PreviousLater
Close

वैद्य भी, योद्धा भीवां5एपिसोड

2.0K2.0K

वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

दमदार एंट्री और डर का माहौल

सफेद जैकेट वाले का आगमन ही कुछ और था। जैसे ही उसने चाकू निकाला, सामने वाले की हालत खराब हो गई। डर के मारे वह कांप रहा था। यह दृश्य बहुत ही रोमांचक था। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे दृश्य देखकर मजा आ गया। कारवाई और संवाद का तालमेल बहुत अच्छा बना है। हर कोई इसकी तारीफ कर रहा है। मुझे यह शैली बहुत पसंद आई है।

नीली सूट वाले की घबराहट

नीली सूट वाले शख्स की आंखों में साफ डर दिख रहा था। जब चाकू उसकी नाक के पास लाया गया, तो वह चीखने ही वाला था। इतनी तीव्रता वाले दृश्य कम ही देखने को मिलते हैं। कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। दर्शकों को यह पसंद आएगा। बिल्कुल दमदार प्रदर्शन था। वैद्य भी, योद्धा भी की यह कड़ी बहुत यादगार बन गई है।

लड़कियों की चुप्पी और तनाव

दोनों लड़कियों की प्रतिक्रिया देखने लायक थी। वे चुपचाप सब देख रही थीं। शायद उन्हें इस नतीजे की उम्मीद थी। कमरे का माहौल बहुत तनावपूर्ण था। फर्श पर पड़े लोग बता रहे हैं कि लड़ाई कड़ी थी। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में यह अहम मोड़ है। आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता बढ़ गई है। सबको यह देखना चाहिए।

नायक का खतरनाक अंदाज

नायक की अदाकारी में एक अलग ही नशा है। वह मुस्कुराते हुए भी खतरनाक लग रहा था। चाकू को घुमाने का अंदाज बहुत आकर्षक था। खलनायक की हिम्मत जवाब दे गई थी। ऐसे दृश्य देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। निर्देशन बहुत शानदार है। हर पल में जान है। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसी झलक मिलना सुखद है। बस यही उम्मीद है।

नाम के अनुसार ही कहानी

इस कार्यक्रम का नाम वैद्य भी, योद्धा भी बहुत सार्थक है। क्योंकि यहां ताकत और दिमाग दोनों का खेल है। सफेद जैकेट वाले ने बिना मेहनत के सबको हरा दिया। यह उसकी ताकत को दिखाता है। डर का माहौल बहुत अच्छे से बनाया गया है। दर्शक इससे जुड़ाव महसूस करेंगे। मुझे यह शैली बहुत पसंद आया। आगे की कहानी का इंतजार है।

एकतरफा लड़ाई का नतीजा

फर्श पर पड़े गुंडों को देखकर लग रहा था कि लड़ाई एकतरफा थी। नायक ने अपनी ताकत का लोहा मनवा दिया। नीली सूट वाला अब क्या करेगा, यह सवाल बना हुआ है। चाकू वाला दृश्य सबसे ज्यादा यादगार रहा। संपादन और पृष्ठभूमि संगीत ने माहौल बनाया। यह श्रृंखला अपनी शैली में श्रेष्ठ है। वैद्य भी, योद्धा भी जरूर देखें।

संवाद और धमकी का असर

संवाद वितरण बहुत दमदार था। नायक ने हंसते हुए धमकी दी, जो सबसे ज्यादा डरावनी थी। सामने वाले की सांसें अटक गई थीं। ऐसे पल बार बार देखने को नहीं मिलते। कहानी में यह महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। वैद्य भी, योद्धा भी के प्रशंसकों को यह बहुत पसंद आएगा। मैं अगली कड़ी का इंतजार कर रहा हूं। बहुत रोमांचक लगा।

सेट डिजाइन और रोशनी

कमरे की सजावट और रोशनी बहुत आलीशान थी। बड़ी खिड़कियों से आती रोशनी ने दृश्य को और नाटकीय बनाया। किरदारों के कपड़े भी उनकी पहचान बता रहे थे। नायक का जैकेट और खलनायक का सूट शानदार लग रहा था। दृश्यों पर बहुत मेहनत की गई है। यह कार्यक्रम सिर्फ कारवाई नहीं, बल्कि एक कलाकृति है। वैद्य भी, योद्धा भी बहुत प्रभावशाली लगा।

लड़कियों की भूमिका क्या होगी

दो लड़कियों में से एक की पोशाक बहुत आकर्षक थी। उन्होंने चुपचाप सब देखा। शायद वे नायक की ताकत से प्रभावित थीं। कहानी में इनकी भूमिका क्या होगी, यह देखना बाकी है। अभी तो बस कारवाई और डर का माहौल है। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे मोड़ की उम्मीद थी। निर्माताओं ने दर्शकों की पसंद का ख्याल रखा है। सबको पसंद आएगा।

जीत का जश्न और अगला कदम

अंत में नायक का अंदाज बता रहा था कि वह जीत चुका है। वह बेफिक्र होकर खड़ा था। खलनायक अब भी डरा हुआ था। यह शक्ति संतुलन बहुत अच्छा दिखाया गया। कहानी आगे बढ़ेगी तो और मजा आएगा। मुझे यह किरदार बहुत पसंद आया। ऐसे कार्यक्रम देखकर समय बर्बाद नहीं होता। वैद्य भी, योद्धा भी सबको देखना चाहिए। बहुत बढ़िया काम है।