बीज रंग के सूट वाला लड़का बहुत उत्साहित लग रहा था, पर क्या वह जानता है कि आगे क्या होने वाला है? वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे मोड़ देखकर मज़ा आ गया। नीले सूट वाले की मुस्कान में छिरी खतरनाक चाल साफ दिख रही थी। सबकी नज़रें उसी पर टिकी हुई थीं और माहौल में तनाव बढ़ता जा रहा था।
लाल पोशाक वाली महिला की चिंता साफ झलक रही थी। शायद उसे पता है कि करण राणा के आने से सब बदल जाएगा। वैद्य भी, योद्धा भी का यह सीन दिलचस्प है। हर किसी के चेहरे पर एक अलग कहानी लिखी हुई थी। उसकी आंखों में डर और उम्मीद दोनों साफ दिखाई दे रहे थे।
काली पोशाक वाली महिला बहुत शांत लग रही थी, जैसे वह सब कुछ जानती हो। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे किरदार हमेशा रहस्यमयी होते हैं। लाल गलीचे पर चलने का अंदाज़ ही कुछ और था। उसने अपना क्लच ऐसे पकड़ा था जैसे कोई हथियार हो।
करण राणा का प्रवेश जैसे ही हुआ, माहौल बदल गया। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे शेयरहोल्डर वाले ट्विस्ट बहुत पसंद आए। बुजुर्ग आदमी की बात सुनकर सबकी सांसें रुक गई थीं। उसकी आवाज़ में वजन था जो सबको चुप करा रहा था।
नीले सूट वाले की हंसी देखकर गुस्सा आ रहा था। उसे लगता है वह जीत गया है, पर कहानी अभी बाकी है। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे विलेन को सबक मिलना चाहिए। उसकी आंखों में घमंड साफ दिख रहा था और वह सबको हल्के में ले रहा था।
बीज रंग वाले लड़के का जोश देखने लायक था, पर क्या वह अनुभव के आगे टिक पाएगा? वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह संघर्ष मुख्य है। उसने हाथ हिलाकर सबका ध्यान खींच लिया था। उसकी मुस्कान में एक अलग ही चमक थी जो सबको पसंद आ रही थी।
हल्के नीले पोशाक वाली महिला का आगमन जैसे किसी तूफान से कम नहीं था। वैद्य भी, योद्धा भी में हर किरदार का अपना वजन है। उसने करण राणा का हाथ थामा हुआ था जो काफी कुछ कह रहा था। सबकी नज़रें अब उनकी तरफ मुड़ गई थीं और सन्नाटा छा गया।
इस सभा हॉल की सजावट बहुत शानदार थी, पर असली नाटक मंच पर नहीं बल्कि लोगों के बीच हो रहा था। वैद्य भी, योद्धा भी की बनावट भी बहुत अच्छी लगी। लाल कार्पेट पर हर कदम भारी लग रहा था। रोशनी भी बहुत नाटकीय तरीके से डाली गई थी।
जब बुजुर्ग ने उंगली उठाई, तो लगा जैसे किसी को चेतावनी दी गई हो। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे नाटकीय पल बार-बार देखने को मिलते हैं। बीज रंग वाले लड़के का चेहरा देखने लायक था। उसकी हैरानी साफ झलक रही थी उस पल में।
अंत में नीले सूट वाले की हंसी ने सब कुछ बदल दिया। क्या यह उसकी जीत है या हार की शुरुआत? वैद्य भी, योद्धा भी की अगली कड़ी देखने की बेताबी बढ़ गई है। सब कुछ इतना तेज़ी से बदल रहा था कि समझ नहीं आ रहा था।