इस दृश्य में तनाव साफ़ झलकता है। लाल कमीज़ वाला आदमी बहुत घमंडी लग रहा है जबकि सफेद जैकेट वाला शांत खड़ा है। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण लगता है। कांपते हुए आदमी की हालत देखकर तरस आता है। ऐसा लगता है कि कोई बड़ी टक्कर होने वाली है। सबकी नज़रें एक दूसरे पर टिकी हैं। यह दृश्य बहुत गहराई से बनाया गया है।
मुकाबला बहुत तेज़ था। काले चमड़े के कपड़े वाली महिला ने हमला किया लेकिन सफेद जैकेट वाले ने आसानी से बचाव कर लिया। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे लड़ाई के दृश्य देखने को मिलते हैं जो दिलचस्प होते हैं। उस महिला के गिरने का तरीका बहुत नाटकीय था। नायक की ताकत का अंदाज़ा इसी से लग जाता है कि वह बिना हिले सब संभाल लेता है। तलवार की चमक भी बहुत खूबसूरत थी।
शराब का गिलास लिए महिला बहुत रहस्यमयी लग रही है। वह सब कुछ शांति से देख रही है जैसे उसे सब पता हो। वैद्य भी, योद्धा भी के इस पार्ट में उसका किरदार बहुत गहरा लग रहा है। टेबल पर बैठे लोगों के बीच की दुश्मनी साफ़ दिख रही है। कोई किसी पर भरोसा नहीं कर रहा है। माहौल में खतरा साफ़ महसूस किया जा सकता है। उसकी खामोशी शोर मचा रही है।
चमड़े का जैकेट पहने आदमी रो रहा है और माफ़ी मांग रहा है। लाल कमीज़ वाले को उस पर कोई दया नहीं आ रही है। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे भावनात्मक दृश्य कहानी को आगे बढ़ाते हैं। सफेद जैकेट वाला बीच में बचाने वाला लग रहा है। यह दोस्ती की मिसाल है या कोई और रिश्ता है। दर्शक के रूप में यह देखना रोमांचक है। यह कमजोरी नहीं बल्कि मजबूरी है।
कमरे की सजावट बहुत अमीराना है लेकिन माहौल डरावना है। लाल कमीज़ वाला हंस रहा है जैसे उसने जीत लिया हो। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह गलतफहमी जल्द दूर होने वाली है। नायक की आंखों में आत्मविश्वास साफ़ दिख रहा है। वह जानता है कि अंत में क्या होने वाला है। यह धैर्य ही उसकी ताकत है। दीवारों पर लगी पेंटिंग भी कुछ कहती हैं।
महिला के हमले के बाद सबकी सांसें रुक गई थीं। सफेद जैकेट वाले ने बिना गुस्सा किए सब संभाल लिया। वैद्य भी, योद्धा भी में नायक का यह रूब बहुत पसंद आ रहा है। लाल कमीज़ वाले के चेहरे के भाव बदलते हुए दिखे। उसे अब समझ आ गया है कि सामने कौन है। अब खेल असली शुरू होगा। हवा में भी बदलाव महसूस हो रहा था।
टेबल पर खाना पड़ा है लेकिन किसी को भूख नहीं है। सबकी नज़रें एक दूसरे को घूर रही हैं। वैद्य भी, योद्धा भी के इस कड़ी में रहस्य बहुत बढ़िया है। काले कपड़े वाली महिला का आगमन धमाकेदार था। उसकी ताकत का अंदाज़ा उसकी चाल से लगता है। लेकिन नायक के आगे वह भी फीकी पड़ गई। बर्तनों की आवाज़ भी बंद हो गई थी।
लाल कमीज़ वाले के चेहरे पर एक अलग ही नशा है। उसे लगता है कि वह इस कमरे का राजा है। वैद्य भी, योद्धा भी में खलनायक का किरदार बहुत मज़बूत दिखाया गया है। सफेद जैकेट वाला शांत खड़ा होकर सब देख रहा है। यह शांति तूफान से पहले की शांति लग रही है। दर्शक बेचैनी से अगला दृश्य देखना चाहते हैं। कुर्सी पर बैठने का तरीका भी अलग था।
रोने वाले आदमी की आंखों में डर साफ़ दिख रहा था। उसे पता है कि अब उसका क्या होने वाला है। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह डर बहुत असली लगता है। नायक ने जब उसे देखा तो एक उम्मीद जगी। क्या वह उसे बचा पाएगा। यह सवाल हर किसी के मन में चल रहा है। पसीना उसके माथे पर साफ़ दिख रहा था।
अंत में लाल कमीज़ वाला फिर से शराब पीने लगा। उसे लगता है कि सब कुछ उसके काबू में है। वैद्य भी, योद्धा भी के इस अंत में बहुत कुछ होने वाला है। सफेद जैकेट वाले की मुस्कान में एक राज छिपा है। यह दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बहुत ही बेहतरीन अभिनय और निर्देशन है। शराब के गिलास में भी हिलजुल हो रही थी।