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वैद्य भी, योद्धा भीवां80एपिसोड

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वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

लाल कार्पेट का नाटक

शुरूआत में ही इतना बड़ा नाटक देखकर हैरान रह गई। लाल कार्पेट पर घुटनों के बल बैठना किसी अपमान से कम नहीं था। नीले सूट वाले शख्स की खामोशी सब कुछ कह रही थी। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे दृश्य दिल दहला देते हैं। किरदारों के बीच की तनावपूर्ण चुप्पी ने माहौल को और भी गंभीर बना दिया। क्या यह बदले की शुरुआत है? जानने के लिए बेताब हूं। यह दृश्य बहुत ही शक्तिशाली था और दर्शकों को बांधे रखता है।

लिविंग रूम की साजिश

लिविंग रूम वाला दृश्य काफी दिलचस्प था। इतनी सारी खूबसूरत महिलाएं और बीच में बस एक ही नायक। बातचीत के अंदाज से साफ लग रहा था कि कोई बड़ी साजिश रची जा रही है। वाइन के ग्लास आपस में टकराए, पर नजरें कुछ और ही कहानी कह रही थीं। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम साबित होगा। हर किसी के चेहरे पर एक अलग ही नकाब था। माहौल में एक अजीब सी खामोशी थी।

नशे का असली खेल

शराब पीने के बाद सबका एक साथ सो जाना संयोग नहीं लग रहा। ऐसा लगा जैसे किसी ने जानबूझकर यह सब योजना बनाकर किया हो। नायक की आंखों में चमक साफ दिखाई दे रही थी कि वह सब कुछ जानता है। काले सूट वाली लड़की के साथ उसका व्यवहार काफी सुरक्षात्मक था। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे मोड़ उम्मीद से ज्यादा रोमांचक हैं। अंत तक क्या होगा, यह देखना बाकी है। सस्पेंस बना हुआ है।

बेडरूम की खामोशी

बेडरूम वाले दृश्य में जो करीबियत दिखाई गई वह बहुत ही खूबसूरत थी। नायक ने जब उसे गोद में उठाया, तो लगा जैसे वह किसी परी को संभाल रहा हो। बिस्तर पर लिटाने के बाद की खामोशी में भी एक शोर था। वैद्य भी, योद्धा भी के इस चरमोत्कर्ष ने दिल को छू लिया। उनकी आंखों के इशारे ही काफी थे बात कहने के लिए। यह पल हमेशा याद रहेगा। रोमांस की बेहतरीन झलक।

अंत का चुंबन दृश्य

कहानी के अंत में जो चुंबन दृश्य था, वह पूरी कहानी का निचोड़ लग रहा था। बड़ी समाप्ति का लेख आते ही रोंगटे खड़े हो गए। इतनी मेहनत के बाद अंततः उन्हें एक दूसरा मिल ही गया। वैद्य भी, योद्धा भी ने हमें भावनाओं के सागर में उतार दिया। नायक की जीत और प्यार दोनों ही देखने को मिले। अब दूसरा भाग कब आएगा, इसका इंतजार रहेगा। अंत बहुत ही सुखद था।

नायक का रहस्यमयी रूप

सफेद जैकेट वाले नायक का किरदार बहुत ही रहस्यमयी लगा। शुरू में वह हंस रहा था, पर बाद में गंभीर हो गया। लड़कियों के बीच रहकर भी उसका नियंत्रण काबिले तारीफ था। वैद्य भी, योद्धा भी में किरदारों की गहराई बहुत अच्छे से दिखाई गई है। हर अभिनेत्री ने अपनी भूमिका को पूरी ईमानदारी से निभाया। यह ड्रामा सिर्फ मनोरंजन नहीं, एक कला है। प्रदर्शन शानदार था।

सेट डिजाइन की खूबसूरती

लाल कार्पेट वाला दृश्य और फिर घर का महफिल वाला माहौल, दोनों बिल्कुल अलग थे। एक तरफ तनाव था तो दूसरी तरफ ठंडी हवाएं चल रही थीं। वाइन पीने के बाद का माहौल कुछ और ही था। वैद्य भी, योद्धा भी की टीम ने मंच सजावट और रोशनी का ध्यान रखा। हर फ्रेम को देखकर लग रहा था कि यह किसी फिल्म से कम नहीं है। बहुत शानदार निर्माण। दृश्य अद्भुत थे।

नींद के पीछे का सच

काले कोट वाली लड़की की आंखों में जो नींद थी, वह नशे की नहीं लग रही थी। शायद वह जानबूझकर सोने का नाटक कर रही थी। नायक को यह बात पता थी, इसलिए वह पास आया। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे मानसिक खेल देखना बहुत मजेदार है। दर्शक को हमेशा अनुमान लगाते रहना पड़ता है कि आगे क्या होगा। यह अनिश्चितता ही इसकी खूबसूरती है। मनोविज्ञान गहरा है।

रोमांस की नई परिभाषा

सभी लड़कियों के सो जाने के बाद का दृश्य सबसे ज्यादा तीव्र था। कमरे में सन्नाटा था, बस दो लोगों की सांसें सुनाई दे रही थीं। नायक ने जब उसे देखा, तो लगा समय थम गया हो। वैद्य भी, योद्धा भी के इस भाग ने रोमांस की नई परिभाषा गढ़ दी। बिना ज्यादा संवाद के ही इतना कुछ कह दिया। यह प्रतिभा हर किसी के पास नहीं होती। सच में लाजवाब। माहौल जादुई था।

संगीत और गुणवत्ता

पूरी कहानी में जो संगीत और पृष्ठभूमि ध्वनि थी, वह माहौल के साथ बिल्कुल अनुकूल बैठ रही थी। खासकर अंत वाले दृश्य में संगीत ने जादू कर दिया। वैद्य भी, योद्धा भी की टीम ने हर छोटी चीज का ध्यान रखा है। कपड़ों से लेकर फर्नीचर तक सब कुछ उच्च गुणवत्ता वाला लगा। ऐसे कार्यक्रम को देखना सुकून देने वाला है। बस यही उम्मीद है कि ऐसे ही अच्छे धारावाहिक आते रहें। गुणवत्ता उत्कृष्ट है।