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वैद्य भी, योद्धा भीवां6एपिसोड

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वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

कार्ड का खेल और दिल की बात

इस दृश्य में तनाव साफ झलकता है जब वह लड़का कार्ड सौंपता है। काली पोशाक वाली लड़की की आंखों में चिंता साफ दिख रही थी। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में ऐसा मोड़ आना लाजमी था। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का अनुभव काफी रोमांचक रहा है। हर भाव में गहराई है जो दर्शकों को बांधे रखती है। सफेद जैकेट वाला किरदार काफी रहस्यमयी लग रहा है।

खामोशी का शोर

जब वह दोनों लड़कियां सामने खड़ी होती हैं तो माहौल बदल जाता है। डेनिम टॉप वाली की चुप्पी सब कुछ कह रही है। वैद्य भी, योद्धा भी में रिश्तों की यह उलझन बहुत पसंद आई। सोफे पर बैठकर वह लड़का जो अंदाज दिखाता है वह लाजवाब है। बिना संवाद के ही कहानी आगे बढ़ती हुई महसूस होती है। यह लघु नाटक अपने आप में एक मिसाल है।

अहंकार और प्यार का संगम

नायक के चेहरे पर जो मुस्कान है वह कई सवाल खड़े करती है। काली पोशाक वाली नायिका की हिम्मत देखते ही बनती है। वैद्य भी, योद्धा भी की पटकथा में यह पल सबसे अहम लगता है। नेटशॉर्ट ऐप की गुणवत्ता हमेशा की तरह बेहतरीन रही है। कैमरा कोणों ने भावनाओं को बहुत करीब से कैद किया है। दर्शक इस अधूरे अंत के बाद अगला भाग देखने को मजबूर हो जाएंगे।

रिश्तों की नई परिभाषा

तीन पात्रों के बीच की यह त्रिकोणीय कहानी बहुत दिलचस्प है। जब वह लड़की इशारा करती है तो लगता है कुछ बड़ा होने वाला है। वैद्य भी, योद्धा भी में नाटक का तड़का बहुत सही मात्रा में है। रंगों का इस्तेमाल और कपड़ों का चयन भी काफी आधुनिक लग रहा है। हर फ्रेम में एक नया संदेश छिपा हुआ है जो गहराई से सोचने पर मिलता है।

आंखों की भाषा

संवाद से ज्यादा आंखों की बातचीत इस दृश्य में हावी है। सफेद जैकेट वाले का रवैया थोड़ा घमंडी लग सकता है पर आकर्षक है। वैद्य भी, योद्धा भी की वजह से मैंने नेटशॉर्ट ऐप इस्तेमाल करना शुरू किया था। अब रोजाना देखने की आदत सी हो गई है। ऐसे किरदार जो सादे लगते हैं पर गहरे हैं, उन्हें निभाना आसान नहीं होता। अभिनय में दम है जो दर्शकों को बांधे रखता है।

धन और भावनाओं का टकराव

कार्ड सौंपने का तरीका ही बता रहा है कि पैसा यहां अहम भूमिका निभा रहा है। पर दिल की बातें कुछ और ही कहानी कह रही हैं। वैद्य भी, योद्धा भी में यह संघर्ष बहुत अच्छे से दिखाया गया है। डेनिम वाली लड़की का खड़ा होना और चुप रहना भी एक संकेत है। माहौल में जो गंभीरता है वह पूरे कथानक को वजन देती है। यह लघु फिल्म अपने समय का सही उपयोग करती है।

मोड़ पर खड़ी कहानी

जब वह सोफे पर बैठता है तो लगता है अब वह खेल शुरू करने वाला है। दोनों लड़कियों के बीच की दूरी भी कुछ बयां कर रही है। वैद्य भी, योद्धा भी का यह भाग काफी उत्सुकता बढ़ाता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसी सामग्री मिलना आज के समय में दुर्लभ है। रोशनी और मंच सजावट भी कहानी के मूड के साथ पूरी तरह मेल खाते हैं। हर छोटी चीज पर ध्यान दिया गया है।

खामोश चीखें

काली पोशाक वाली लड़की की आवाज में जो ठहराव है वह शक्तिशाली है। वह लड़का जो मुस्कुरा रहा है वह शायद जीत का दावा कर रहा है। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे दृश्य बारबार देखने को मिलते हैं। पर इस बार कुछ अलग लग रहा है। नेटशॉर्ट ऐप का दिखावट भी बहुत उपयोग में आसान है जिससे देखने में मजा आता है। कहानी की गति बहुत संतुलित रखी गई है।

फैसले की घड़ी

उंगली उठाने का इशारा किसी आरोप जैसा लग रहा है या शायद कोई वादा। डेनिम टॉप वाली की मासूमियत इसके विपरीत है। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। नेटशॉर्ट ऐप पर लगातार देखने का मन करता है। किरदारों के कपड़े उनके व्यक्तित्व को बहुत अच्छे से दर्शाते हैं। यह दृश्य कथा का बेहतरीन उदाहरण है।

अनकही दास्तान

अंत में वह मुस्कान जो वह लड़का देता है वह सब कुछ बदल सकती है। काली पोशाक वाली की चिंता जायज लग रही है इस मोड़ पर। वैद्य भी, योद्धा भी ने दर्शकों के दिलों में जगह बना ली है। नेटशॉर्ट ऐप की वजह से ऐसे शो मिल पाना आसान हुआ है। हर भाग के बाद नया सवाल खड़ा हो जाता है जो अगले हिस्से के लिए बेचैन करता है। यह कला का सही रूप है।