलकती है। काली शर्ट और सफेद शर्ट का कंट्रास्ट बहुत अच्छा लगा। जब वह बिस्तर पर गिरी तो लगा समय थम गया हो। ऐसी कहानियां ही असली मनोरंजन हैं।
सुबह के दुश्मन और रात के प्यार वाले किरदारों को निभाना आसान नहीं है। दिन में दुश्मन, रात में पिया ने इस द्वंद्व को बहुत बखूबी दिखाया है। उसका गुस्सा और उसका प्यार दोनों ही असली लगते हैं। बेडरूम का माहौल बहुत ही निजी और रोमांटिक था। हर भाव पर ध्यान दिया गया है।
अभिनय इतना स्वाभाविक है कि लगा हम वहां मौजूद हैं। उसने जब उसे बांहों में लिया तो पर्दे पर गर्माहट फैल गई। दिन में दुश्मन, रात में पिया की कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। संवाद कम थे लेकिन आंखों ने सब कह दिया। मुझे यह जोड़ी बहुत पसंद आ रही है। निर्देशन भी बहुत प्रशंसनीय है।
सफेद शर्ट में वह बहुत खूबसूरत लग रही थी। उसकी शर्मीली हंसी और उसकी गंभीरता का मिलन अद्भुत था। दिन में दुश्मन, रात में पिया में हर बारीकियों पर काम किया गया है। बिस्तर की चादरें और पीछे की लाइटिंग सब कुछ उत्कृष्ट था। यह दृश्य बार बार देखने लायक है।
तनाव धीरे धीरे बढ़ता गया और फिर अचानक विस्फोट हो गया। वह उसे खींचकर बिस्तर पर ले आया। दिन में दुश्मन, रात में पिया का यह प्रसंग सबसे बेहतरीन है। प्रभुत्व नहीं बराबरी का प्यार दिखाया गया है। दोनों की सहमति और चाहत साफ दिख रही थी।
कपड़ों का चयन भी कहानी का हिस्सा बन गया है। उसने उसकी शर्ट पहनकर एक संदेश दिया। दिन में दुश्मन, रात में पिया में ऐसे छोटे संकेत बहुत मिलते हैं। कमरे का सजावट आधुनिक है जो युवाओं को पसंद आएगा। यह रोमांस पारंपरिक और आधुनिक का मिश्रण है।
जब वह फोन छोड़कर उसकी तरफ देखा तो सब कुछ बदल गया। ध्यान पूरी तरह उस पर था। दिन में दुश्मन, रात में पिया ने इस मोड़ को बहुत अच्छे से पकड़ा है। बिस्तर पर लेटकर बातें करना और एक दूसरे को देखना बहुत प्यारा लगा। यह दृश्य दिल को छू गया।
रात के समय की खामोशी और उनके बीच की आवाजें सब कुछ कह रही थीं। दिन में दुश्मन, रात में पिया का माहौल बहुत ही जादुई है। वह उसके ऊपर झुका तो लगा जैसे दुनिया रुक गई हो। ऐसे दृश्य देखकर ही प्यार की परिभाषा समझ आती है। बहुत ही खूबसूरत पल थे।
अंत में जब वह उसे गले लगाकर लेटा तो सुकून मिला। लड़ाई झगड़े के बाद यह प्यार और भी मीठा लगता है। दिन में दुश्मन, रात में पिया में यही तो खासियत है। हर प्रसंग के बाद अगले का इंतजार बढ़ जाता है। यह जोड़ी पर्दे पर बहुत जंचती है।