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वैद्य भी, योद्धा भीवां69एपिसोड

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वैद्य भी, योद्धा भी

परम योद्धा आरव सिंह अपने शुद्ध तेज शरीर के कारण नींव स्तर के शिखर पर अटका था। उसके गुरु साधक ने उसे उस लड़की को खोजने का आदेश दिया जिसके शरीर पर "रहस्यमयी निशान" हो, ताकि वह अपनी रुकावट तोड़ सके। गुरु ने उसकी गुरु बहनों को भी मदद करने भेजा। पहाड़ से उतरने की उसी रात, आरव की मुलाकात चंद्र ग्रुप की सीईओ तारा चंद्र से हुई। वह उसका बॉयफ्रेंड बन गया और उसकी सहेलियों की रक्षा करने लगा। अपनी चिकित्सा और युद्ध कला के दम पर, आरव ने दुश्मनों को मुँह की खाई और जिंदगी की सबसे ऊँची सीढ़ी पर पहुँच गया।
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इस एपिसोड की समीक्षा

तनावपूर्ण माहौल

इस दृश्य में तनाव साफ़ दिख रहा है। स्लेटी सूट वाले युवक की चिंता देखकर लगता है कि कुछ बड़ा होने वाला है। बुजुर्ग व्यक्ति का गुस्सा और फिर अचानक तबीयत खराब होना कहानी में नया मोड़ लाता है। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में ऐसा ड्रामा देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हर किसी के चेहरे पर अलग भाव हैं जो संघर्ष को दर्शाते हैं। भोजन कक्ष का माहौल बहुत गंभीर है और दर्शक को बांधे रखता है।

शांत चेहरा पीछे की साजिश

पहिएदार कुर्सी पर बैठे युवक की शांति और सामने खड़े लोगों का शोर एकदम विपरीत है। लगता है वह सब कुछ जानबूझकर कर रहा है। बुजुर्ग दादाजी का लाठी टेकते हुए गुस्सा करना बहुत शक्तिशाली दृश्य था। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे परिवारिक झगड़े बहुत दिलचस्प लगते हैं। भूरे सूट वाले की मुस्कान से लगता है कि वह कुछ साजिश रच रहा है। यह कहानी आगे क्या मोड़ लेगी देखना बाकी है।

लेदर जैकेट वाली लड़की

काले चमड़े के कोट वाली लड़की की एंट्री बहुत धांसू थी। उसकी आंखों में गुस्सा और चेहरे पर बेचैनी साफ़ झलक रही थी। जब बुजुर्ग व्यक्ति को छाती में दर्द हुआ तो सबकी घबराहट देखने लायक थी। वैद्य भी, योद्धा भी के इस एपिसोड में भावनात्मक ड्रामा चरम पर है। नीले सूट वाले व्यक्ति का घमंड टूटता हुआ दिख रहा है। ऐसे पल बार बार देखने को मिलें तो अच्छा लगे।

नायक की चिंता

इस शो में हर किरदार की अपनी एक अलग पहचान है। स्लेटी सूट वाला शायद नायक है जो सबको बचाने की कोशिश कर रहा है। बुजुर्ग व्यक्ति की सेहत का ख्याल सबको है पर गुस्सा किसी को नहीं रुकने दे रहा। वैद्य भी, योद्धा भी की स्क्रिप्ट बहुत मजबूत लग रही है। भूरे सूट वाले युवक की हंसी से लगता है कि असली खलनायक वही हो सकता है। माहौल में जो तनाव है वह पर्दे के पार भी महसूस होता है।

लाल कार्पेट पर हंगामा

लाल कार्पेट पर खड़े सभी लोग किसी बड़े खुलासे का इंतजार कर रहे हैं। बुजुर्ग दादाजी का अचानक बिगड़ना सबके लिए झटका था। स्लेटी सूट वाले की आंखों में डर और चिंता साफ़ पढ़ी जा सकती है। वैद्य भी, योद्धा भी के इस भाग में ऐसे मोड़ कहानी को रोमांचक बनाते हैं। पहिएदार कुर्सी वाले का शांत रहना भी कई सवाल खड़े करता है। क्या वह सबके पीछे का मुख्य सूत्रधार है? यह जानने के लिए देखते रहना होगा।

घमंडी खलनायक

नीले सूट वाले व्यक्ति का अहंकार उसे कहीं का नहीं छोड़ेगा ऐसा लग रहा है। उसकी बांधे हुए हाथ और घमंडी चेहरा सब कुछ बता रहे हैं। बुजुर्ग व्यक्ति जब चिल्लाए तो पूरा कक्ष शांत हो गया। वैद्य भी, योद्धा भी के इस दृश्य में अभिनय बहुत लाजवाब है। भूरे सूट वाले की चालाकी भरी मुस्कान ने ध्यान खींचा। ऐसे नाटकीय पल दर्शकों को बांधे रखते हैं और अगली कड़ी के लिए उत्सुक करते हैं।

परिवार की इज्जत

भोजन कक्ष की सजावट बहुत सुंदर है पर वहां का माहौल बिल्कुल भी सुहावना नहीं है। सभी मेहमान हैरान होकर यह तमाशा देख रहे हैं। स्लेटी सूट वाले युवक की स्थिति बहुत नाजुक लग रही है बीच में। वैद्य भी, योद्धा भी की कहानी में परिवार की इज्जत का सवाल जुड़ा हुआ है। बुजुर्ग व्यक्ति की लाठी और गुस्सा उनकी ताकत को दर्शाता है। पर सेहत खराब होने से सबकी नींद उड़ गई है। यह कहानी बहुत गहरी होती जा रही है।

शतरंज की बाजी

पहिएदार कुर्सी वाले युवक की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। वह सब कुछ शांति से देख रहा है जैसे कोई शतरंज की बाजी खेल रहा हो। बुजुर्ग दादाजी का गुस्सा जायज भी है और गलत भी। वैद्य भी, योद्धा भी में ऐसे किरदारों की परतें धीरे धीरे खुल रही हैं। भूरे सूट वाले की हंसी से लगता है कि उसे सब पहले से पता था। यह रहस्य बनाए रखना आसान नहीं है पर यह कार्यक्रम इसे अच्छे से कर रहा है।

भावनाओं का खेल

काली पोशाक वाली लड़की की चिंता साफ़ दिख रही है जब बुजुर्ग व्यक्ति को तकलीफ हुई। सब लोग इधर उधर भागने लगे हैं। स्लेटी सूट वाले ने संभालने की कोशिश की पर हालात काबू से बाहर हैं। वैद्य भी, योद्धा भी के इस हिस्से में रोमांच और भावनाएं दोनों हैं। नीले सूट वाले की बेरुखी दिल को ठेस पहुंचाती है। ऐसे परिवारिक कलह देखकर लगता है कि अमीर घरानों की कहानियां कितनी जटिल होती हैं।

बदले की आग

अंत में भूरे सूट वाले की मुस्कान ने सबका ध्यान खींच लिया। लगता है कि उसकी योजना सफल हो गई है। बुजुर्ग व्यक्ति की तबीयत संभाली गई पर कहानी में बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। वैद्य भी, योद्धा भी की अगली कड़ी कब आएगी इसका इंतजार है। स्लेटी सूट वाले की आंखों में अब गुस्सा दिखने लगा है। बदला लेने का समय शायद आ गया है। यह कहानी अब और भी रोमांचक होने वाली है।