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वैद्य भी, योद्धा भीवां64एपिसोड

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वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

मुखौटे वाली महिला का खौफनाक प्रवेश

मुखौटा वाली महिला का प्रवेश बहुत डरावना था। कमरे में सन्नाटा छा गया जब वह चलती हुई आई। गुरुदेव की हालत देखकर लग रहा था कि वह कुछ छिपा रहे हैं। यह वैद्य भी, योद्धा भी श्रृंखला का सबसे रोमांचक मोड़ है। कल्पना जोशी का किरदार बहुत रहस्यमयी लग रहा है।

गुरुदेव की डरी हुई हालत

शुरुआत में दो लोगों की बातचीत से लग रहा था कि सब ठीक है, लेकिन अचानक दृश्य बदल गया। बुजुर्ग व्यक्ति के मुंह से खून निकल रहा था और वह डर के मारे कांप रहा था। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह ट्विस्ट बहुत गहरा है। उस तस्वीर ने सब कुछ बदल दिया।

काले कोट और सफेद मुखौटे का अनोखा मेल

काले चमड़े का कोट और सफेद मुखौटा, यह मेल बहुत अनोखा है। उसने जब फोन मिलाया तो लगा कि कोई बड़ी साजिश रची जा रही है। दूसरी गुरु बहन कौन होगी? यह सवाल दिमाग में घूम रहा है। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे रहस्य बहुत पसंद आ रहे हैं।

तस्वीर ने बदल दी सारी कहानी

गुरुदेव सुरज राठौर के गुरु हैं, फिर भी वह इतने डरे हुए क्यों हैं? यह सवाल हर दर्शक के मन में आ रहा होगा। जब उस महिला ने तस्वीर दिखाई तो उनकी आंखों में खौफ साफ दिख रहा था। वैद्य भी, योद्धा भी की पटकथा बहुत मजबूत लग रही है। हर सीन में नया खुलासा हो रहा है।

कमरे का सिनेमेटिक माहौल

कमरे में पड़े हुए बेहोश लोग और बीच में खड़ी वह रहस्यमयी महिला। दृश्य बहुत ही फिल्मी है। रोशनी और अभिनय ने माहौल को और भी गहरा बना दिया है। कल्पना जोशी का किरदार आरव सिंह से कैसे जुड़ा है, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। वैद्य भी, योद्धा भी देखने का मजा आ रहा है।

लाल कार्ड की चेतावनी

लाल कार्ड का इस्तेमाल बहुत चतुर तरीके से किया गया है। यह सिर्फ एक पत्ता नहीं, बल्कि एक चेतावनी लग रही थी। बुजुर्ग व्यक्ति को घुटनों के बल गिरना पड़ा। यह शक्ति का प्रदर्शन था। वैद्य भी, योद्धा भी में शक्ति के समीकरण बहुत दिलचस्प तरीके से दिखाए गए हैं। मुझे यह कहानी बहुत पसंद आई।

अंधेरे कमरे में बढ़ता दबाव

स्लेटी सूट वाले व्यक्ति की बातचीत में गंभीरता थी। लेकिन असली खेल तो अंधेरे कमरे में शुरू हुआ। जब वह महिला चलकर आगे बढ़ी तो हर कदम पर दबाव बढ़ता गया। वैद्य भी, योद्धा भी के इस कड़ी में घबराहट का स्तर बहुत ऊंचा है। अगला सीन क्या होगा, यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो रहे हैं।

तस्वीर वाले युवक का राज

तस्वीर वाले युवक की पहचान क्या है? यह जानना बहुत जरूरी हो गया है। गुरुदेव की हालत देखकर लग रहा है कि वह उस युवक से डरते हैं या फिर किसी और वजह से। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में हर किरदार के पीछे एक राज छिपा है। यह रहस्य सुलझाने में मजा आ रहा है। मुझे नेटशॉर्ट पर यह श्रृंखला बहुत अच्छी लगी।

बुजुर्ग अभिनेता का शानदार अभिनय

अभिनय बहुत स्वाभाविक है, खासकर बुजुर्ग अभिनेता की। डर और बेचैनी को उन्होंने बहुत अच्छे से व्यक्त किया। सामने खड़ी महिला का चेहरा नहीं दिख रहा, फिर भी उसकी मौजूदगी भारी लग रही है। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे किरदारों की गहराई दर्शकों को बांधे रखती है। यह दृश्य देखकर मैं हैरान रह गया।

अगली कड़ी का बेसब्री से इंतजार

अंत में जब उसने फोन उठाया, तो लगा कि कहानी अभी शुरू हुई है। दूसरी गुरु बहन का जिक्र भविष्य के लिए बड़ा मोड़ है। वैद्य भी, योद्धा भी के दल ने बहुत मेहनत की है। मंच की सजावट से लेकर कपड़ों तक सब कुछ बेहतरीन है। मैं अगली कड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। यह श्रृंखला बहुत हिट होगी।